कथित इस्लामिक स्कॉलर जाकिर नाइक को तो आप लोग जानते ही होंगे? वही जाकिर नाइक, जो डार्विन की थ्योरी को भी चैलेंज करता है और कहता है कि म्यूजिक सुनना शैतान का काम है। यहाँ तक कि टॉम एंड जेरी देखना भी हराम हो सकता है अगर उसमें म्यूजिक बज रहा हो! हिंदुओं के लिए उसकी नफरत ही उसका ‘बाजार’ है और बेतुकी बयानबाजी उसकी USP। हर दूसरे फिदायीन आतंकी का वो रोल मॉडल होता है… और अब देखिए, उसकी नफरती विरासत को आगे बढ़ाने वाले नए चेहरे भी सामने आ रहे हैं, जो सीधे तौर पर हिंदुओं को टारगेट कर रहे हैं। ऐसा ही एक नाम सामने आया है मुहम्मद ज़मरी विनोथ कलिमुट्ठु। इस ‘मिक्स वेज’ शख्सियत ने पीएम मोदी की मलेशिया रैली को अपनी गंदी मार्केटिंग का हथियार बनाया हुआ है।
मोदी का मलेशिया दौरा और जाकिर नाइक का साया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह दो दिन के दौरे पर मलेशिया रवाना हुए हैं। यह दौरा मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम के न्योते पर हो रहा है। करीब 8 साल बाद मोदी मलेशिया की धरती पर कदम रख रहे हैं। आज वो वहां भारतीय प्रवासियों और बिजनेस लीडर्स से बात करेंगे, लेकिन इस पूरी यात्रा के बैकग्राउंड में एक बड़ा मुद्दा है और वो है भगोड़ा इस्लामिक स्कॉलर जाकिर नाइक। भारत 10 साल से मलेशिया में छिपे इस जिहाद के सौदागर पर चर्चा करने वाला है।
लेकिन इस कूटनीतिक हलचल के बीच, जाकिर नाइक का एक ‘छोटा रिचार्ज’ मोहम्मद ज़मरी विनोथ बिल से बाहर निकल आया है। हिंदू मंदिरों को अवैध और हराम बताने वाले इस जमरी ने ऐलान किया है कि वो हिंदू मंदिरों के खिलाफ रैली निकालेगा। और टाइमिंग देखिए… ये रैली 8 फरवरी, 2026 को ठीक उसी वक्त प्लान है जब पीएम मोदी वहां मौजूद होंगे। जमीर का मकसद साफ है, अटेंशन पाना और विवाद पैदा करना।
कौन है ये ज़मरी विनोथ?
अब सवाल ये कि आखिर ये ज़मरी विनोथ है कौन? और ये चाहता क्या है? इसे आप “मलेशिया-बॉर्न इंडिपेंडेंट प्रीचर” कह सकते हैं, जो है तो भारतीय मूल का (तमिल हिंदू विरासत वाला), लेकिन बाद में इस्लाम में कन्वर्ट हो गया। ये इसके नाम में छिपी हुई गंगा-जमुनी-जॉर्डन तहज़ीब से भी आप अंदाजा लगा ही सकते हैं.. गंगा जमुना तो बताने की जरूरत नहीं है मगर जॉर्डन नदी में ईसा मसीह को बपतिस्मा दिया गया था।
अब ये ज़मरी ‘नया मुल्ला प्याज ज्यादा खाता है’ वाली कहावत को सच कर रहा है। यह जाकिर नाइक का कट्टर चेला है और हिंदू कम्युनिटी पर नफरती बयानों से ही इसने अपनी दुकान सजाई है।
ज़मरी विनोथ पर हिंदुओं के अपमान के अनगिनत आरोप हैं।
- साल 2019: ज़मरी विनोथ ने हिंदू धर्म और उसकी प्रथाओं का अपमान किया, मलेशिया की पुलिस ने इसे तब घसीटकर गिरफ्तार किया था। इसके बाद
- साल 2025 (थाईपुसम): हिंदुओं के पवित्र त्योहार थाईपुसम के दौरान, अगर आपको थाईपुसम त्योहार के बारे में मालूम नहीं है तो बताता हूँ, तमिल हिंदुओं द्वारा भगवान शिव और पार्वती के पुत्र भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित एक पवित्र त्योहार है।इसी त्योहार जो लेकर ज़मरी ने फेसबुक पर लिखा कि कावड़ी उठाने वाले “नशे में या जिन्न के प्रभाव में पागल” होते हैं। “वेल-वेल” के जाप का मजाक उड़ाया। इस पर 900 के करीब पुलिस रिपोर्ट्स दर्ज हुईं, लेकिन इस जिहादी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। इतना ही नहीं….
