मॉब लिंचिंग… मुस्लिमों पर अत्याचार, मजहब के आधार पर हत्या, ये वो शब्द हैं जो लिबरल और इस्लामी इंटेलेक्चुअल्स दिन में कम से कम तैंतीस बार दोहराया करते हैं। लेकिन आज एक ऐसे पत्रकार की जयंती है जो मॉब लिंचिंग का तब शिकार हुआ, जब ये शब्द गढ़ा तक नहीं गया था।
उसे उन जिहादियों ने मार दिया, जिनकी मदद को वह आतुर था। आज जयंती है गणेश शंकर विद्यार्थी की। गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 26 अक्टूबर 1890 को प्रयागराज और तब के इलाहाबाद में हुआ था।
आज पत्रकारिता के करिकुलम का अभिन्न हिस्सा गणेश शंकर विद्यार्थी वो शख्स थे जिन्होंने अंग्रेजी राज में ‘प्रताप’ नाम का अखबार निकाला। भगत सिंह के इस दोस्त ने मिल वर्कर्स से लेकर रायबरेली के किसानों तक का दर्द उठाया, जेल गए!
लेकिन इस क्रांतिकारी पत्रकार का अंत बेहद दुखदायी हुआ। तबरेज और अखलाक पर रोने वाले लिबरलों को यह कहानी सुननी चाहिए। 1931 में जब 23 मार्च को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फाँसी दी गई तो पूरे देश में उबाल आ गया।
तमाम क्रांतिकारियों ने देश में हड़ताल, और बंद का आयोजन किया। कानपुर में भी बंद बुलाया गया। कुछ मुस्लिम दुकानदारों ने इस बंद को नहीं माना।
दुकानें बंद ना करने के बाद हिंसा भड़की और भीड़ लोगों को मारने लगी। विद्यार्थी ने इस दौरान दंगों में फंसे लोगों की सहायता करने का निर्णय लिया। उन्होंने इस दौरान तमाम हिन्दू-मुस्लिमों को दंगे से बचाया।
बताते हैं कि 25 मार्च के दिन वह कानपुर के चौबेगोला इलाके में दंगे को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे। युग पुरुष गणेश शंकर विद्यार्थी किताब में दिए घटना के विवरण के अनुसार, चौबेगोला में नई सड़क इलाके में 4-5 मुस्लिमों का एक समूह आया और गणेश शंकर विद्यार्थी की तरफ चिल्लाते हुए मारने के लिए बढ़ा।
इस समूह ने गणेश शंकर विद्यार्थी को खंजर घोंपा और लाठियों से उन पर वार किया। उन पर एक कुल्हाड़ी से भी वार किया गया।
एक और किताब ‘भारत के निर्माता: गणेश शंकर विद्यार्थी’ में लिखा गया है कि पहले कुछ मुस्लिमों ने उनसे हाथ मिलाया और उनकी तारीफ की।
उनसे एक भाषण देने की अपील की गई। उन्हें एक जगह पर ले जाकर छोड़ दिया गया। इसके बाद उन पर हमला हुआ। गणेश शंकर विद्यार्थी ने इस हमले पर अपने आप को आगे कर दिया। नृशंस तरीके से उनकी हत्या हुई। गणेश शंकर विद्यार्थी की लाश दो दिन बाद एक बोरे में मिली।
और इस तरह इस्लामी कट्टरपंथियों ने भारतीय पत्रकारिता के प्रतिमान विद्यार्थी को मौत के घाट उतार दिया।



