KGMU लव जिहाद केस: प्रतिबंधित PFI और भगौड़े ज़ाकिर नाइक के विचारधारा से जुड़े बड़े खुलासे, मेडिकल यूनिवर्सिटी में क्या चल रहा है?

Summary
KGMU लखनऊ में लव जिहाद, धर्मांतरण और जाकिर नाइक प्रभाव के गंभीर आरोप। डॉक्टर भूपेंद्र सिंह ने मेडिकल सिस्टम में फैले कट्टर नेटवर्क का खुलासा किया।

इस बात के काफ़ी ज्यादा चांस हैं कि आप ये वीडियो उत्तर भारत के किसी कोने से देख रहे हों। इस बात के भी काफ़ी चांस हैं कि आप उत्तर प्रदेश से ये वीडियो देख रहे हो। और अगर आप उत्तर प्रदेश में भी उसकी राजधानी लखनऊ या आसपास के किसी जिले से हैं तो “मेडिकल कॉलेज” शब्द का मतलब आपके लिए क्या होता है, आप जानते होंगे? 

मैं बताता हूँ, उत्तर प्रदेश के कम से कम 30 जिलों में इस शब्द का मतलब कोई भी मेडिकल कॉलेज नहीं होता बल्कि होता है KGMU यानी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी। 

बीते लगभग 15 दिनों से ये इंस्टिट्यूट किसी और चीज के लिए भी जाना जा रहा है। हजारों लाखों डॉक्टरों की खेप तैयार करने वाला ये मेडिकल इंस्टिट्यूट आज लव जिहाद, इस्लामीकरण, मौलानाओं  की कॉन्फ़्रेंस और इस बात के लिए विख्यात… या मैं कहूँ कि कुख्यात हो रहा है कि यहाँ मुसलमान डॉक्टर और कर्मचारी हिंदू महिलाओं को फँसाने के गैंग चलते थे, इतना ही नहीं बल्कि आतंकी तैयार करने वाले मौलाना जाकिर नाइक के प्रभाव का धुआँ भी इस सुलगती आग से निकल रहा है। 

अब तक आपको अंदाजा लग गया होगा कि मैं KGMU से हाल ही में सामने आए लव जिहाद केस की बात कर रही हूँ। आपको शायद अब तक ये पता चल गया हो कि रमीजुद्दीन नाम के एक डॉक्टर ने कैसे हिंदू लड़की को फँसाया, लव जिहाद के ज़रिए उत्पीड़न किया, यौन शोषण किया और इन सब में उसका अब्बा और उसकी अम्मी समेत सारे लोग शामिल रहे। 

लेकिन मैं आपके सामने ब्रेकिंग न्यूज की शकल में चलने वाली वो खबरें नहीं बताने वाला हूँ कि लव जिहाद करने वाला आरोपित रमीजुद्दीन गिरफ्तार हो गया है या वो कहाँ से पकड़ा गया है। मैं आपको कुछ ऐसी डिटेल्स बताऊँगी जो आपको शायद बहुत परेशान करने वाली हैं। 

KGMU में इस्लामी कट्टरपंथ कहाँ तक अपने पैर फैला चुका है, इसका एक्सटेंट जानने के लिए ऑपइंडिया ने यहाँ कई साल प्रैक्टिस कर चुके डॉक्टर भूपेंद्र सिंह से सच्चाई जानी है और उन्होंने जो बताया है, वो सुन कर आपके भी कान खड़े हो जाएँगे। 

डॉक्टर भूपेंद्र का कहना है कि आज से लगभग 20 साल पहले ही इस KGMU में जाकिर नाइक सिंड्रोम की एंट्री हो गई थी। मुस्लिम MBBS स्टूडेंट्स उसके संपर्क में आ चुके थे। और आपको तो पता होगा कि कट्टरपंथ बता के नहीं आता बल्कि इसके signs आपको चारों तरफ़ दिखते हैं। 

डॉक्टर भूपेंद्र बताते हैं कि 2004 के बाद धीमे-धीमे KGMU में हिजाब की एंट्री हो गई, उसका सामान्यीकरण किया जाने लगा। जहाँ लड़कियां हिजाब-बुर्के पर शिफ्ट हुई थीं तो मर्द भी दीन के पक्के होने लगे। दाढ़ी रखने लगे जो धीमे-धीमे बढ़ने लगी। 

