राजनीति में आपने ‘सेल्फ गोल’ तो बहुत देखे होंगे, लेकिन राहुल गांधी ने जो किया है, उसे आने वाली नस्लें ‘इंटेलेक्चुअल सुसाइड’ के तौर पर याद रखेंगी। आज बात करेंगे कि कैसे राहुल गांधी ने MTV बकरा का शिकार बनकर खुद को दुनिया का सबसे बड़ा ‘Useful Idiot’ साबित कर दिया है। और ये मैं हवा में नहीं कह रहा, इसके पीछे ठोस मिलिट्री लॉजिक और डेटा है।
Useful Idiot: जब आप अपने ही दुश्मन के सबसे बड़े हथियार बन जाएं
इंटरनेट की भाषा में ‘Useful Idiot’ उसे कहते हैं जिसे लगता तो है कि वो बहुत बड़ा क्रांतिकारी काम कर रहा है, लेकिन असल में वो अपने विरोधियों के एजेंडे को अनजाने में सच साबित कर देता है। राहुल गांधी ने जनरल एम.एम. नरावणे साहब की किताब Four Stars of Destiny पर हंगामा मचाया, ये सोचकर कि वो सरकार को घेर लेंगे। लेकिन राहुल गांधी जी, आपने तो खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं, बल्कि सीधा कुल्हाड़ा मार लिया है
राहुल गांधी की ‘पप्पू पॉलिटिक्स’
राहुल गांधी कह रहे हैं कि उन्हें जनरल नरवणे पर पूरा भरोसा है। ठीक है, तो फिर ये डेटा भी मान लीजिए जो जनरल नरवणे के कार्यकाल और भारतीय सेना ने ऑन-रिकॉर्ड रखा है:
- डेटा नंबर 1 (Kailash Range Operation): अगस्त 2020 में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ के तहत कैलाश रेंज की उन चोटियों पर अधिकार हासिल किया था, जहाँ से हम मोल्डो (Moldo) में चीनी गैरीसन को सीधे अपनी तोपों की जद में ले आए थे। नरवणे साहब की लीडरशिप में हमने चीन को Table-top negotiation पर आने के लिए मजबूर किया। अगर जमीन चली गई थी, तो हम चीन को डिक्टेट कैसे कर रहे थे?
- डेटा नंबर 2 (Buffer Zones): नरवणे जी ने स्पष्ट किया था कि पेट्रोलिंग पॉइंट्स (जैसे PP-15 और PP-17A) पर डिसएंगेजमेंट हुआ है, जमीन का नुकसान नहीं। भारत आज भी अपनी L-A-C (Line of Actual Control) की धारणा पर अडिग खड़ा है।
- डेटा नंबर 3 (Infrastructure Push): 2020 से 2024 के बीच BRO ने सीमा पर 300 से ज्यादा पुल और रणनीतिक सड़कें बनाई हैं। ये डेटा बताता है कि भारत पीछे नहीं हटा है, बल्कि चीन की आंखों में आंखें डालकर अपनी पोजीशन मजबूत कर चुका है।
राहुल गांधी का ‘MOU स्कैम’ और चीन का सदमा
राहुल गांधी ने चिल्लाकर कहा कि- “मुझे जनरल नरवणे पर भरोसा है!”
राहुल जी, गणित समझिए: 1. सरकार ने कहा- “LAC पर हमारी एक इंच जमीन नहीं गई।” (आपने कहा- झूठ है) 2. सेना ने भी कहा- “एक इंच जमीन नहीं गई।” (आपने कहा- झूठ है) 3. अब नरवणे ने कहा- “एक इंच जमीन नहीं गई।” और आपने कहा- “मुझे नरवणे पर भरोसा है”
इसका मतलब आपने खुद मान लिया कि 4 साल से आप जो ‘जमीन गई-जमीन गई’ का शोर मचा रहे थे, वो सफेद झूठ था? कभी आपने कहा कि 200 स्क्वेयर किलोमीटर जमीन चीन को दे दी आर्मी ने तो कभी 1000, कभी 2000 स्क्वायर किलोमीटर..
