कार्तिकेय दीपम विवाद: हाई कोर्ट की मंजूरी के बावजूद TVK सरकार को आपत्ति क्यों?

Summary
मदुरै के थिरुपरनकुंद्रम में कार्तिकेय दीपम विवाद पर विजय की TVK सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची। हाई कोर्ट की मंजूरी के बावजूद आपत्ति क्यों?।

क्या तमिलनाडु में हिंदुओं के त्योहार मनाना अब अपराध हो गया है? क्या एक दीया जलाने से सच में दंगे भड़क सकते हैं? तमिलनाडु की नई विजय सरकार सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई है… वो भी सिर्फ इसलिए, ताकि पहाड़ी पर ‘कार्तिकेय दीपम’ का दीया न जलने पाए!

पूरा मामला मदुरै के थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी का है। यहाँ सदियों पुराना एक पत्थर का खंभा है जिसे ‘दीपा थून’ कहते हैं। हिंदू संगठन सालों से यहाँ साल में सिर्फ एक दिन त्योहार पर पवित्र दीप जलाने की इजाजत मांग रहे हैं। मद्रास हाई कोर्ट ने इस साल जनवरी में साफ कह दिया था कि, हाँ, दीप जलाया जा सकता है! क्योंकि वो ज़मीन मंदिर की है, वक्फ बोर्ड की नहीं।

लेकिन कुछ लोगों को इस दीये से दिक्कत है! पहले की DMK सरकार की तरह ही, अब टीवीके (TVK) प्रमुख विजय की अगुवाई वाली नई सरकार ने जून 2026 में सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा दिया है। सरकार का logic है कि इस खंभे से महज 50 मीटर दूर एक ऐतिहासिक दरगाह है, और अगर दीया जलाया गया, तो इलाके में सांप्रदायिक तनाव यानी दंगे भड़क सकते हैं!

मद्रास हाई कोर्ट ने सरकार के इस डर को ‘काल्पनिक भूत’ बताया था और कहा था कि यह देखना हास्यास्पद है कि साल में सिर्फ एक दिन दीया जलने से राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ जाएगी! कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के इस दावे को भी ‘शरारतपूर्ण’ माना कि यह खंभा दरगाह का हिस्सा है। लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं है।

अब श्रद्धालु और हिंदू संगठन भड़के हुए हैं। उनका सीधा आरोप है कि सरकार सनातनी हिंदुओं की आस्था को कुचल रही है और हिंदुओं को सिर्फ एक ‘वोट बैंक’ की तरह देखा जा रहा है। BJP ने भी तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि तमिलनाडु में हिंदुओं को दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया गया है और ये नई सरकार कुछ नहीं, बस DMK का दूसरा चेहरा है!

आपको क्या लगता है? क्या हिंदू आस्था के एक दीये से सच में शांति भंग हो सकती है, या यह सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति है?

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