वैसे आपको याद रखना चाहिए कि जाकिर नाइक जैसों के टारगेट पर भी कोई ऐसे लोग नहीं थे जो अनपढ़ या गरीब हों, ख़ुद नाइक भी कोट पैंट वाला मौलाना रहा है। उसका फ़ोकस ही पढ़े-लिखे मुसलमानों को और कट्टर बना देना है और हिंदुओं में पढ़े  लिखे वर्गों को इस्लाम में  खींचना है।

अगर आपको उदाहरण की जरूरत पड़ रही है तो याद दिला दूँ कि 2007 में ग्लासगो में हमला करने वाला कफ़ील अहमद M phil कर चुका था। लेकिन तब भी उसने आतंक की ही राह चुनी क्योंकि जाकिर  नाइक के जैसों ने उसे समझाया कि ये करना ठीक है। 

और ज्यादा पीछे क्यों जाना दिल्ली में धमाका करके फटने वाला उमर भी तो डॉक्टर ही था। उसके साथ हेल्प करने वाले भी डॉक्टर थे। और ये कोई घर से आतंकी बनके नहीं निकले थे बल्कि किसी अस्पताल में काम करते ही हुए आतंकी बने थे। तो KGMU के लोगों पर जाकिर नाइक  कैसा असर करता होगा ये आप अंदाजा लगा सकते हैं। वैसे KGMU की ये कहानी यहीं नहीं रुकती। 

डॉक्टर भूपेंद्र कहते हैं कि इन कट्टरपंथियों को बसपा और समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान और बल मिला। और 2011-12  के आसपास तो आगरा में मेडिकल कॉलेज में इस्लामिक मेडिकोज मीट तक की बात सामने आई। डॉक्टर भूपेंद्र के अनुसार इसी टाइम मुस्लिम mbbs स्टूडेंट्स और डॉक्टर्स से हिंदू स्टूडेंट्स के निकाह भी ज्यादा बढ़े। इसी टाइम पर नॉर्मलाइज हुआ मौलानाओं का आना जाना। आपको एक तस्वीर दिख रही है, ये फोटो KGMU से ही बताई गईं हैं।

अगर मैं ये specify ना करूँ तो शायद आपको लगे कि मैं किसी इस्लामी मरकज़ की तस्वीर आपको दिखा रही हूँ। डॉक्टर भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि KGMU में धर्मांतरण और लव जिहाद का पूरा पैटर्न है। ये पैटर्न क्या है, आपको समझाती हूँ। 

डॉक्टर भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि कुछ मुस्लिम नर्सें योजनाबद्ध तरीके से हिंदू नर्सों और मुस्लिम स्टाफ के बीच दोस्ती करवाती हैं। धीरे-धीरे बात शारीरिक संबंधों तक पहुँचाई जाती है और फिर धर्म परिवर्तन की दिशा में दबाव बनाया जाता है। 

डॉक्टर भूपेंद्र का दावा तो यहाँ तक है कि KGMU के गाँधी वार्ड में नर्सिंग स्टाफ की एक महिला का धर्मांतरण कराकर निकाह कराया गया और एक अन्य मामले में धर्मांतरण हो चुका है और निकाह की तैयारी बताई जा रही है। 

यहाँ तक कि रेप का एक और मामला भी यहाँ से सामने आ चुका है। KGMU के एक इंटर्न डॉक्टर मोहम्मद आदिल पर नर्सिंग छात्रा से बलात्कार का आरोप लगा था। बताया जाता है कि इससे पहले उसके कई संबंध हिंदू लड़कियों के साथ थे। 

और जहाँ लव जिहाद हो, इस्लामी कट्टरपंथ हो, मौलानाओं की तक़रीरें हों वहाँ भला ज़मीन पर  कब्जा कैसे नहीं होगा। अप्रैल 2025 में KGMU में एक अवैध मजार को तोड़ने जब पुलिस और प्रशासन पहुँचे तो यहाँ पत्थरबाजी हो गई थी।

