‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने 6 जून का दिन ही क्यों चुना? कभी सोचा है आपने? नहीं ना? साल में 365 दिन थे, कोई भी तारीख चुनी जा सकती थी। लेकिन चुनी गई 6 जून। और 6 जून भारत के इतिहास में किस लिए याद किया जाता है, यह बताने की शायद ज़रूरत नहीं है। यही वह दिन है जब ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ हुआ था। वही ऑपरेशन जिसमें भिंडरांवाले मारा गया था और खालिस्तान आंदोलन को बड़ा झटका लगा था।
अब कुछ लोग कहेंगे कि यह सिर्फ़ एक को-इंसिडेंस है। हो भी सकता है, लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता। पॉलिटिक्स में तारीखें, सिंबल और संदेश अक्सर को-इंसिडेंस नहीं होते। ये चुने जाते हैं लोगों की भावनाओं से जुड़कर उनके साथ खेलने के लिए।
इसलिए यह बात एकदम सही है कि इसके पीछे सीजेपी की कोई सिम्बॉलिक मैसेजिंग ही है। और यह खालिस्तान के मुद्दे से जुड़े लोगों को हिंट देने के लिए है। भारत की राजनीति में खालिस्तान समर्थक नारों, किसान आंदोलन के समय उठे विवादों और अलगाववादी बहसों को लेकर पहले से ही माहौल गर्म रहा है। आप लोगों को यह याद ही होगा कि आम आदमी पार्टी ने फार्मर्स प्रोटेस्ट में खालिस्तानी सेंटीमेंट को भुनाने की कितनी कोशिश की थी। वह तो समय पर फार्म लॉज वापस हो गए, वरना इन लोगों ने पूरी प्लानिंग की हुई थी पूरे देश को सुलगाने की।
यह बात किसी से छिपी हुई नहीं है कि आम आदमी पार्टी के लोग ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से नए झंडे के साथ खड़े हो रहे हैं। इनकी प्लानिंग ही यही है कि किसी तरह यह किसी एक एथनिक ग्रुप के साथ अपने आप को जोड़कर अपनी पॉलिटिक्स का बेस तैयार करें। जो लोग राजनीति की भाषा समझते हैं, वे जानते हैं कि कई बार बातें शब्दों से नहीं, सिम्बल से कही जाती हैं। अब यह सिर्फ़ संयोग है या संदेश… इसका फ़ैसला आप ख़ुद कीजिए।



