बंगाल चुनाव से ठीक पहले दिल्ली ने एक ऐसी चाल चली है जिसने कोलकाता से लेकर चेन्नई तक खलबली मचा दी है। लोग नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों में उलझे थे, लेकिन असली ‘मास्टरस्ट्रोक’ शाम को लगा जब तमिलनाडु के गवर्नर RN Ravi को अचानक बंगाल की कमान सौंप दी गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेचैनी बता रही है कि इस बार मामला सिर्फ राजभवन का नहीं, बल्कि Internal Security के उस ‘स्पेशल ऑपरेशन’ का है जिसके उस्ताद खुद RN Ravi माने जाते हैं।
आर.एन. रवि की नियुक्ति के बाद ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया वैसी ही थी जैसे ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’। उन्होंने तुरंत ट्वीट कर नाराजगी जताई कि उनसे सलाह नहीं ली गई। लेकिन सवाल ये है कि एक राज्यपाल की नियुक्ति से दीदी इतनी ‘हाई-टेंशन’ में क्यों हैं?
I am shocked and deeply concerned by the sudden news of the resignation of Shri C. V. Ananda Bose, the Governor of West Bengal.
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) March 5, 2026
The reasons behind his resignation are not known to me at this moment. However, given the prevailing circumstances, I would not be surprised if the…
इसका जवाब है- घुसपैठ और इंटरनल सिक्योरिटी यानी, SIR। जहाँ पीएम मोदी और अमित शाह घुसपैठियों पर एक्शन मोड में हैं, वहीं बंगाल बॉर्डर सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील बना हुआ है। SIR की प्रक्रियाओं के दौरान भी यह साफ दिखा कि कैसे घुसपैठ बंगाल की डेमोग्राफी बदल रही है। ममता बनर्जी पर आरोप लगते हैं कि ये घुसपैठ उनकी ‘वोट बैंक पॉलिटिक्स’ का हिस्सा है, और अब इसी लूपहोल को बंद करने के लिए आर.एन. रवि को भेजा गया है।
आर.एन. रवि कोई साधारण ब्यूरोक्रेट नहीं हैं। वे 1976 बैच के IPS ऑफिसर हैं और देश के NSA अजीत डोभाल के सबसे भरोसेमंद सिपहसालारों में से एक माने जाते हैं। रवि नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्य और देश के डिप्टी NSA भी रह चुके हैं। यानी रणनीति वही बनती है, जहाँ NSA डोभाल और रवि साथ बैठते हैं। उन्हें ‘नॉर्थ-ईस्ट का संकटमोचक’ कहा जाता है। 2018 में जब उन्हें नगालैंड का राज्यपाल बनाया गया, तो उन्होंने महज एक साल के भीतर नागा शांति समझौते (Naga Peace Accord) में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने नगालैंड की प्रशासनिक व्यवस्था को पटरी पर लाया और अलगाववाद की कमर तोड़ दी। इसके बाद तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन सरकार के साथ उनकी तनातनी ने साबित कर दिया कि वे झुकने वाले ऑफिसर नहीं हैं।
Today, we mark not merely the end of a problem but the beginning of a new future. #Nagaland http://t.co/23SUObuL4T pic.twitter.com/35x4ih8qQN
— Narendra Modi (@narendramodi) August 3, 2015
अब बंगाल में उनकी नियुक्ति का सीधा मतलब है कि प्रशासनिक सख्ती और घुसपैठ पर सर्जिकल स्ट्राइक। केंद्र ने साफ कर दिया है कि बंगाल की आंतरिक सुरक्षा के साथ अब कोई समझौता नहीं होगा। अगर आर.एन. रवि अपने पुराने ट्रैक रिकॉर्ड के मुताबिक बंगाल की कानून व्यवस्था और बॉर्डर सिक्योरिटी को टाइट करते हैं, तो यह सीधे तौर पर ममता बनर्जी की राजनीति पर ‘काउंटर अटैक’ होगा। यही वजह है कि दीदी संविधान की दुहाई दे रही हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि अब राजभवन में कोई रबर स्टैंप नहीं, बल्कि एक ‘सिक्योरिटी एक्सपर्ट’ बैठा है।”




