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ब्रह्म गाय के नाम से जानी जाती है पुंगनूर: पीएम मोदी के आवास में वैदिक काल की यह विरासत

Summary
वैदिक ग्रंथों और पुराणों में इन गायों का जिक्र 'ब्रह्म गाय' के रूप में मिलता है। महर्षि विश्वामित्र और वशिष्ठ के समय से जुड़ी यह नस्ल उस दौर में 'ब्रह्मा नस्ल' कहलाती थी।

मकर संक्रांति पर PM मोदी ने फिर से सबका दिल जीत लिया। छोटी-सी पुंगनूर गाय को अपने हाथों से चारा खिलाया। ये गायें तो प्रधानमंत्री आवास में भी रहती हैं… लेकिन क्या आपको पता है ये कितनी स्पेशल हैं?

ये दुनिया की सबसे छोटी गायों में से एक है – सिर्फ 2.5 से 3 फीट ऊंची। देखने में इतनी प्यारी कि मन करता है गले लगा लें। लेकिन प्यारी होने के साथ-साथ ये बहुत ताकतवर भी हैं – बीमारियां कम लगती हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता भी जबरदस्त। और इसका दूध? इसमें आम गाय के दूध में 3-4% फैट होता है, लेकिन पुंगनूर के दूध में 8% तक फैट। प्रोटीन, कैल्शियम सब मिलता है। सच में अमृत जैसा। रोज़ 3 लीटर तक दूध देती है ये छोटी सी गाय।

इतना ही नहीं, इनका इतिहास वैदिक काल से है। महर्षि विश्वामित्र से भी इनकी पौराणिक कहानी जुड़ी हुई है। पहले इन्हें ब्रह्मा गाय कहा जाता था। ये गाय आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले की शान है। वहाँ के वैद्य कृष्णम राजू ने 15 साल की मेहनत से इनकी मिनिएचर नस्ल बनाई – सिर्फ 2-3 फीट की, ताकि शहर के घरों में भी लोग गाय पाल सकें। जगह कम हो, चारा कम लगे, फिर भी गौसेवा हो जाए।

इतनी खास गाय की कीमत भी खास है – 1 लाख से 10 लाख तक! अभी पूरे देश में मिनिएचर पुंगनूर सिर्फ 300-500 ही हैं। राजू जी ने एक भी गाय पैसे लेकर नहीं बेची, सब मुफ्त में दीं। अच्छी बात ये है कि आंध्र प्रदेश सरकार ने ‘मिशन पुंगनूर’ शुरू किया है – 70 करोड़ का बजट, 5 साल का प्लान। जल्दी ही इनकी संख्या बढ़ेगी और आम लोग भी इन्हें पाल सकेंगे।

तो बॉस, पुंगनूर गाय सिर्फ छोटी नहीं… ये हमारी संस्कृति, सेहत और गौसेवा का जीता-जागता प्रतीक है।

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