इस वर्ष बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को मनाई जा रही है। यह पर्व ज्ञान, संगीत, कला और बुद्धि की देवी माँ सरस्वती को समर्पित प्रमुख हिंदू उत्सव है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आने वाली यह तिथि सरस्वती जयंती भी कहलाती है।सोशल मीडिया पर इस पर्व को लेकर एक व्यापक गलतफहमी फैलाई जा रही है। बड़ी संख्या में लोग दावा करते हैं कि बसंत पंचमी के दिन ही वसंत ऋतु का आगमन होता है। कई पोस्ट्स में लिखा जा रहा है—“वसंत ऋतु का स्वागत करें”, “बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन की सूचना देती है” या “यह पर्व वसंत के आने और माँ सरस्वती की पूजा का प्रतीक है”।

23rd January 2026.
— Sajai Kumar (@SajaiKumar9) January 23, 2026
Today Vasant Panchami.
Vasant Panchami's specialty lies in celebrating the arrival of spring (Vasant Ritu) and honoring Goddess Saraswati, the deity of knowledge, music, and arts, marked by wearing yellow.#vasantpanchami#hinduism #sajaikumar pic.twitter.com/xmrrJo8DEM
ये दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी माँ सरस्वती के प्राकट्य का उत्सव है। जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तब चारों ओर मौन छाया था। भगवान विष्णु की अनुमति से ब्रह्मा ने अपने कमंडल से जल छिड़का। जल के स्पर्श से पृथ्वी में कंपन हुआ और एक दिव्य शक्ति प्रकट हुईं—माँ सरस्वती। उनके चार हाथों में वीणा, वेदों की पुस्तक, जप माला और वरद मुद्रा थी। इसी क्षण सृष्टि को वाणी और ध्वनि प्राप्त हुई। इस घटना की स्मृति में बसंत पंचमी मनाई जाती है।
ऋग्वेद (मंडल 6, सूक्त 61 एवं मंडल 7) में माँ सरस्वती को ज्ञान को पवित्र करने वाली नदी के रूप में वर्णित किया गया है।ऋतु परिवर्तन का प्रश्न अलग है।
अम्बि॑तमे॒ नदी॑तमे॒ देवि॑तमे॒ सर॑स्वति । अ॒प्र॒श॒स्ता इ॑व स्मसि॒ प्रश॑स्तिमम्ब नस्कृधि ॥
अम्बितमे नदीतमे देवितमे सरस्वति । अप्रशस्ता इव स्मसि प्रशस्तिमम्ब नस्कृधि ॥ (2.41.16)
हिंदू पंचांग के अनुसार शिशिर ऋतु माघ और फाल्गुन मास में रहती है (लगभग मध्य जनवरी से मध्य मार्च)। वास्तविक वसंत ऋतु चैत्र और वैशाख मास में आती है। इसलिए बसंत पंचमी से वसंत ऋतु की शुरुआत का कोई संबंध नहीं है।यह पर्व ज्ञान और साधना का प्रतीक है, ऋतु परिवर्तन का नहीं। आइए सही जानकारी के साथ इसे मनाएँ।




