एक बहन रोती है हमारी, तुमने उसका सिंदूर मिटा दिया।
तुमने ही तो कहा था, तो हमने जाकर मोदी को बता दिया।
तुमने नाम पूछा, धर्म देखा और चला दी सीने पर गोलियाँ।
हमारी नज़र क्या देखती है, जगह चुनके हमने ये जता दिया।
काफिरों की जान को समझते हो तुम बस एक खिलौना।
काफिर का क्या है मक़ाम, घर में घुसके तुम्हें बता दिया।
ये वो दौर नहीं कि हमारे शहर जलें और हम क्रिकेट रोकें।
अब पानी के आगे क्या-क्या रुकेगा तुम्हारा, ये हमने दिखा दिया।
अभी वक्त है, ठहर जाओ, सुधर जाओ।
फिर ये मत कहके रोना, कि क्यों जाकर मोदी को बता दिया।



