कैसा होगा कि कोई शहर जितनी इलेक्ट्रिसिटी यूज करे, उसका एक बड़ा चंक ख़ुद ही प्रोड्यूस करने लगे और इसके लिए ना उसे बड़े बड़े पॉवर प्लांट ना लगाने पड़ें और ना ही कोई बड़े हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स सेट अप करना पड़े। इन फैक्ट बिजली बनाने के लिए उसे कहीं ज़मीन तक ना खरीदनी पड़े?
आप सोच रहे होंगे कि ये कैसे पॉसिबल है, लेकिन ये संभव कर दिखाया है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने। लखनऊ ने अपनी डिमांड की लगभग 15% इलेक्ट्रिसिटी सोलर से जेनेरेट करना शुरू कर दिया है। पीएम सूर्यघर योजना के चलते अब तक लखनऊ के 1 लाख 11 हज़ार घरों में सोलर पॉवर प्लांट्स इंस्टॉल हो गए हैं।
इनकी टोटल जनरेशन कैपेसिटी है 384 मेगावॉट्स। और लखनऊ की एवरेज पॉवर डिमांड 1500 मेगावॉट्स के आसपास रहती है। ऐसे में सोलर पैनल्स दिन के कम से कम 12 घंटे इस इलेक्ट्रिसिटी डिमांड का 26-27% पूरा करते हैं। 24 घंटे सप्लाई को भी लें ले तो ये टोटल सप्लाई का 14-15% होता है।
और लखनऊ में इसके लिए कोई न्या पॉवर प्लांट नहीं लगा है ना लखनऊ के पास कोई बाँध बना है, बल्कि लखनऊ में घरों की छतों पर ये सारे सोलर पैनल्स इंस्टॉल हैं, और ये मिल कर इतनी पॉवर जनरेट कर रहे हैं। और ये इसलिए संभव हुआ है क्योंकि केंद्र सरकार की पीएम सूर्यघर योजना को योगी सरकार ने बेहद एफ़िशिएंटली डिप्लॉय किया है।
इन फैक्ट लखनऊ देश इस मामले में देश का टॉप परफॉर्मर है। द प्रिंट ने हाल ही में एक रिपोर्ट की थी जिसमें बताया गया था कि लखनऊ ने अब सूरत को भी देश की सोलर कैपिटल के रूप में पीछे छोड़ दिया है। लेकिन सिर्फ़ लखनऊ ही नहीं बल्कि योगी सरकार ने इस योजना को काफ़ी अग्रेसीवाली पूरे प्रदेश में पुश किया है।
इसके तहत यूपी मे 2000 मेगावाट से ज्यादा इलेक्ट्रिसिटी कैपेसिटी इंस्टॉल हो चुकी है, यानी सोचिए कि यूपी की छतों पर बड़े बड़े पॉवर प्लांट्स जैसी इलेक्ट्रिसिटी कैपेसिटी इनस्टॉल है। लेकिन ये काम ऐसे ही नहीं पॉसिबल हुआ है बल्कि योगी सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर इसके लिए लिए ₹3900 करोड़ से ज़्यादा की सब्सिडी दी है।
लखनऊ के साथ ही यूपी के बाक़ी शहर जैसे कानपुर और वाराणसी में भी 100 मेगावॉट से ज़्यादा सोलर इंस्टॉलेशंस हुए हैं। आगरा और बरेली में ये आँकड़ा भी काफ़ी बड़ा है। यानी बिना कोई ज़मीन ख़रीदे और बिना कहीं फाइल घुमाए यूपी की योगी सरकार ने 2000 मेगावाट से ज्यादा की कैपेसिटी इंस्टॉल कर दी है।






