namaz in private house

बरेली विवाद: घर में सामूहिक नमाज पढ़ मदरसे में बदलने की कोशिश, हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Summary

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के मोहम्मदगंज गांव में एक घर के अंदर सामूहिक नमाज अदा करने और उसे मदरसे के रूप में तब्दील करने की कोशिश को लेकर उपजा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। इस गांव में न तो कोई मंदिर है और न ही कोई मस्जिद, लेकिन पिछले कुछ समय से एक निजी घर में बाहरी लोगों को बुलाकर सामूहिक नमाज पढ़ी जा रही थी।

स्थानीय हिंदू समुदाय ने इसका कड़ा विरोध करते हुए इसे नई परंपरा की शुरुआत और भविष्य में मस्जिद निर्माण की साजिश बताया। विवाद इतना बढ़ गया था कि प्रशासन द्वारा सुनवाई न होने पर गांव के कई हिंदुओं ने अपने घरों के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगा दिए थे, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आया।

हाईकोर्ट ने लगाई सामूहिक नमाज पर पाबंदी

इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी निजी संपत्ति या घर के अंदर बाहरी लोगों को बुलाकर सामूहिक रूप से नमाज अदा नहीं की जाएगी। आदेश के अनुसार, घर के सदस्य व्यक्तिगत रूप से इबादत कर सकते हैं, लेकिन नमाजियों की संख्या पांच से अधिक नहीं होनी चाहिए।

हाईकोर्ट के वकील सत्यम मिश्रा ने बताया “कोर्ट ने साफ कर दिया है कि निजी संपत्ति पर कोई भी अवैध गतिविधि स्वीकार्य नहीं होगी। सामूहिक नमाज पर रोक लगा दी गई है और पुलिस सुरक्षा भी हटा दी गई है। अब केवल परिवार के 2-4 लोग ही घर में नमाज पढ़ सकेंगे।”

कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को भी निर्देशित किया है कि गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखी जाए और किसी भी नई धार्मिक परंपरा को बिना अनुमति शुरू न होने दिया जाए। हिंदू पक्ष ने इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे गांव में मस्जिद न होने के कारण खाली घरों में नमाज पढ़ते आए हैं।

1995 से चला आ रहा है विवाद

मोहम्मदगंज गांव का यह विवाद नया नहीं है; इसकी जड़ें 1995 से जुड़ी हैं जब पहली बार सार्वजनिक जमीन पर नमाज पढ़ने का विरोध हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, गांव की लगभग 80% आबादी मुस्लिम है और पिछले 15 वर्षों से यहां मुस्लिम प्रधान ही काबिज हैं। गांव के तेजपाल सिंह बताते हैं “हमारे गांव में कभी भी सामूहिक नमाज की परंपरा नहीं रही है। ये लोग अब नया काम शुरू कर रहे हैं और घर को मदरसा बना रहे हैं। हमें नमाज से दिक्कत नहीं है, लेकिन इसे सामूहिक रूप देकर नई रीत नहीं डालने देंगे।”

हिंदू समुदाय का आरोप है कि उन्हें अपनी धार्मिक यात्राएं जैसे कांवड़ यात्रा या कलश यात्रा निकालने के लिए हमेशा पुलिस प्रशासन की मदद लेनी पड़ती है क्योंकि बहुसंख्यक समुदाय द्वारा इसमें व्यवधान डाला जाता है। ग्रामीणों को डर है कि घर में नमाज के बहाने धीरे-धीरे इसे स्थायी धार्मिक स्थल में बदल दिया जाएगा, जिससे भविष्य में उनके लिए पलायन की स्थिति बन सकती है।

Editorial team:
Production team:

More videos with Keshav Malan as Anchor/Reporter