Golden Temple Controversy: योग पर FIR, वज़ू पर माफी – क्यों?

Summary
स्वर्ण मंदिर के सरोवर में मुस्लिम इंफ्लुएंसर द्वारा वजू करने का वीडियो वायरल हुआ, माफी भी मिली। लेकिन योग करने वाले हिंदू पर FIR हुई थी।

इस्लामी कट्टरपंथी कहीं चले जाएँ, उनका मिशन नहीं बदलता। अब एक ऐसा वीडियो मुसलमान इंफ्लुएंसर का वायरल हो रहा है। जिसमें वो अमृतसर स्वर्ण मंदिर के पवित्र सरोवर में वजू कर रहा है। 

और सिर्फ़ इतना ही वायरल वीडियो में ये इंफ्लुएंसर एक उँगली दिखा कर इशारा भी करता है, लोगों ने कहा है कि ये तौहीद का इशारा है। तौहीद का मतलब है कि दुनिया में सिर्फ़ अल्लाह ही है और उसके अलावा कोई ईश्वर नहीं है। बेसिकली स्वर्ण मंदिर में खड़े होकर अपने मजहब को सबसे सुप्रीम बताना। 

वीडियो वायरल होने के बाद उस मुस्लिम लड़के ने अब माफ़ी माँग ली है। वीडियो को संज्ञान में लेते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने यह कहा कि वीडियो में दिख रहे शख्स को यहाँ के संस्कार और नियम के बारे में मालूम नहीं था। लेकिन इस वीडियो, माफ़ी और SGPC के इस बयान के बीच सवाल भी उठने लगे हैं। 

अब आप कहिएगा कि आख़िर विवाद क्या है? विवाद यह है कि जब एक मुस्लिम उसी स्वर्ण मंदिर में वहाँ के नियम तोड़ रहा है तो कोई FIR नहीं। लेकिन ठीक एक साल पहले उसी स्वर्ण मंदिर के सरोवर के पास जब एक हिंदू योग टीचर ने योगाशन किया था तो उसके ख़िलाफ़ SGPC ने FIR करवा दिया था। उसको जान से मारने की धमकी दी जा रही थी। 

सिर्फ़ यही नहीं, साल 2021 में कपूरथला में एक युवक की हत्या कर दी गई क्योंकि सेवादार ने उसको गुरुद्वारा के ग्राउंड फ्लोर पर रोटी खाते देख लिया जो बेअदबी है। जिसके भीड़ ने उसे माए दिया। भूख लगी, वो रोटी खाना चाहा लेकिन भीड़ ने उसे मार दिया। 

एक और वीडियो वायरल हुआ था जिसमें गोल्डन टेम्पल में एक व्यक्ति को मारा जा रहा है क्योंकि उसके पॉकेट से एक तंबाकू का पैकेट निकलता है। 

बिहार से आने वाली एक वृद्ध महिला को बुरी तरफ़ से स्वर्ण मंदिर में मारा गया क्योंकि उसके ऊपर आरोप लगाया गया कि वो बीड़ी पी रही थी। लेकिन जब पुलिस जांच हुई तो कहीं भी बीड़ी पीने का सबूत नहीं मिला।  

ऐसे में सवाल उठता है कि हिंदुओं के छोटे छोटे और अनजाने में किए गए अपराधों और कभी कभार तो बिना अपराध किए भी जो लोग मारने पीटने तक उतारू हो जाते हैं, योगा पर FIR करवाते हैं… आख़िर इस मामले में इतनी सॉफ्ट एप्रोच क्यों रख रहे हैं? 

आख़िर इस्लामी कट्टरपंथी का वजू करना क्या बीड़ी पीने से छोटा अपराध है? क्या तौहीद का निशान दिखाना मर्यादा के ख़िलाफ़ नहीं है? आख़िर ऐसा क्या है जो अब प्रेम से बात हो रही है लेकिन हिंदू दिखते ही तलवारें म्यान से निकल आती थीं।

सिर्फ़ यही बल्कि यही लोग देश के टोल-प्लाजा पर, उत्तराखंड में होटल मालिकों के साथ मार पीट करते हैं। तलवार का डर दिखाते हैं। लेकिन यह तलवार सिर्फ़ हिंदुओं के ख़िलाफ़ ही क्यों उठ रहे हैं? क्यों इनकी ज़ुबान अब एक मुसलमान को लेकर नहीं खुल रही है? नॉन-सिख कहकर यह सीधे तौर पर हिंदुओं को टारगेट बना रहे हैं और मुसलमान, कट्टरपंथियों को सर पर चढ़ा रहे हैं।  

Editorial team:
Production team:

More videos with Harsh Vardhan as Anchor/Reporter