PM मोदी कमजोर प्रधानमंत्री हैं? राहुल गाँधी की लफ्फाजी का फैक्ट चेक

Summary
सवाल ये नहीं कि ट्रंप ने क्या कहा... सवाल ये है कि कांग्रेस किसके सुर में गा रही है? और राहुल गांधी... वो नेता हैं या रीट्वीट एक्सपर्ट? इस वीडियो में हम चर्चा करेंगे कि पीएम मोदी वास्तव में कितने कमजोर हैं?

“ट्रंप ने कहा – टैरिफ लगाओ,और राहुल बोले – चलो, मोदी को घेराओ!” व्हाइट हाउस से ट्रम्प ने ट्वीट उछाला, और यहाँ कांग्रेस ने लपक लिया। मसालेदार मूवी जैसे टाइटल के हैशटैग निकाले गए #ModiWeakPM #NarendraSarender

तो क्या राहुल गांधी अब ट्रंप की स्क्रिप्ट पढ़ते हैं? या फिर हर इंटरनेशनल इश्यू को “मोदी को गरियाओ” अभियान में बदलना उनका वर्कफ़्लो बन चुका है? ट्रम्प की ही तरह राहुल गाँधी भारत की इकोनॉमी को “डेड” कह रहे हैं, लेकिन IMF, World Bank, और G20 कह रहे –”India is the engine!” कांग्रेस के युवराज मोदी को “कमजोर” बता रहे हैं, पर ग्लोबल लीडर्स उसी पीएम मोदी के साथ खड़े होकर फोटो खिंचवा रहे हैं! तो सवाल ये नहीं कि ट्रंप ने क्या कहा… सवाल ये है कि कांग्रेस किसके सुर में गा रही है? और राहुल गांधी… वो नेता हैं या रीट्वीट एक्सपर्ट? इस वीडियो में हम चर्चा करेंगे कि पीएम मोदी वास्तव में कितने कमजोर हैं?

X पर काँग्रेस ने कुछ पोस्ट्स किए, जिनमें दावा किया गया कि पीएम मोदी कमजोर हैं क्योंकि वो ट्रंप की धमकियों के सामने चुप हैं। 

6 अगस्त 2025 को लिखा गया : “नरेंद्र मोदी कोई हौव्वा नहीं हैं, वो एक कमजोर प्रधानमंत्री हैं।” 

दूसरा ट्वीट था: “देश का अपमान हो रहा है- मोदी चुप हैं, ये एक कमजोर प्रधानमंत्री की निशानी है।” 

और तीसरा, “मोदी कमजोर प्रधानमंत्री हैं- कोई दम नहीं है।”

सभी तथ्यों को दरकिनार करते हुए काँग्रेस सिर्फ ट्वीट पर ट्वीट करती गई जैसी कोई T20 का मैच चल रहा हो….

कांग्रेस का कहना है कि आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, और ट्रंप की टैरिफ धमकियों जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार की चुप्पी – कमजोरी दिखाती है। राहुल गांधी ने कई बार कहा कि सरकार की नीतियों ने मध्यम वर्ग और गरीबों को नुकसान पहुंचाया। उनके कुछ समर्थकों ने डेटा भी शेयर किया, जैसे बेरोजगारी दर (CMIE के मुताबिक 2023 में 7-8% के आसपास) और GDP ग्रोथ में उतार-चढ़ाव (6-7% के बीच)। लेकिन क्या ये आंकड़े पूरी तस्वीर दिखाते हैं?

इसके उलट, PM मोदी का एक बयान है जो उनके आलोचकों के मुंह पर तमाचा मारता है: “अगर मुझे व्यक्तिगत क्षति होती है लेकिन देश के किसान और मछुवारों का फायदा होता है, तो मैं वो सहूंगा।” ये बयान दिखाता है कि वो व्यक्तिगत हमलों को नजरअंदाज कर देशहित को प्राथमिकता देते हैं। तो क्या ये कमजोरी है, या बलिदान की भावना? थोड़ा पीछे चलें तो कमजोर प्रधानमंत्री वाला बयान पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के लिए लालकृष्ण आडवाणी ने दिया था।

