आंदोलन जब तक सुधार के लिए हो, तब तक वह क्रांति है। लेकिन जब वह सिर्फ विरोध के लिए हो, तो वह महज़ एक पेशा बन जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिन लोगों को ‘आंदोलनजीवी’ नाम दिया था, वह जमात एक बार फिर सक्रिय हो चुकी है।
इसका जरिया बना है नीट (NEET) पेपर लीक का मुद्दा और मोहरा बनी है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)। बात करते हैं 6 जून की, जब CJP के कर्ता-धर्ता अभिजीत दिपके सीधे अमेरिका से दिल्ली लैंड करते हैं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने। कैमरे चमके, तो कुछ सुर्खियां बनीं।
इसके बाद अभिजीत बाबू पुणे, बेंगलुरु, लखनऊ और जयपुर घूमे, पर वहां उतनी कवरेज नहीं मिली। इसलिए 20 जून से उन्होंने दोबारा जंतर-मंतर पर डेरा जमा लिया।
इस प्रदर्शन का एक जाना-पहचाना चेहरा बने हैं सोनम वांगचुक, जो कुछ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। इन आंदोलनजीवी का रिकॉर्ड तो देखिए, पिछले साल लद्दाख में अनशन किया, भगवान राम पर विवादित टिप्पणी की और शांतिपूर्ण लद्दाख में इनके चलते हिंसा भड़की।
इन पर एनएसए (NSA) लगा, जोधपुर जेल में 6 महीने काटे। इतना ही नहीं, सोनम वांगचुक की संस्था एचआईएएल (HIAL) की फंडिंग में गड़बड़ियां मिलीं और इन्हीं की संस्था सेकपोल (SECMOL) का एफसीआरए (FCRA) रजिस्ट्रेशन तक रद्द हो चुका है।
अब जहां सरकार विरोधी प्रदर्शन हो, वहां विफल राजनीतिज्ञ योगेंद्र यादव न पहुंचें, ऐसा कैसे हो सकता है? जंतर-मंतर का आकार छोटा होने को वे लोकतंत्र का सिकुड़ना बता रहे हैं। इनका रिकॉर्ड तो सब जानते ही हैं, शाहीन बाग, किसान आंदोलन, भारत जोड़ो यात्रा, हर जगह हाजिरी।
ज्ञानवापी पर हिंदुओं को धमकी देने वाले यादव जी यहां भी पहुंच गए। इनके साथ आईं कम्युनिस्टों की दीदी वृंदा करात। वही वृंदा करात, जिन्हें 2023 में पहलवानों ने अपने मंच से भगा दिया था। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का बहिष्कार करने वाली दीदी, आज छात्रों की हमदर्द बन रही हैं।
अब बात करते हैं कोर्ट से फटकार खाने वाले वकील प्रशांत भूषण की, जो सीएए (CAA) प्रदर्शनों के मास्टरमाइंड रहे हैं। वे वहां शायद ट्यूशन देने गए हैं कि हिंसा भड़काने की प्लानिंग कैसे की जाती है।
उधर, बंगाल में डूबती टीएमसी (TMC) नेता सागरिका घोष, लाइमलाइट के लिए CJP के मंच पर आ गईं। और हद तो दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विजेंद्र चौहान ने कर दी। नीट (NEET) के मुद्दे पर बात करने आए थे, पर मंच से निकोबार का राग अलापने लगे। ये वही प्रोफेसर हैं जिनका अजीबोगरीब दावा है कि चैटजीपीटी (ChatGPT) को भी सवर्ण हिंदुओं ने ट्रेन किया है और वह जातिवादी है।
इस पूरे प्रोटेस्ट में अंजलि भारद्वाज, एम.ए. बेबी, अभिनय सर जैसे लोगों की पूरी मंडली जुटी है। इनका मकसद नीट (NEET) के छात्रों की भलाई नहीं, बल्कि मोदी विरोध की आड़ में कन्हैया कुमार की तरह अपनी राजनीति चमकाना है।
CJP के हाईकमान का पास्ट रिकॉर्ड खंगालिए, इनका जुड़ाव दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के मास्टरमाइंड उमर खालिद से लेकर आम आदमी पार्टी तक रहा है। यही वजह है कि जंतर-मंतर से आज जातिवाद और प्रोपेगैंडा फैलाया जा रहा है। नीट (NEET) पर बात जरूर होनी चाहिए, लेकिन नफरत फैलाने के लिए नहीं, समाधान के लिए।
छात्रों के नाम पर चल रहे इस आंदोलनजीवी पेशे पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।




