बात है हाल ही में यूपी के लखनऊ में हुए फार्मा कॉनक्लेव 1.0 की। यहाँ देश भर के फार्मा सेक्टर के इन्वेस्टर्स मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बैठे हुए थे। इसी दौरान देश की टॉप फार्मा कंपनीज में से एक मैंकाइंड फार्मा के चेयरमैन रमेश जुनेजा ने एक चौंकाने वाली डिटेल बताई।
कैसे गुंडाराज किसी स्टेट को डिरेल कर सकता है और लॉ एंड ऑर्डर पर फ़ोकस उस स्टेट को वापस ट्रैक पर ला सकता है, इसका एक उदाहरण हमें यूपी से देखने को मिला है।
रमेश जुनेजा ने बताया कि वो मेरठ से ही अपनी कंपनी रन करते थे लेकिन गुंडाराज का माहौल ऐसा आया कि उन्हें यूपी छोड़ना पड़ा।
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) February 13, 2026
उन्होंने बताया कि उनका भतीजा उस दौरान किडनैप हो गया और उन्हें अपना प्रदेश छोड़ के बिजनेस शिफ्ट करना पड़ा। (7/8) pic.twitter.com/p1y79lTAVd
रमेश जुनेजा ने बताया कि वो मेरठ से ही अपनी कंपनी रन करते थे लेकिन 2000s के दौरान गुंडाराज का माहौल ऐसा आया कि उन्हें यूपी छोड़ना पड़ा। रमेश जुनेजा ने बताया कि उनका भतीजा उस दौरान किडनैप हो गया और उन्हें अपना प्रदेश छोड़ के दिल्ली जाना पड़ा।
रमेश जुनेजा ये बताते हुए भावुक हो गए कि इस अपहरण की घटना के बाद उन्हें दिल्ली मूव करना पड़ा और अब उन्हें अपने मेरठ वाले घर की याद भी बहुत आती है। जुनेजा ने बताया कि योगी सरकार जब से आई है तो यूपी में एक नई सुबह हुई है और उनका अब लौटने का मन करता है।
देखिए ये इंट्रेस्टिंग डेटा-
11 फ़रवरी 2025 को उत्तर प्रदेश का बजट पेश हुआ। लेकिन बजट से पहले ही प्रेजेंट किए गए इकोनॉमिक सर्वे में एक बड़ी इंट्रेस्टिंग डिटेल हमें मिली।
उत्तर प्रदेश का इकोनॉमिक सर्वे कहता है कि अब नेशनल GDP में यूपी का शेयर बढ़ने लगा है, सर्वे कहता है कि यूपी का शेयर नेशनल GDP में 2017-18 में 8.6% था और अब 2024-25 में बढ़ कर ये 9.1% हो गया है। लेकिन ये एक लाइन की डिटेल पूरी कहानी नहीं बताती।

पूरी कहानी मैं बताता हूँ! जब हमारा देश स्वतंत्र हुआ था तब यूपी और बिहार जैसे स्टेट्स का देश की जीडीपी में बड़ा शेयर था। इन फैक्ट यूपी इस देश की सबसे बड़ी स्टेट इकॉनमी था जबकि गुजरात और कर्नाटक जैसे स्टेट्स का शेयर छोटा सा था।

EAC-PM की मेंबर शमिका रवि का एक रिसर्च पेपर बताता है कि 1960s में यूपी का नेशनल GDP में शेयर 14.4% था, और यूपी इस कंट्री की सबसे बड़ी इकॉनमी था। लेकिन इसके बाद लगातार बाक़ी स्टेट्स आगे बढ़ते गए और यूपी पिछड़ता गया। एक के बाद एक साल आता रहा और उत्तर प्रदेश का शेयर नेशनल इकोनॉमी में कम होता रहा।

