कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार जुलाई 2025 के मानसून सत्र में एक नया और विवादास्पद कानून पेश करने जा रही है, ‘रोहित वेमुला विधेयक 2025’। इस बिल के पीछे कांग्रेस पार्टी की रणनीति साफ दिखाई देती है: मुस्लिमों और अब SC, ST, OBC को साधकर वोट बैंक को मजबूत करना। बताया जा रहा है कि ये विधेयक राहुल गांधी के सीधे निर्देश पर लाया जा रहा है।
इस विधेयक का उद्देश्य कथित रूप से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न को रोकना है। लेकिन असल में ये बिल सामान्य वर्ग के छात्रों को सीधे निशाने पर ले आता है। इसके तहत किसी भी SC, ST, OBC या अल्पसंख्यक छात्र की शिकायत पर बिना ठोस सबूत के भी गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज किया जा सकता है। दोषी पाए जाने पर आरोपी को कम से कम 1 लाख का मुआवज़ा और 1 साल की जेल, और दूसरी बार अपराध में 3 साल की जेल + ₹1 लाख पेनल्टी देनी होगी।
यही नहीं, अगर किसी संस्थान ने भी इसका उल्लंघन किया तो सरकारी फंडिंग बंद कर दी जाएगी। यानी छात्रों के बीच अब सिर्फ ‘समानता’ नहीं, कानूनी असमानता स्थापित होने जा रही है।
लेकिन सवाल ये है कि रोहित वेमुला कौन था?
17 जनवरी 2016, हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्कॉलर रोहित वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी। मीडिया और वामपंथी संगठनों ने इसे जातीय भेदभाव से जुड़ा मुद्दा बना दिया।
लेकिन सच यह है कि रोहित दलित था ही नहीं। आंध्र प्रदेश सरकार ने 2017 में रोहित का SC सर्टिफिकेट रद्द कर दिया और साफ कहा कि वह ओबीसी समुदाय (वेद्देरा जाति) से था। विश्वविद्यालय रिकॉर्ड्स में भी रोहित का OBC सर्टिफिकेट दर्ज था।
तेलंगाना सरकार ने मई 2024 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी, जिसमें कहा गया कि रोहित ने जाति की सच्चाई उजागर होने के डर से आत्महत्या की, और किसी भी व्यक्ति या संस्थान की इसमें कोई भूमिका नहीं थी।
यह भी सामने आया कि रोहित ने दलित होने की फर्जी पहचान बनाई ताकि अंबेडकर छात्र संगठन में अपनी जगह बना सके। रोहित केपिता ने तो यहां तक कहा कि वामपंथी संगठनों ने रोहित की मौत का इस्तेमाल मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए किया।
कांग्रेस की मंशा क्या है?
राहुल गांधी ने खुद 16 अप्रैल 2025 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ये विधेयक लाने की मांग की। कांग्रेस को पता है कि कर्नाटक में मुस्लिम जनसंख्या 18.08% है, जो OBC में सबसे बड़ा समूह है। इसीलिए कांग्रेस इस कानून के जरिए मुस्लिम और OBC वोटरों को साधने की रणनीति पर चल रही है।
रोहित वेमुला के नाम पर कांग्रेस एक फर्जी जातिगत नैरेटिव को ज़िंदा रखना चाहती है। नतीजा ये होगा कि विश्वविद्यालयों में सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ झूठे केस कराना आसान हो जाएगा। छात्र-छात्राओं के बीच विश्वास की जगह डर, और एकता की जगह वैमनस्य बढ़ेगा।
यह विधेयक न सिर्फ फेक सोशल जस्टिस का प्रतीक है, बल्कि यह बताता है कि कांग्रेस अब जातीय उकसावे को संस्थागत रूप दे रही है। जिस छात्र की जाति को लेकर पूरे देश को गुमराह किया गया, उसी के नाम पर अब एक ऐसा कानून बनाया जा रहा है जो सिर्फ समाज में दरार पैदा करेगा, समाधान नहीं। यही कांग्रेस का नया खेल भी है, यानी ‘फर्जी जाति + फर्जी जस्टिस और वोट बैंक पक्का।