साल 2011 में लालकृष्ण आडवाणी ने मनमोहन सिंह के लिए कहा था कि अब तक जितने भी प्रधानमंत्री देखे हैं, मनमोहन सिंह उनमें सबसे कमजोर प्रधानमंत्री हैं। कांग्रेस को भले ही सुनने में बहुत बुरा लगा हो, लेकिन सच तो यही था। पीएम के तौर पर मनमोहन सिंह सिर्फ रीमोट कंट्रोल पीएम बनकर रह गए थे। अब उसी बयान को कॉपी पेस्ट करने वाली कांग्रेस पार्टी ने दुबारा तथ्य साइड में रख कर नैरेटिव चलाना शुरू किया है।

कांग्रेस कहती तो है कि मोदी कमजोर हैं.तो ये लाजमी हो जाता है कि जरा मोदी के फैसलों पर  और परफॉरमेंस पर नजर डालकर देखा जाए कि पीएम मोदी आखिर कितने कमजोर हैं।

चाय बेचते बेचते सत्ता के शीर्ष पर आ बैठा ये व्यक्ति जब पीएम बना, तो वादे भी बड़े थे और नारे भी। उम्मीद भी बड़ी थी और विरोध भी। लेकिन जिसे कांग्रेस ने कमजोर कहा, उस पीएम मोदी ने सब से पहले वो छोटे छोटे बदलाव करने की हिम्मत दिखाई – जो कांग्रेस के 60 साल के शासन में एक भी मजबूत पीएम नहीं कर सकता था। सफाई का संस्कार जनता के मन पर अंकित करना हो, या जीरो बैलेंस बैंक अकाउंट खोल कर गरीबों को मेनस्ट्रीम इकॉनमी से जोड़ना। नल से जल हो, या हर गाँव तक बिजली पहुँचाना। कमजोर मोदी की मजबूत नीव यहीं से बन रही थी।

1. नोटबंदी

2016 में जब पीएम मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद किए, तो देश में हंगामा मच गया। विपक्ष ने कहा, “अरे, ये क्या तमाशा है? अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी!” लेकिन इसके बाद UPI आधारित डिजिटल पेमेंट्स ने रफ्तार पकड़ी, और टैक्स कलेक्शन बढ़ा।

2. GST

जीएसटी को लागू कर पूरे देश को एक टैक्स सिस्टम के तहत लाना कोई बच्चों का खेल नहीं था। ये तो 36 तरह के खाने को एक थाली में परोसने जैसा था! विपक्ष ने इसे “गब्बर सिंह टैक्स” कहा, लेकिन जीएसटी ने बिजनेस को आसान बनाया और राजस्व बढ़ाया।

3. तीन तलाक

मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी दिलाने का फैसला सामाजिक सुधार का मास्टरस्ट्रोक था। विपक्ष ने इसे वोटबैंक पॉलिटिक्स से जोड़ा, लेकिन लाखों मुस्लिम महिलाओं ने इसे अपनी जीत मानी।

4. सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक

सर्जिकल और एयर स्ट्राइक करके मोदी सरकार ने पाकिस्तान को बताया कि आतंकवाद का जवाब है देसी गोली और गोला। ये नया भारत है। अब ये लेटर नहीं, बम भेजता है। ये वाइट हाउस कॉल नहीं करता। कॉल to एक्शन करता है। ये मोदी का भारत है। जहाँ हमले का जवाब हमले से दिया जाता है। अमेरिका के पास रोकर नहीं .

5. आर्टिकल 370

धारा 370 हटाना तो ऐसा था जैसे कोई शतरंज में “चेकमेट” मार दे! लहू का एक कतरा बहाये बिना कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने का फैसला, वो भी बिना किसी बड़े हंगामे के? दुनिया ने देखा कि भारत अपने फैसले लेने में कितना दम रखता है।

6. कोविड मैनेजमेंट

कोविड-19 के दौरान भारत ने न सिर्फ अपने लिए वैक्सीन बनाई, बल्कि 100+ देशों को वैक्सीन सप्लाई की। “वैक्सीन डिप्लोमेसी” ने भारत की ग्लोबल इमेज को बूस्ट किया। जब दुनिया मास्क और वेंटिलेटर के लिए तड़प रही थी, भारत ने आत्मनिर्भरता दिखाई।

7. ग्लोबल स्टेज पर भारत

G20, BRICS, SCO—हर जगह भारत की आवाज गूंज रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत ने निष्पक्ष रुख अपनाया, और दोनों पक्षों ने भारत की बात सुनी। मिडल ईस्ट से लेकर अफ्रीका तक, भारत की डिप्लोमेसी ने नया रंग दिखाया। ये भी बताया की ग्लोबल साउथ का प्रधान भारत है .

