उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 2027 के विधानसभा चुनाव की चर्चा अभी से तेज़ होती दिखाई दे रही है। इस बीच OpIndia की टीम ने लखनऊ पहुंचकर विधानसभा रोड पर लोगों से बातचीत की, जहाँ भाजपा, समाजवादी पार्टी और विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली।
समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव फूलचंद यादव ने दावा किया कि प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती बढ़ गई है और किसानों को डीज़ल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार की ऊर्जा नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि खेती-किसानी के मौसम में किसानों को पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
फूलचंद यादव ने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई और ईंधन संकट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं। उनका आरोप था कि रूस और ईरान से तेल खरीदने के बजाय अन्य देशों पर निर्भरता बढ़ाने के कारण हालात बिगड़े हैं।
सपा के इन आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा समर्थकों ने कहा कि जनता नहीं, बल्कि विपक्ष परेशान है। उनका कहना था कि वैश्विक परिस्थितियों का असर भारत पर भी पड़ रहा है और ऐसे समय में सरकार हालात को संभालने का पूरा प्रयास कर रही है।
एक भाजपा समर्थक ने कहा कि विपक्ष हर समस्या के लिए सरकार को दोषी ठहराता है, जबकि दुनिया भर में आर्थिक चुनौतियाँ मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं बेहतर हुई है।
योगी के हाथों में सुरक्षित उत्तर प्रदेश, उन्हें बनाएंगे प्रधानमंत्री
बहस के दौरान एक स्थानीय निवासी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सुरक्षित हाथों में है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि भविष्य में देश का प्रधानमंत्री भी योगी आदित्यनाथ को बनना चाहिए। इस बयान का समर्थन करते हुए कई भाजपा समर्थकों ने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में अपराध पर नियंत्रण हुआ है और आम लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है।
एक भाजपा समर्थक ने दावा किया कि सपा सरकार के समय प्रदेश में बिजली की भारी समस्या थी और गाँवों की हालत खराब थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की है, जबकि आज गाँव-गाँव तक बिजली पहुँच चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि योगी सरकार के दौरान अपराधियों पर सख्त कार्रवाई हुई है और पहले की तुलना में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है। समर्थकों ने योगी आदित्यनाथ के नौ साल के कार्यकाल को ‘100 में से 100 नंबर’ देने की बात भी कही।
जब एक मुस्लिम निकला योगी का जबरा फैन
बहस का सबसे चर्चित हिस्सा तब सामने आया जब हरदोई से आए एक मुस्लिम वक्ता अली ने समाजवादी पार्टी की मुस्लिम राजनीति पर सवाल खड़े किए। अली ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने वर्षों तक मुसलमानों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। उन्होंने पूछा कि यदि पार्टी वास्तव में मुसलमानों के हितों की बात करती है, तो किसी मुस्लिम नेता को शीर्ष नेतृत्व में जगह क्यों नहीं देती?
योगी सरकार द्वारा सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर लगाई गई रोक को लेकर अली ने कहा कि इस्लाम किसी दूसरे व्यक्ति को परेशान करके इबादत करने की अनुमति नहीं देता। उनके अनुसार, नमाज़ मस्जिद या घर के भीतर ही पढ़ी जानी चाहिए। इसके साथ ही अली ने योगी सरकार की बुलडोज़र कार्रवाई पर भी अपना पूरा समर्थन जताया।
आपको बता दें कि पंचायत चुनाव टलने और मौजूदा प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले के बाद यूपी में विधानसभा चुनावों की चर्चा अब और तेज़ हो गई है। माना जा रहा है कि प्रधानों को प्रशासक बनाने का यह मुद्दा आगामी चुनावों में एक बड़ी बहस का हिस्सा बन सकता है।