आपने तो अपनी ही पार्टी के उन प्रवक्ताओं (सुप्रिया और पवन खेड़ा) को ‘बकरा’ बना दिया जो सुबह-शाम झूठ की स्क्रिप्ट रटते हैं।
‘गलवान’ फिल्म और चीन का डर
अब आते हैं सबसे दिलचस्प हिस्से पर। आपको याद है जब ‘गलवान’ पर फिल्म बनाने की घोषणा हुई थी और उसका ट्रेलर आया था? चीन ने इस पर आधिकारिक तौर पर ‘प्रोटेस्ट’ किया था। चीन की सरकार और उनके पालतू अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने आसमान सिर पर उठा लिया था।
क्यों? क्योंकि चीन डरता है उस सच से जो भारत की सेना ने गलवान की पहाड़ियों में लिखा था। वो सच था.. हमारे 20 जांबाजों ने चीन के 40 से ज्यादा सैनिकों की गर्दनें तोड़ी थीं और उन्हें उनकी सीमा के पीछे धकेल दिया था।
चीन चाहता था कि दुनिया इस सच को न जाने, और राहुल गांधी पिछले 4 साल से चीन के उसी प्रोपेगेंडा को हवा दे रहे थे यह कहकर कि ‘भारत हार गया, जमीन चली गई’।
लेकिन देखिए कुदरत का करिश्मा! आज राहुल गांधी ने खुद अपनी जुबान से उस ‘गलवान फिल्म’ की कहानी पर मुहर लगा दी है। जब आप कहते हैं कि आपको नरवणे पर भरोसा है… और नरवणे कहते हैं कि गलवान में हमने चीन को करारा जवाब दिया… तो राहुल गांधी जी, आपने तो खुद ही स्वीकार कर लिया कि गलवान में भारत की शानदार जीत हुई थी..
जिस सच को दबाने के लिए चीन ने पूरी ताकत लगा दी, आज उसी सच को राहुल गांधी ने अपनी ‘पॉलिटिकल नासमझी’ में पूरे देश के सामने स्वीकार कर लिया। राहुल गांधी ने अनजाने में ही सही, लेकिन CCP के साथ हुए उस पुराने ‘MOU’ की धज्जियाँ उड़ा दीं। चीन आज सिर पीट रहा होगा कि “ये हमने कैसा ‘दोस्त’ पाल रखा था जो ऐन मौके पर हमारी पोल खोल गया”
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) आज सोच रही होगी कि जिस राहुल गांधी के साथ उन्होंने 2008 में MOU साइन किया था, वो इतना ‘Useful’ कैसे हो गया कि उसने खुद ही भारत सरकार के स्टैंड को सही साबित कर दिया!
‘कारवां’ भी पलटा
हैरानी देखिए, जो The Caravan मैगजीन सुबह-शाम भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चलाती है, वो भी अब नरवणे के हवाले से कह रही है कि जमीन नहीं गई। जब आपके इकोसिस्टम के सबसे बड़े खिलाड़ी ही हथियार डाल रहे हैं, तो राहुल गांधी जी, आप अभी भी किस दुनिया में जी रहे हैं?
गलवान की लड़ाई में हमारे 20 जांबाजों ने चीन के 40 से ज्यादा सैनिकों को ठिकाने लगाया था। तब आपने सेना पर शक किया। आज जब आपने नरवणे पर ‘भरोसा’ जताया है, तो आपने अनजाने में ही सही, लेकिन पहली बार सच बोल दिया है कि भारत की एक इंच जमीन भी चीन के पास नहीं है।
राहुल गांधी को उनके सलाहकारों ने ‘बकरा’ बनाकर बीच चौराहे पर छोड़ दिया है। उन्हें समझ ही नहीं आया कि नरवणे का समर्थन करके उन्होंने मोदी सरकार की सबसे बड़ी रणनीतिक जीत पर अपनी मुहर लगा दी है। राहुल जी, अगली बार स्क्रिप्ट पढ़ने से पहले ज़रा ये देख लीजिएगा कि कहीं आप अपनी ही टीम के ‘बकरा’ तो नहीं बन रहे?




