माह-ए-रमजान, मीठी ईद की पाक मुक़द्दस, मीठा खजूर, हलाल बिरयानी और मीठी सेंवाइयाँ। हिंदुस्तान में बड़ा ही जन्नती माहौल चल रहा था। भाईजान लोग खुश थे। दो बिलांग छोटे पायजामे और चमकती टोपियाँ सजी हुई थी। मस्जिदों से गजब नूर बरस रहा था। इस बार की ईद सच में जबरदस्त होने वाली थी लेकिन…इस देश के काफ़िरों को चैन कहाँ? मोमिनों की मीठी ईद में कड़वाहट घोलने के लिए काफिरों ने फिर से धुरंधर नाम के काल कूट विष को मार्केट में उतार दिया है।
बताइए ये भी कोई बात हुई भाईजान? जिस पाकिस्तान को हमारे अब्बुओं के भी अब्बुओं ने अपनी तशरीफ़ों का जोर लगाकर बनाया था उसी पाकिस्तान की तशरीफ़ को काफ़िर बाण मार-मारकर छलनी कर रहे हैं? माह-ए-रमजान मोमिनों के लिए आह-ए-रमजान बनने जा रहा है। काफ़िर बता रहे हैं कि धुरंधर के बाण इतने नुकीले हैं कि पाकिस्तान प्रेमी मोमिनों की तशरीफ़ों को बेधते हुए सेक्यूलर जमात के पृष्ठ भाग तक भी पहुँचने वाले हैं।
बताने वाले तो यहाँ तक बता रहे हैं कि धुरंधर का पिछला पार्ट तो केवल तीर था लेकिन उसका लेटेस्ट वर्जन तो एकदम भाला है। धुरंधर के इस नए भाले से मोमिनों को चाहे जो कष्ट हो लेकिन बिलबिलाहट तो उनके डीप हार्ट लवर्स सेक्युलर बिरादरी की ही देखने को मिलने वाली है। अभी तो भाला चुभा भी नहीं हैं लेकिन लिबरलरांडू और सेक्युलर जमात की चीख पुकार और हाय तौबा ने अलग ही माहौल बना दिया है।
सेक्युलर रुदाली गैंग अपना शमियाना बिछाकर इंटरनेट पर धावा बोल चुकी है। धुरंधर के डायरेक्टर से लेकर दर्शकों तक को जमकर बद्दुआएँ दी जा रही हैं। कहा जा रहा है कि ये फ़िल्म तो ऐसी आग है जो इस देश के भाईचारे के ताने बाने को जलाकर राख कर देगी। फ़िल्म का नाम भी देखिए क्या रखा हुआ है? धुरंधर द रिवेंज…आख़िर इसमें किस से रिवेंज लेने की बात की जा रही है? पाकिस्तानी भाईजान भी बता रहे थे कि ये कोई सिनेमा नहीं बल्कि काफ़िरों की बदले की आग है।
आदित्य धर तुमने ये सही नहीं किया। धुरंधर का क़हर कुछ ऐसा है कि आरफ़ा फ़िलहाल कुछ बोल नहीं पा रही है। हो सकता है कि वो अभी आदित्य धर के इस नए मर्दवाद को झेलने के लिए ख़ुद को तैयार कर रही हो लेकिन तब तक के लिए मोर्चा सेक्युलर बिरादरी ने संभाला हुआ है। अभिसार शर्मा भाईजान फ़रमाते हैं कि धुरंधर तो फुल प्रोपेगंडा है जिसे बीजेपी के नफ़रती एजेंडे को ठेलने के लिए बनाया गया है। शर्मा जी फ़रमाते हैं कि अगर ये फ़िल्म प्रोपगेंडा नहीं होती तो क्या इसमें पाकिस्तान की बुराई की जाती? बताओ जरदारी का नाम बदल दिया, नवाज शरीफ़ का नाम बदल दिया? सबसे बड़ी हैरानी की बात तो ये है कि इस फ़िल्म में बताया गया है कि पाकिस्तान से भारत में नक़ली नोट आते हैं। पाकिस्तान की ऐसी बदनामी आख़िर अभिसार भाईजान कैसे सह सकते हैं?
