डोनाल्ड ट्रम्प खुद बना डीप स्टेट, विपक्षी नेताओं के हाथ में दिया ऑपरेशन सिन्दूर वाला झुनझुना

Summary

बजट सत्र 2025 शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने संसद के परिसर से ये बात कही थी। लेकिन अब मानसून सत्र से पहले खुद डोनाल्ड ट्रम्प ही वो विदेशी चिंगारी बन गए हैं। अमेरिकी सत्ता में डीप स्टेट खत्म करने की बात कहकर वापसी करने वाले डोनाल्ड ट्रम्प अब खुद डीप स्टेट बन चुके हैं। पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिन्दूर करके आतंकी पर जवाबी कार्रवाई की। जिस कार्रवाई का हवाला देते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने अब यह बयान दिया है कि भारत – पाकिस्तान संघर्ष में 5 जेट गिरे। लेकिन चिचा, वो जेट थे किस देश के, ये कौन बताएगा?

ट्रम्प के इस ज़हर वाले उड़ते हुए तीर को हमारे देश के नेता विपक्ष राहुल गाँधी ने लपक लिया। और ट्विटर पर भारत विरोधी नैरेटिव को फिर से जीवंत करते हुए अपना नजरिया साफ़ कर दिया। ऑपरेशन सिन्दूर से दुनिया में तीन लोगों को सबसे ज्यादा मिर्ची लगी है, वो हैं – पाकिस्तान, चिचा ट्रम्प और नेता विपक्ष राहुल गाँधी।  

हमने डीप स्टेट की बात कही, असल में ये डीप स्टेट उन देशों को चुनते हैं जहाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था और एक कमजोर विपक्ष हो, जो सत्ता में आने की हर कोशिश कर रहा हो। और फिर डीप स्टेट की मदद से वह कमजोर विपक्ष अमरीका की कठपुतली बन कर उस देश में सत्ता संभालता है।

भारत में डीप स्टेट ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से लेकर, CAA विरोधी धरना प्रदर्शन और शाहीनबाग़ आंदोलन तक को हवा दी। उससे भी काम नहीं बना तो उसने पहलवान और किसान आंदोलन को हवा देना शुरू किया। और इस आंदोलन के बीच बीच में राहुल गाँधी फॉरेन विजिट पर जाते रहे। बांग्लादेश में हुए तख्तापलट में भी अमेरिका का ही हाथ था। जिसके बाद बांग्लादेश का जो हाल हुआ, वो सब देख रहे हैं। सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं बल्कि अमेरिका ने ये पैटर्न सीरिया, लीबिय, इराक सब इन्होने यहीं किया है।

अब आते हैं डोनाल्ड ट्रम्प के ऑपरेशन सिन्दूर वाले बयान पर, डोनाल्ड ट्रम्प ने कई बार मध्यस्थस्ता की बात कही है। लेकिन ऐसी कोई भी मध्यस्थस्ता भारत और पाकिस्तान के बीच नहीं हुई है। चिचा की बातें खोखली  हैं। ट्रम्प को ग्लोबल पंचायत का बड़ा भाई बनना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिन्दूर के बाद 35 मिनट की फ़ोन कॉल पर चिचा ट्रम्प से बात की थी, तब ट्रम्प के मुँह से एक बार भी मध्यस्थस्ता की बात नहीं निकली। और पीएम मोदी के उस फ़ोन कॉल ने साफ़ कर दिया कि कोई मध्यस्ता भारत और पाकिस्तान के बीच नहीं हुई है। लेकिन भारत का विपक्ष यही कहता रहा कि ट्रम्प ने बीचबचाव किया था। सोचने की बात ये है कि, असल में ट्रम्प ऑपरेशन सिन्दूर के बाद क्यों बौखला गया है? हर वक़्त बिज़नेस की धमकी या फिर ट्रेड वॉर की धमकी क्यों देता है? टैरिफ पॉलिसी का डर क्यों दिखाता है? तो बात इतनी सी है कि प्रथम विश्व युद्ध से लेकर किसी भी देश के बीच में हुए युद्ध का मूल कारण एक ही रहा है – और वो है अर्थशास्त्र – व्यापार। ट्रम्प को भी मालूम है कि भारत से बेहतर बाजार उसको दुनिया में कही नहीं मिलने वाला। इतनी बड़ी आबादी और दुनिया की टॉप ग्रोइंग इकॉनॉमी। लेकिन पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत को मजबूत करने के लिए ग्लोबल साउथ का नारा बुलंद किया है।  

ग्लोबल साउथ वो देश है जो मुखर तौर पर वेस्ट के खिलाफ रहा है। उदाहरण के तौर पर रूस, चीन, जैसे देश। भारत ने अपने आप को ग्लोबल साउथ के अग्रणी देश के रूप में स्थापित किया है। हाल ही में हुए G7 समिट को बीच में छोड़कर ट्रम्प अमेरिका वापस आ गये और कहा कि इजराइल और ईरान के बीच हो रहे युद्ध में वो मध्यस्थस्ता करने जा रहे हैं। लेकिन चिचा से यहाँ भी फिर कुछ हुआ नहीं। ब्रिक्स में सम्मिलित देश ग्लोबल साउथ का एक सबसे बेहतर example हैं।

सबसे बड़ा सवाल ये है कि संसद सत्र से पहले ही ऐसा क्यूँ?

क्योंकि डीप स्टेट नहीं चाहता है कि भारत में एक स्टेबल सरकार रहे । पिछले 11 साल से वो स्टेबल सरकार है।

और भारत के विरोधी दलों के नेता के हाथ में हर बार कोई न कोई झुनझुना थमा कर रेजीम चेंज की संभावना टटोलना डीप स्टेट का उद्देश्य है। संसद सत्र से पहले राहुल गाँधी किसी न किसी विदेशी दौरे पर चले जाते हैं। वहां जाकर भद पिटवाते हैं। देश के बारे में गलत बातें बताते हैं।

और फिर कहते हैं कि भारत को इन सब तथाकथीत बुराइयों से बचाना हो तो हमें सत्ता में आने के लिए विदेशी शक्तियां मदद करें।  यूरोप में जाकर इसी राहुल गाँधी ने भारत का प्रधान मंत्री के लिए फॉरेन तंत्र की मदद मांगी। 

और उसके बाद देश में वापस आकर राहुल गाँधी वेस्टर्न नैरेटिव को हवा देने लगते हैं। वो फिर हिंडेनबर्ग का मामला हो या फिर राफेल का मामला। इस बार तो असम में आम जनता को भड़काते हुए राहुल गाँधी ने कह दिया कि यहाँ के गरीब मजदुर और किसान सीएम हिमांता विश्वशर्मा को जेल भेजेंगे। 

तो लगभग ऐसा खेल है।

कांग्रेस ने कहा है कि आगामी मानसून सेशन में विपक्ष पीएम से उन जेट विमानों का हिसाब मांगने वाला है जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कथित रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे। मतलब साफ़ है , मानसून सत्र से ठीक पहले भारत के नेता विपक्ष के हाथ में चीचा डोनाल्ड ट्रम्प ने मध्यस्थता का झुनझुना थमा दिया है।

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