शमिका रवि का पेपर कहता है कि यूपी का नेशनल जीडीपी में शेयर 2000 आते-आते सिर्फ़ 10% रह गया, यानी हमने 4% से ज्यादा शेयर लूज कर दिया। और 2010 आते-आते तो स्थिति और बुरी हो गई। 2017-18 में यूपी का जीडीपी में शेयर सिर्फ़ 8.6% रह गया।
यानी 1960 के बाद कोई भी सरकार यूपी का नेशनल जीडीपी में शेयर नहीं बढ़ा पाई। क्यों नहीं बढ़ा पाई? क्योंकि ना इसके बाद यूपी में इंडस्ट्री लगाने का सीरियस प्रयास हुआ और जो यूपी की इकोनॉमी में था भी, वो भी चला गया। क्यों चला गया क्योंकि यूपी गुंडाराज को उद्योग की शकल दे दी गई।
लेकिन 1960s के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि यूपी का नेशनल जीडीपी में शेयर बढ़ा है और योगी सरकार पहली ऐसी सरकार है जिसमें ये शेयर 9.1% पहुँचा है।
सोचिए कि लगभग 60 सालों तक ऐसा होने दिया गया कि प्रदेश की जीडीपी साल दर साल गिरती रही और सपा-बसपा -कांग्रेस सरकारें देखती रहीं, जिस दौर में गुजरात मैन्युफैक्चरिंग का हब बन रहा था, तमिलनाडु में टेक्सटाइल यूनिट्स सेट अप हो रहीं और बेंगलुरु जैसे IT स्पॉट्स उभर रहे थे तब उत्तर प्रदेश में ये पार्टियां दंगाइयों को सपोर्ट कर रहीं थी, उनके विधायक गेस्ट हाउस कांड जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे थे।
जब महाराष्ट्र धीरूभाई अंबानी, कर्नाटक नारायणमूर्ति और किरण शा मजूमदार और गुजरात अदानी जैसे अंतर्प्रण्योर खड़े कर रहा था तब उत्तर प्रदेश में सपा जैसे दल एक जिला एक माफिया के तहत मुख़्तार, अतीक और आजम ख़ान जैसे माफिया को सपोर्ट कर रहे थे।
जब हरियाणा में मारुति की फैक्ट्री के लिए जापानी विशेषज्ञ इंजीनियर बुलाए जा रहे थे तो लग रही थी तब यूपी के मुरादाबाद में दंगों के लिए घुसपैठिए बसाए जा रहे थे। जब पुणे जैसे शहर आईटी और ऑटोमिबाइल का हब बन रहे थे तब कानपुर में एक एक फैक्ट्री की मशीनें कबाड़ियों के हाथों जा रही थीं।
और सिर्फ़ 1980 और 1990 के दशक को क्या दोष देना, 2010s में भी जब दक्षिण के राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग के लिए आगे बढ़ रहे थे, गुजरात में इन्वेस्टर समिट हो रही थी तो उत्तर प्रदेश में सरकारों का फ़ोकस इस पर था कि आतंकियों के केस वापस लिए जा रहे थे।
लेकिन हर मनुष्य का और हर समाज का समय आता है, और वो समय अब उत्तर प्रदेश का है जब ना सिर्फ़ हमारी GDP पिछले 8 वर्षों में दोगुने से भी ज्यादा बड़ी हुई है बल्कि अब पेप्सिको और हल्दीराम जैसी कम्पनियाँ उत्तर प्रदेश के छोटे-छोटे टाउंस में जाके निवेश कर रही हैं।
और अगर आप ये सोचते हैं कि इससे मेरी जिंदगी कैसे बदलती है तो मथुरा के कोसी कलाँ के इस लड़के को सुनिए।
हम अपने देश में ही पिछड़ गए थे, बीमारू में शामिल थे। यहाँ तक कि जब पूरा देश अगर 1 रुपया औसतन कमाता था तो हमारे प्रदेश के लोगों की कमाई मात्र 50 पैसे थी। ये बदला है अब हम आगे बढ़ रहे हैं, वो 50 पैसे अब फिर 1 रुपया होने की तरफ़ बढ़ रहे हैं।
श्रीराम और कृष्ण की भूमि के लोग दरिद्रता से बाहर आ रहे हैं, प्रदेश की पहचान खराब सड़कों से नहीं बल्कि एक्सप्रेस वे के नेटवर्क से हो रही है। ये बताना कि हम उत्तर प्रदेश से हैं, अब शर्म की बात नहीं है। जिस उत्तर प्रदेश में पहले सैफ़ाई महोत्सव होता था , आज वो प्रदेश महाकुंभ के भव्य आयोजन लिए जाना जा रहा है।