8. डिजिटल इंडिया, स्पेस, और इंफ्रास्ट्रक्चर

UPI से लेकर चंद्रयान-3 तक, भारत ने टेक्नोलॉजी में झंडे गाड़े। हाईवे, मेट्रो, और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स ने इंफ्रास्ट्रक्चर को नया लुक दिया। मिडल ईस्ट तक रेलवे कनेक्टिविटी का सपना। 

9. CAA और आत्मनिर्भर डिफेंस

CAA ने पड़ोसी देशों के उत्पीड़ित लोगों को शरण दी। डिफेंस सेक्टर में भारत अब हथियारों का निर्यातक बन रहा है। ड्रोन से लेकर मिसाइल तक, “आत्मनिर्भर भारत” सिर्फ नारा नहीं, हकीकत है।

कांग्रेस कहती है कि मोदी कमजोर हैं। क्यों? क्योंकि :

मोदी के पास घोटाले करने की ताकत नहीं है। (कोई 2G, 3G, CWG, कोयला, चारा घोटाला मोदी ने नहीं किया)
मोदी के पास परिवार को अमीर बनाने का साहस नहीं। (कोई “दामाद जी” नहीं तो ज़मीन देने का ड्रामा नहीं!)
मोदी के पास देश बेचने की हिम्मत नहीं। (PSU को लुटाने की जगह मोदी ने उसे मज़बूत किया!)
मोदी के पास सेना को फटे जूतों में रखने की क्रूरता नहीं। (मोदी सरकार में आज सैनिकों के पास मॉडर्न हथियार हैं!)
मोदी के पास डॉलर लेने की ललक नहीं। (मोदी को विदेशी फंडिंग से ज्यादा देश की ताकत पर भरोसा है !)
मोदी के पास झूठ बोलने की आदत नहीं। (मोदी के पास वादे पूरे करने की कोशिश, न कि सिर्फ जुमलेबाजी!)
और हाँ, मोदी के पास “पप्पूगिरी” करने की योग्यता नहीं। (सॉरी, ये करने के लिए तो जन्मजात टैलेंट चाहिए!) तो भाई, अगर ये कमजोरी है, तो ऐसी कमजोरी हर लीडर में होनी चाहिए!

अगर नरेंद्र मोदी “कमजोर” प्रधानमंत्री हैं, तो फिर जनता तो यही चाहेगी ना कि बार-बार ऐसा ही “कमजोर” पीएम मिल जाए। क्योंकि ये “कमजोर” लीडर भारत को ताकतवर बना रहा है। भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, आगे चल कर तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। टेक्नोलॉजी, डिफेंस, और डिप्लोमेसी में भारत ने पिछले एक दशक में  जो छलांग लगाई, वो कोई कमजोर लीडर नहीं कर सकता।

पहले जो “मजबूत” लीडर्स थे, उन्होंने देश को घोटालों, भ्रष्टाचार, और कमजोर इमेज में डुबोया। सैंकड़ो वर्ग किलोमीटर की जमीन चीन को दे दी। देश पर आपातकाल थोप दिया। इतनी मजबूत बहादुरी दिखाई कि घर घर में घुसकर गरीब जनता की नसबंदी करवा दी। ऐसी मजबूती दिखाई कि लोग मेट्रो सीटीज में घर से बाहर निकलते तो मन में डर रहता। क्या पता कब किस मार्केट में या ट्रेन में कोई इस्लामी बॉम्ब अटैक न हो जाए।  याद है न वो दौर, जब भारत को “सॉफ्ट स्टेट” कहा जाता था? आज भारत वो देश है जो आतंकियों को उनके घर में घुसकर ठोकता है, G20 में दुनिया को रास्ता दिखाता है, और चांद पर तिरंगा फहराता है।

तो, सोचिए, और समझिए, —किसे और क्यों “कमजोर” कहा जा रहा है? क्या ये सिर्फ पॉलिटिकल ड्रामा है, या कुछ और। क्योंकि सच वो नहीं जो चिल्ला कर बताया जाता है, सच वो है जो आंकड़े और काम दिखाते हैं। भारत मज़बूत है, और इसका नेतृत्व भी।

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