अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प भारत से खिसियाए हैं, वो हम पर टैरिफ पर टैरिफ ठोंकते जा रहे हैं। साफ़ सीधे तौर पर वजह रूसी कच्चे तेल की ख़रीददारी और ट्रम्प को ऑपरेशन सिंदूर के सीजफायर का क्रेडिट ना देना बताई जाती है।
लेकिन एक और रिपोर्ट ने दूसरी तरफ़ इशारा किया है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट ने बताया है कि भारत ने अमेरिका के ट्रेजरी नोट्स यानी एक तरह के बांड्स में अपना इन्वेस्टमेंट पिछले एक साल में कम कर दिया है।
इसकी बजाय अब RBI सोना ख़रीदने पर फ़ोकस कर रही है। इससे पहले कि ये बहुत काम्प्लेक्स हो जाए, मैं आपको चीजें समझाता हूँ। आम तौर पर हर देश और भारत भी अपना एक विदेशी मुद्रा भंडार बनाता है।
और इस विदेशी मुद्रा भंडरा यानी फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में डॉलर, यूरो, पाउंड जैसी विदेशी करेंसी, सोना और अमेरिका जैसे देशों के जारी किए गए बांड्स या ट्रेजरी बिल्स-नोट्स होते हैं।
बहुत आसान भाषा में समझिए तो ये ट्रेजरी नोट्स कुछ कुछ FD की तरह होते हैं। यानी आप इन्हें ख़रीदते हैं और जब ये मैच्योर होते हैं तो आपको ब्याज भी मिलता है।
Since ये डिमांड में रहते हैं तो इनकी दुनिया भर में ट्रेडिंग भी होती है। इन ट्रेजरी बिल्स या नोट्स को देकर डॉलर मिल जाते हैं, इसलिए RBI इन्हें अपने विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा बनाती है।
तो कहानी ये है कि भारत अक्टूबर 2024 में ट्रम्प के आने से पहले 240 बिलियन डॉलर यानी लगभग 22 लाख करोड़ रुपए के ट्रेजरी नोट्स होल्ड करता था। अक्टूबर 2025 में ये घट कर हो 190 बिलियन डॉलर यानी 18 लाख करोड़ रुपए से भी कम। और इस बीच ऑपरेशन सिंदूर, अमेरिका के टैरिफ और ट्रम्प के जिमनास्टिक्स, सब कुछ हो गया। अच्छा आप सोच रहे होंगे कि ये इन्वेस्टमेंट घटने से अमेरिका को क्या फ़र्क़?
RBI has cut US Treasury holdings to ~$190bn, down ~$51bn YoY, while boosting gold reserves to 880 tonnes. Gold now makes up 13.6% of FX reserves, up from 9.3%, even as India’s overall forex stock stays steady near $685bn. China, Brazil, Hong Kong Saudi Arabia are the others. pic.twitter.com/14vxBVnLVG
— Lakshmisha K S (@lakshmishaks) January 10, 2026
दरअसल, हम जब ये इन्वेस्टमेंट करते हैं तो अमेरिका को तो सिर्फ़ एक काग़ज़ या कहें तो गारंटी देनी पड़ती है लेकिन हमारा मोटा पैसा उनके पास जाता है जो उनकी सरकार चलाने के काम आता है।
तो जिसके घर से आप अपना पैसा निकाल लोगे वो तो गुस्सा होगा ही। और इससे डॉलर की हेजेमनी को भी चैलेंज मिलता है। अच्छा इस बीच rbi ने ये पैसा लगाया कहाँ है?
ये पैसा RBI ने लगाया है सोने में, क्योंकि सोना है सदा के लिए। RBI के पास जहाँ अक्टूबर 2024 में 866 टन सोना हुआ करता था, ये अक्टूबर 2025 में बढ़ कर 880 टन हो गया।
यानी इस बीच 14 टन सोना बढ़ा, इसका मतलब समझते हैं 14000 किलो सोना। और ये सोना हमारे पास रखा है। वैसे जिस टाइम भारत ने ट्रेजरी नोट्स की होल्डिंग घटाई इसी दौरान चीन और ब्राजील ने भी ऐसे ही कदम उठाए।
तो इसका सीधा मतलब है कि अंकल सैम को brics कंट्रीज से चैलेंज मिल रहा है और वो इस चक्कर में कहीं टैरिफ लगाते हैं तो कहीं उल्टे सीधे बयान देते हैं।



