यूरोपियन यूनियन की प्रमुख उर्सुला वॉन डर लेयन भारत में है। वो यहाँ भारत और EU के बीच FTA यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल करने आई है। इसे उन्होंने स्विट्ज़रलैंड में मदर ऑफ़ ऑल डील्स बताया है। ये भारत और EU के बीच ऐतिहासिक समझौता होगा।
लेकिन सवाल है कि आख़िर इस डील से हमारा फ़ायदा क्या है? इसके लिए सबसे पहले समझिए कि आख़िर एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होता क्या है? FTA बेसिकली ऐसा मैकेनिज्म है, जहाँ दो या उससे ज्यादा देश व्यापार करना आसान करते हैं। एक दूसरे के सामान पर लगने वाला टैरिफ यानी इंपोर्ट ड्यूटी हटाते हैं और काग़ज़ी प्रक्रिया भी सरल करते हैं।
तो अगर भारत और EU ये समझौता करते हैं, तो दोनों अपने-अपने टैरिफ एक दूसरे के सामान पर से हटाएँगे। पहले समझते हैं कि भारत को क्या फ़ायदा होगा। भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में EU को लगभग 75 बिलियन डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया।
लेकिन EU में जाने वाले ऐसे भारतीय सामान जो लेबर इंटेंसिव यानी ज्यादा रोजगार देने वाले हैं, उन पर अभी लगभग 12% का टैरिफ लगता है। इसमें कपड़े, चप्पल जूते और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे प्रोडक्ट आते हैं। लेकिन इसी सामान को बेचने के लिए बांग्लादेश को लगभग नहीं के बराबर टैरिफ देना पड़ता है, ऐसे में हमारा समान महंगा हो जाता है।
बांग्लादेश यूरोपियन यूनियन की GSP स्कीम का फ़ायदा उठाता है जहाँ EU विकासशील देशों के सामान पर कम टैरिफ लगाता है। इसी तरह वियतनाम ने भी पहले ही EU से FTA किया हुआ है, इसलिए उसे भी बढ़त मिलती है। लेकिन उम्मीद है कि समझौता हो जाने से लगभग 90% भारतीय सामान पर टैरिफ लगभग 0% हो जाएगा।
इससे हमारा व्यापार बढ़ेगा और भारतीय व्यापारी ज़्यादा मुनाफ़ा कमा सकेंगे। इसके अलावा इस डील में भारत भी EU से आने वाले सामान पर से टैरिफ हटाएगा। भारत अभी EU से भारी मशीनरी, एडवांस तकनीक वाली मशीनरी, कैमिकल , इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन पार्ट्स आदि लेता है।
ये सामान ज्यादातर भारत में उत्पादन के लिए उपयोग होता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट कहती है कि EU से भारत में आने वाले समान पर एवरेज 9% की ड्यूटी लगती है। अगर भारत ये हटाएगा तो यहाँ इन मशीनों एस उत्पादन करने वालों को भी फ़ायदा होगा, जो वापस इकॉनमी को मजबूत करेगा।
वही यूरोपियन यूनियन को इसी के साथ भारत जैसी बड़ी मार्केट मिलेगी, जहाँ लगभग 140 करोड़ लोग हैं। ऐसे में ये मदर ऑफ़ ऑल डील्स एक विन विन सिचुएशन क्रिएट करेगी।