अब इसी रुदाली गैंग की एक मेंबर का दुःख देखिए। बहन लिखती हैं कि जाने कहाँ गए वो दिन? जब मजहब और आयतों पर फ़िल्में नहीं बनाई जाती थीं। बहन शायद आगे जोड़ना भूल गई कि उन सुहाने दिनों में फ़िल्में केवल हिंदू धर्म और परंपराओं को गालियाँ देने और बदनाम करने का माध्यम हुआ करती थी। बहन का दुःख जायज़ ही है क्यूंकि अब पुराने दिन लद चुके हैं। अब मज़हब की सच्चाइयाँ भी फ़िल्मों में दिखाई जा रही हैं।
इस बीच रिस्की यादव भाईजान भी मैदान में कूद पड़े और धुरंधर में नोटबंदी और आतंकवादियों की बात होने पर दुःख जताया। PDA प्रहरी रिस्की यादव भाई को सबसे बड़ा दुःख इस बात से हुआ कि इस फ़िल्म में मरहूम अतीक अहमद को पाकिस्तान का एजेंट क्यों बताया गया है? यादव जी का दुःख जायज भी है क्यूंकि अतीक जैसे माफिया को बनाने का क्रेडिट अगर पाकिस्तान को दिया जाएगा तो रिस्की यादव के भैया जी का क्या होगा? वैसे रिस्की भाई यह सोच रहे होंगे कि शायद आदित्य धर धुरंधर २ में गुड्डू मुस्लिम के वो आख़िरी शब्द क्या थे उसकी राज खोलेंगे , लेकिन यहाँ तो कुछ ही खोल दिया गया।
इस सब के बीच धमकेदार एंट्री होती है एक मज़हबी बिरादर की। भाईजान सुलगते हुए पिछवाड़े के साथ एकदम जुगनू बने हुए हैं और फ़रमा रहे हैं कि ये आदित्य धर और यामी गौतम तो एकदम एंटी मुस्लिम है । ये जानबूझकर ऐसी फिल्में बनाते हैं जिसमें ये दिखाए जाये कि कैसे कोई मुस्लिम आतंकी बॉर्डर पार करके भारत में घुसता है और यहाँ जिहादी हमला कर देता है। भाईजान के कहने का मतलब है कि ये तो एकदम फर्जी बात है। आज तक क्या कभी ऐसा हुआ है कि पाकिस्तान से कोई आतंकी भारत में घुसा हो? पाकिस्तानी और आतंकी? ना करें भाईजान ना करें। भाईजान का नाम उमैर संधु है जिससे उसकी मज़हबी पहचान समझ नहीं आ रही थी लेकिन ट्वीट के अंत में उन्होंने जो लिखा है उससे उनकी पहचान उजागर हो गई।
किसी फ़िल्म में पाकिस्तान की हकीकत उजागर हो रही और उसके विरोध में राहुल गांधी की मुहब्बत के सिपाही ना आयें आख़िर ये कैसे हो सकता है? कांग्रेस संसद तारिक अन वर भी ख़ुद को रोक नहीं पाए और धुरंधर को बदनाम करने की चुल्ल में उड़ता हुआ भाला लपक लिया। तारिक अनवर बता रहे हैं कि ये ये फ़िल्म तो बिल्कुल ज़हर है और इस नफ़रती ज़हर को जानबूझकर इस देश के मोमिनों को पिलाया जा रहा है।
कभी अंडरवर्ल्ड के चहेते रह चुके शरद पवार की NCP सांसद फौजिया ख़ान भी धुरंधर को मुसलमानों के लिए जहर बता रही हैं। उनका कहना है कि ऐसी फ़िल्मों से भारत के मुसलमानों की भावनायें आहत होती हैं। लेकिन ये बात समझ नहीं आई कि जब धुरंधर में केवल पाकिस्तानी जिहादियों और आतंकियों के पिल्लों के बारे में दिखाया गया है तो इस से भारत के मुसलमानों की भावनाएँ क्यों आहत हो रही हैं? पाकिस्तान और ISI के गुर्गों के ऊपर पर फ़िल्म बनाना आख़िर भारत के मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाना कैसे हो गया?
ये तो केवल कुछ उदाहरण हैं लेकिन धुरंधर के ख़िलाफ़ चल रहे इस नफ़रती अभियान की कोई सीमा नहीं है। इस फ़िल्म के बहाने हिंदुओं को और मोदी सरकार को जमकर कोसा जा रहा है। जिस फ़िल्म की रिलीज पर पाकिस्तान को गालियाँ दी जानी चाहिए थी उसके ठीक विपरीत जाकर सेक्युलर और जिहादी गैंग भारत को ही बदनाम करने पर जुटी हुई हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि ये कोई पहली बार हो रहा हो। जो भी फ़िल्म राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती हो और पाकिस्तान या जिहादियों की सच्चाई उजागर करती हो तो उसके ख़िलाफ़ इस गैंग का सड़कों पर आकर कुकुरहाँव करना अब सामान्य हो चुका है। इन्होंने धुरंधर के पहले भाग को भी खूब बदनाम किया था लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस पर ऐसा धमाल मचाया था कि सभी रिकॉर्ड्स ध्वस्त हो गए थे। इस बार भी ऐसा ही होने वाला है। धुरंधर द रिवेंज धुँआधार चलने वाली है और इस जमात का दुःख और बढ़ने वाला है। धुरंधर के पिछले भाग ने इनकी तशरीफ़ों पर जो आक्रमण किया था इस बार वो चोट और करारी पड़ने वाली है और इनकी बवासीर का भगंदर होना तय है।





