कांग्रेस की हिंदू आतंकवाद वाली थ्योरी को फर्जी साबित करने और उस साजिश का खुलासा करने वाले अधिकारी आरवीएस मणि को अब मोदी सरकार पद्म पुरस्कार से सम्मानित कर रही है। आरवीएस मणि को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है।
आरवीएस मणि को यह पुरस्कार सिविल सेवा क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जा रहा है। आरवीएस मणि गृह मंत्रालय में अवर सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं और वर्ष 2009 में यूपीए सरकार के दौरान उन्हें भगवा आतंकवाद की मनगढ़ंत कहानी रचने के लिए दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने को मजबूर किया गया था।
आरवीएस मणि ने अपनी पुस्तक ‘हिंदू टेरर – गृह मंत्रालय का अंदरूनी सच’ में लिखा है कि कांग्रेस सरकार अधिकारियों से जबरदस्ती हिंदू आतंकवाद की थ्योरी से जुड़े दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने को कहती थी।
आरवीएस मणि की इसी पुस्तक में इस बात का भी उल्लेख है कि इशरत जहाँ मुठभेड़ मामले में तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को फँसाने और हिंदू आतंकवाद की झूठी कहानी गढ़ने के लिए कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी आरवीएस मणि पर दबाव डाला था।
अधिकारियों को मजबूर किया गया था कि वे देश की जनता को यह न बताएं कि इशरत जहाँ आतंकवादी थी। साथ ही इशरत जहाँ के लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंधों को छुपाने के लिए भी आरवीएस मणि पर दबाव डाला गया। यहाँ तक कि उन्हें सिगरेट से भी दागा गया।
किन्तु इन तमाम दबावों के बावजूद आरवीएस मणि न तो डरे और न ही झुके। उन्होंने सिविल सेवा के अपने वचनों का मान रखते हुए राष्ट्र के प्रति अपनी ईमानदारी को बनाए रखा।
केंद्र सरकार द्वारा ऐसे अधिकारियों को पद्म श्री दिया जाना अन्य अधिकारियों, हमारी युवा पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा से कम नहीं है।