- दलितों को गाली देना और उन्हें अपमानित करना भी इसका काम है.. इसी ‘कन्वर्ट’ ज़मरी विनोथ ने पेनांग में हिंदुओं और मंदिर समर्थकों को “परया” (Pariah) कहा। यह तमिलनाडु की एक जाति के लिए इस्तेमाल होने वाला अपमानजनक स्लर है।
- ज़मरी का कोट सुनिए: “ये अवैध मंदिर गैंग तो ‘परया’ से भी ज्यादा नीच हैं, क्योंकि इन्हें सब कुछ फ्री चाहिए।”
सोचिए, जो इंसान खुद उसी मूल का हो, वो अपनी जड़ों को नीचा दिखाने के लिए किस हद तक गिर सकता है!
“कुइल हराम” कैंपेन और मोदी के दौरे में अड़चन
साल 2025 से ये जिहादी “कुइल हराम” (Illegal Temple) नाम का कैंपेन चला रहा है। फरवरी 2026 में इसकी नफरत चरम पर है। तमाम सरकारी चेतावनियों के बावजूद, इसने कहा है कि वो 141 NGOs के साथ कुआलालंपुर के ‘सोगो’ (Sogo) के सामने प्रदर्शन करेगा। ये हिंदू मंदिरों को सरकारी जमीन पर “अवैध कब्जा” साबित करने पर तुला है।
मगर मलेशिया की सरकार और पुलिस इस बार सख्त है। खुद प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि “अगर कोई कानून हाथ में ले, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर बाहर फेंको” उन्होंने साफ कर दिया कि कोई भी सड़क पर जज या पुलिस बनने की कोशिश न करे। कुआलालंपुर पुलिस ने सुरक्षा कारणों से इस रैली की परमिशन कैंसिल कर दी है, लेकिन ये ‘छोटा नाइक’ अभी भी अपनी जिद पर अड़ा है।
ये ‘अनलिमिटेड सप्लाई’ कहाँ से आती है?
सवाल ये है कि जाकिर नाइक के ये छोटे-बड़े वर्जन बाजार में आते कहाँ से हैं? इन्हें प्लांट कौन करता है? अभी कुछ दिन पहले मुफ्ती शमाइल नदवी नाम का एक नया चेहरा लॉन्च किया गया। जावेद अख्तर के साथ डिबेट कराई गई और रातों-रात उसकी इंस्टाग्राम फॉलोइंग 2 लाख से 10 लाख पार करा दी गई। विचार उसके भी वही हैं जिसमें ‘शरिया संविधान से ऊपर रखा जाता है’।
जिहादी सोच तैयार करने की इस ‘अनलिमिटेड सप्लाई’ का रहस्य क्या है, ये तो वक्त बताएगा। लेकिन फिलहाल, भारत और दुनिया की नजर प्रधानमंत्री मोदी के दौरे में अड़चन डाल रहे इस ज़मरी विनोथ नाम की ‘मिक्स वेज’ पर टिकी है। देखते हैं, कानून का डंडा इस पर कब चलता है. क्या आपको लगता है कि मलेशिया सरकार को जाकिर नाइक के साथ-साथ इस ज़मरी विनोथ जैसे चेले को भी भारत को सौंप देना चाहिए?



