6 जून को जंतर-मंतर पर होने वाले कथित छात्र प्रदर्शन से ठीक पहले, देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों, IIT दिल्ली और JNU (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय), से एक चौंकाने वाली ग्राउंड रिपोर्ट सामने आई है। ऋतिका चंदोला की इस ग्राउंड रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि देश का जागरूक युवा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को एक वास्तविक छात्र आंदोलन मानने के बजाय सिर्फ इंस्टाग्राम का शोर और विदेशी एजेंडे का हिस्सा मान रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:
- इंस्टाग्राम हाइप और विदेशी फंडिंग का सच: ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान IIT और JNU के कई छात्रों ने स्वीकार किया कि उन्होंने इस कथित पार्टी (CJP) का नाम पहली बार इंस्टाग्राम पर देखा था। लेकिन जैसे ही छात्रों के सामने इसके पीछे सक्रिय विदेशी चंदे (Foreign Funding) और बाहरी ताकतों के हाथ होने की बात आई, छात्र हैरान रह गए। छात्रों का साफ कहना है कि विदेशों में बैठकर कुछ लोग सोशल मीडिया पर सिर्फ इंगेजमेंट और ‘लाइक-शेयर’ बटोरने के लिए भारतीय छात्रों की भावनाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
- NEET पेपर लीक पर गुस्सा, ‘नौटंकी’ से दूरी: रिपोर्ट में शामिल छात्रों ने NEET पेपर लीक मामले को बेहद गंभीर और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बताया। उन्होंने दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई और सिस्टम में सुधार की मांग की। हालांकि, छात्रों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे पेपर लीक के मुद्दे पर गंभीर हैं, लेकिन वे CJP की ‘राजनीतिक नौटंकी’ और ड्रामे का हिस्सा कतई नहीं बनने वाले हैं।
- आंदोलन का राजनीतिकरण: जागरूक युवाओं ने चिंता जताई कि आम आदमी पार्टी (AAP) जैसी राजनीतिक पार्टियां अपने फायदे के लिए CJP जैसे तथाकथित आंदोलनों को हवा दे रही हैं। छात्रों का मानना है कि इस राजनीतिक खींचतान के कारण छात्रों का मूल मुद्दा भटक जाता है।
- जमीन पर सन्नाटा: सोशल मीडिया पर भले ही 6 जून के प्रोटेस्ट को लेकर कितना ही बड़ा दावा क्यों न किया जा रहा हो, लेकिन देश की छात्र राजनीति के गढ़ माने जाने वाले JNU और IIT दिल्ली के कैंपस में इस आंदोलन को लेकर कोई उत्साह या तैयारी नहीं दिखी। जमीनी स्तर पर सिर्फ सन्नाटा पसरा है।
इस विशेष ग्राउंड रिपोर्ट से यह सन्देश मिला है कि देश के मेधावी और जागरूक छात्र NEET पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या के समाधान के पक्ष में तो हैं, लेकिन वे सोशल मीडिया पर रचे जा रहे किसी भी ‘विदेशी पीआर स्टंट’ या राजनीतिक एजेंडे का मोहरा बनने को तैयार नहीं हैं।



