आपको कैसा लगेगा यदि एक कश्मीरी अलगाववादी आतंकी भारतीय वायुसेना के अधिकारियों की हत्या करे, टेरर फंडिंग करे। और फिर भारत के ही एक आईबी ऑफिसर की सिफारिश पाकर पाकिस्तान में जाए, हाफिज सईद से मिले और लौटने के बाद भारत के प्रधानमंत्री उससे ये कहें कि “जनाब आपका तह-ए-दिल से शुक्रिया, आप तो कश्मीर की अहिंसा के इकलौते बापू हो।”
मैं बात कर रहा हूँ उम्र कैद की सजा काट रहे आतंकी यासीन मलिक की जिसने अपने एक ताजा एफ़िडेविट में ये तमाम खुलासे किये हैं। यासीन मलिक कह रहा है कि तारीफ़ों का यह गुलदस्ता उसे किसी और ने नहीं बल्कि यूपीए के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने उस मुलाकात में ढीले हाथों से सौंपा था जिसकी तस्वीर अक्सर सोशल मीडिया में खूब तैरती हुई देखी जाती है।
Jammu & Kashmir Liberation Front (JKLF) terrorist Yasin Malik, serving a life sentence in a terror-funding case, has made a shocking claim.
— Amit Malviya (@amitmalviya) September 19, 2025
In an affidavit filed in the Delhi High Court on August 25, Malik says:
•He met Lashkar-e-Taiba founder and 26/11 mastermind Hafiz Saeed… pic.twitter.com/D8xLdWDizG
याद रखिए ये सिर्फ एक तस्वीर नहीं बल्कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व में सोनिया गाँधी के रिमोट कंट्रोल से किसी चाइनीज खिलौने की तरह चलने वाली यह यूपीए सरकार आतंकवाद को मिटाने के लिए सचमुच कितनी प्रतिबद्ध थी इसका प्रमाण है।
इस्लामी आतंकी यासीन मलिक द्वारा 25 अगस्त 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट में पेश किया हुआ ताजा हलफ़नामा चीख चीख के बता रहा है कि 2005 में कश्मीर में आए भूकंप की आपदा को अवसर में बदलने के नाम पर यूपीए सरकार ने मलिक से कहा कि
“यासीन, तुम जरा पीओके में घूम आओ। पाकिस्तान के राजनेताओं से बात करने से आतंकवाद का हल नहीं निकल सकता है यासीन। माय डीयर यासीन, तुम प्लीज एक बार हाफिज सईद से बातचीत कर लो और देखो कि आतंकवाद कुछ कम हो सकता है या नहीं।”
आप भूलिएगा नहीं कि भारत में 2005 से 2008 के बीच बीसों शहरों में हुए सैंकड़ों बम धमाकों में मारे गए हजारों भारतीयों के खून से लश्कर ए तैयबा के सरगना हाफिज सईद के हाथ सने हुए हैं। 26/11 के इस मास्टरमाइंड के साथ डिप्लोमेटिक पुंडा-पुंडी करने के लिए मनमोहन सिंह की सरकार ने भारतीय वायुसेना के अफसरों के हत्यारे को भेजा था। नब्बे के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन का बड़ा कारण यही यासीन मलिक था और यूपीए सरकार ये सुनिश्चित कर रही थी, कि इस दरिंदे को डिप्लोमेसी की ट्रेनिंग आईबी के भूतपूर्व स्पेशल डायरेक्टर वीके जोशी से मिले।
अपनी इस्लामी शांति वार्ता का ब्यौरा पीएम मनमोहन सिंह को देने ये आतंकी जब दिल्ली लौटा तो भारत के प्रधान मंत्री उसकी जर्रानवाजी में कश्मीरी अहिंसा के राष्ट्रपिता का खिताब अता कर रहे थे और कुरनिसात में ‘मरहबा मरहबा’ कहने के लिए भारत के तत्कालीन NSA जनाब NK Narayan भी वहीं मौजूद थे।
नेता विपक्ष बने कॉंग्रेस के शहजादे राहुल गाँधी आजकल मोदी सरकार पर सरकारी एजेंसी के दुरूपयोग का आरोप लगाते फिरते हैं। कहते हैं कि अपने दावों से हाइड्रोजन बॉम्ब फोड़ देंगे। लेकिन इस खबर से तो यही साफ होता है कि कॉंग्रेस के जखीरे में शामिल असली बम वोट चोरी के टुच्चे आरोप नहीं बल्कि यासीन मलिक जैसे दुर्दांत आतंकी ही हैं जिनकी जुबान को मासूम हिंदुओं के खून का चस्का कॉंग्रेस ने 1947 से लगा रखा है।




