आज से कुछ साल पहले तक हम ड्रोन और काउंटर ड्रोन वारफेयर की बात सुनते थे तो लगता था कि कुछ फ्यूचर की बात हो रही है, लेकिन पहले अज़रबैजान और आर्मेनिया और फिर यूक्रेन रूस संघर्ष ने ये दिखा दिया कि ड्रोन भविष्य नहीं बल्कि आज की लड़ाई का हिस्सा हैं। और भारतीय सेना भी इस लड़ाई के लिए ख़ुद को ढाल रही है।
Drone strikes are the future. Azerbaijan has released this video of its drones designating and pounding Armenian positions. Carnage. pic.twitter.com/AikegjFVvU
— Aviator Anil Chopra (@Chopsyturvey) October 24, 2020
हमारी सेना की ड्रोन वारफेयर कैपिबिलिटीज़ का ऐसा ही नजारा हाल ही में कोलकाता में हुई रिपब्लिक डे परेड में दिखा है। यहाँ सेना ने अपनी अशनि प्लाटून और उसके भी नए स्वरूप पंचनाग को डिस्प्ले किया है, जिसको रेज ही ड्रोन और काउंटर ड्रोन वारफेयर के लिए किया गया है। पहले जानिए कि आख़िर अशनि प्लाटून क्या हैं?
भारतीय सेना की 385 इन्फेंट्री यानी पैदल सोल्जर्स वाली यूनिट्स में अशनि यूनिट बनाई गई है। हर यूनिट को 10 ड्रोन दिए गए है। इनमें से 4 ड्रोन जहाँ सर्विलांस के लिए होंगे तो वहीं 6 ड्रोन्स दुश्मन पर अटैक के लिए होंगे। ये ड्रोन कामिकाजे पैटर्न के हैं। इसका मतलब है कि ये ख़ुद जाकर टारगेट पर टकराते हैं।
ये अशनि प्लाटून आर्मी के मॉडर्नाइजेशन का हिस्सा हैं। और इसी का और एडवांस वर्जन है पंचनाग जो कोलकाता में दिखा है। पंचनाग प्लाटूंस में ड्रोन के साथ ही एंटी ड्रोन सिस्टम्स यानी ख़ुद को दुश्मन के ड्रोन्स से बचाने वाले वेपन्स भी मौजूद हैं। यही नहीं बल्कि पंचनाग में मशीन गंस, एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल्स और आर्माडो तथा शर्प UTV हाई मोबिलिटी विहकल्स भी हैं।

कोलकाता में आयोजित रिपब्लिक डे परेड के दृश्य, फोटो आभार – थर्ड पर्सन
ये हाई मोबिल्टी व्हीकल्स इंडेजिनस हैं और पंचनाग यूनिट्स जिस इलाके से चाहें उस इलाके से ड्रोन अटैक्स इनके सहारे कर सकती हैं। यहाँ तक कि चाहे पानी-दलदल या बाढ़ वाला इलाक़ क्यों ना हो शर्प व्हीकल्स वहाँ भी पहुँच कर हमला कर सकते हैं। अब आर्मी इन कैपिबिल्टीज का इस्तेमाल आगे के युद्धों में करने के लिए तैयार है।
इस बदलाव ने ये भी दिखाया है कि हमारी सेनाएँ जहाँ एक ओर परंपरा को लेकर एकदम अनुशासित हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ वो समय के अनुसार ख़ुद को युद्धों के लिए ढाल भी सकती हैं।