लेकिन किसी इंस्टिट्यूट में दीमक ऐसे ही नहीं लगता, बल्कि इसके लिए सिस्टम को कमजोर करना होता है। जाकिर नाइक की एंट्री हो या इस्लामी मौलानाओं की तस्वीरें, ये लोग तब तक एंट्री नहीं पा सकते जब तक इस संस्थान के कुछ लोगों को कट्टरपंथ के प्रति प्रेम ना उमड़े। 

और KGMU के इस समय क्या हाल हैं, आप रमीजुद्दीन के केस से समझ सकते हैं। क्योंकि KGMU में इंट्रोडक्शन का ये मामला सिर्फ छात्रों या जूनियर डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। आरोप है कि KGMU में नीचे से ऊपर तक यानी VC से लेकर प्रोफेसर स्तर तक इस कट्टर सोच की घुसपैठ हो गई है। 

डॉक्टर भूपेंद्र ने बताया कि जब डॉ. रमीज का मामला तब सामने आया तब पीड़िता के पि ता उसी दिन विभागाध्यक्ष सुरेश बाबू के पास पहुँचे जिस दिन उनकी बेटी ने आत्महत्या की कोशिश की थी लेकिन तब उनकी बात नहीं सुनी गई। 

आरोप है कि विभाग की दो कट्टर फैकल्टी डॉ. सुमायरा कयूम और डॉ. वाहिद अली ने फैकल्टी मीटिंग में विभागाध्यक्ष सुरेश बाबू पर दबाव बना दिया। ये भी आरोप है कि इसके बाद रेप पीड़िता को मानसिक तौर पर अस्थिर तक बताने की कोशिश की गई। 

सूत्र तो ये तक कहते हैं कि कॉलेज के जूनियर डॉक्टर्स से ये लिखने का दबाव डाला गया कि हिंदू पीड़िता का चाल चलन ठीक नहीं है। 

मामले में कार्रवाई भी तब चालू हुई जब हिंदू संगठनों ने दबाव बनाया। हिंदू पीड़िता की सुनवाई क्यों नहीं हुई और KGMU पर इस्लामी करण को बढ़ावा देने के आरोप क्यों लग रहे हैं , उसके कई कारण हैं। 

आरोप यहाँ तक हैं कि यूनिवर्सिटी के VC ऑफिस में कट्टर लोग बैठे हैं जो कार्रवाई को प्रभावित कर रहे हैं और रमीज जैसे लोगों को संरक्षण दिला रहे हैं। 

और इसका एक सिरा समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार से भी जाकर जुड़ता है। डॉक्टर भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तब KGMU में बड़े स्तर पर मुस्लिम फैकल्टी भरी गई थी। 

बीजेपी के प्रवक्ता और वकील प्रशांत उमराव ने भी KGMU के VC ऑफिस के मुस्लिम समर्थक होने का दावा किया है। प्रशांत का ट्वीट आप स्क्रीन पर देखते हैं। 

और आरोप तो यहाँ तक कि संस्थान के मुस्लिम डॉक्टरों के हर कुकृत्य पर पर्दा डाला जा रहा है। क्यों हड़ताल की धमकी दी जा रही है। 

और अगर kgmu का प्रशासन कॉम्प्लेसेंट नहीं है या फिर उसके सिस्टम में बैठे कुछ लोग यह घटना होने कैसे देते रहे। कैसे कोई रमीजुद्दीन हिंदू लड़की को प्रताड़ित करता रहा। कैसे रमीज को नौकरी देने से पहले या बाद में उसका बैकग्राउंड चेक नहीं किया गया और अंत में जब शिकायत भी आई तो उसे दबाया क्यों गया?  

