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कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाहर पहुंचे राष्ट्रवादी, ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच पुलिस ने रोका प्रवेश

Summary
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रवादी समूहों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग और भारी सुरक्षा बल के सहारे स्थिति को नियंत्रित किया और किसी भी संभावित हिंसक टकराव को रोक दिया। जानिए क्या है पूरा मामला।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन के दौरान उस समय माहौल गरमा गया, जब बड़ी संख्या में राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोग भी मौके पर पहुंच गए। इन लोगों ने प्रदर्शन स्थल के बाहर ‘जय श्रीराम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए तथा प्रदर्शन में शामिल लोगों का विरोध दर्ज कराया।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार राष्ट्रवादी समूहों का आरोप था कि प्रदर्शन में शामिल कुछ लोग देश-विरोधी और अराजक विचारों को बढ़ावा दे रहे हैं। इसी दौरान कुछ लोगों ने दिल्ली पुलिस से ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग भी की। वायरल वीडियो में भी भीड़ को ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते हुए सुना जा सकता है।

एक रिपोर्टर ने मौके से बताया कि कुछ राष्ट्रवादी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से आग्रह किया कि यदि कोई व्यक्ति देश-विरोधी गतिविधियों या नारों में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। हालांकि, पुलिस ने किसी भी प्रकार के टकराव की स्थिति बनने से पहले ही एहतियात बरतते हुए राष्ट्रवादी समूहों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी।

जंतर-मंतर और उसके आसपास बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवान तैनात किए गए थे। बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई थी और प्रदर्शन स्थल पर आने-जाने वालों की निगरानी की जा रही थी। जब राष्ट्रवादी समूहों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें बाहरी क्षेत्र में ही रोक दिया और स्थिति को शांतिपूर्वक नियंत्रित किया। बाद में कई लोगों को बिना प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे ही वापस लौटना पड़ा।

पुलिस अधिकारियों का प्राथमिक उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी संभावित टकराव को रोकना था। इसी कारण विरोध करने पहुंचे समूहों और प्रदर्शनकारियों को आमने-सामने आने का अवसर नहीं दिया गया।

घटना के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस शुरू हो गई। एक पक्ष इसे राष्ट्रवादी प्रतिक्रिया बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार के रूप में देख रहा है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम के दौरान दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी के कारण कोई बड़ा विवाद या झड़प सामने नहीं आई और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।

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