आख़िर KGMU की VC सोनिया नित्यानंद और बाक़ी लोग इस मामले में बैकफुट पर क्यों हैं, अगर आपके कॉलेज में सब कुछ ठीक है तो खुल के बोलिए।  वैसे रमीज भी कोई ऐसा आदमी नहीं है जो इनोसेंट हो, हिंदू बच्ची को शिकार करने वाले इस रमीज की कहानी भी काफ़ी प्रॉब्लमैटिक है। उसके बारे में भी डॉक्टर भूपेंद्र ने हमें कई सारी जानकारी दी।  

डॉक्टर बताते हैं कि इस कहानी की जड़ें पीलीभीत से शुरू होती हैं। रमीजुद्दीन और उसके अब्बा सलीमुद्दीन मूल रूप से पीलीभीत के रहने वाले थे। बाद में सलीमुद्दीन, खटीमा जाकर बस गया और उसने अपना सरनेम ‘मलिक’ रख लिया। वहाँ जाकर उसने एक होम्योपैथिक मेडिकल स्टोर खोला और इसके जरिए ही महिलाओं से नजदीकियाँ बढ़ानी शुरू कीं। 

कहते हैं कि सलीमुद्दीन ने 4 हिंदू महिलाओं से निकाह किया और उन्हें मुस्लिम बनने पर मजबूर किया। सूत्रों के मुताबिक, सलीमुद्दीन असल में पीलीभीत के एक काजी के संपर्क में था और देवबंद में आता-जाता रहा था। 

इसके बाद परिवार के भीतर मजबही कट्टरता बढ़ती चली गई और वही हिंदू घृणा उनके बेटे रमीजुद्दीन तक पहुँची। रमीजुद्दीन पढ़ाई में तेज था। उसका चयन 2012 में आगरा मेडिकल कॉलेज में हो गया। यहीं से कहानी एक नया मोड़ लेती है।

KGMU में डॉक्टर रहे भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि यह बात 2012 की है जब रमीज ने आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में MBBS में दाखिला लिया। इसी दौरान आगरा मेडिकल कॉलेज में ‘इस्लामिक मेडिकोज मीट’ नाम से बैठके होने लगीं और इन बैठकों में मौलाना और सीनियर छात्र जूनियर्स को यह सिखाने लगे कि हिंदू लड़कियों से कैसे नजदीकी बढ़ाई जाए। 

इस्लामिक मेडिकोज नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप भी था जिसमें ये कट्टरपंथी जुड़े हुए थे। डॉक्टर भूपेंद्र ने कहा, “उस कॉलेज में कई मुस्लिम डॉक्टरों ने हिंदू लड़कियों को प्रेम-जाल में फँसाया और बाद में उनका धर्म परिवर्तन कराया। रमीज के भी चार–पाँच करीबी मुस्लिम दोस्त थे, जो इसी सोच के साथ काम कर रहे थे। 

KGMU में उसका एक दोस्त पिछले एक साल  से इसी तरह की गतिविधियों में लगा हुआ है। और इसी सोच का परिणाम है कि रमीज आज जब गिरफ्तार हुआ है तो उसका नेक्सस मिल रहा है। उसके लिंक PFI तक से हैं, ये भी रिपोर्ट्स आई हैं। वैसे इस्लामीकरण की ये समस्या सिर्फ़ केजीएमयू या आगरा तक सीमित नहीं है। 

डॉक्टर भूपेंद्र सिंह का कहना है कि बस्ती और बुलंदशहर मेडिकल कॉलेज भी इसी समस्या से पीड़ित हैं, कहीं नमाज के लिए एक्स्ट्रा कमरे की माँग हो रही है तो कहीं HOD पर हदीस पढ़ाने के आरोप लग रहे हैं। 

कुल मिलाकर केजीएमयू से जो जिन्न लव जिहाद के मामले के रूप में बाहर निकला है, ये कोई स्टैंड अलोन केस नहीं है बल्कि ये वो वार्निंग है, जिससे हमें से समझ जाना चाहिए कि इस देश में हर शहर में एक अल फ़लाह मेडिकल कॉलेज पनप रहा है। 

हर शहर में कोई डॉक्टर उमर तैयार हो रहा है, उसको शह देने वाली डॉक्टर शाहीन तैयार हो रही है और फिर आतंक को सपोर्ट देने और आतंकियों को छोड़ने वाली लॉबी तो है ही मदद के लिए तैयार।

Editorial team:
Production team:

More videos with Harsh Vardhan as Anchor/Reporter