नोएडा हुआ इंटरनेशनल एयरपोर्ट तो रोने लगे समाजवादी पार्टी के ट्विटरबाज, कहा कैब का बहुत किराया है

Summary
नोएडा को अपना अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मिल गया है, लेकिन राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही। दूरी से लेकर क्रेडिट लेने तक, जानिए कैसे विकास के इस महाकुंभ में 'असुर' रूपी बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।

सतयुग में जब ऋषि यज्ञ किया करते थे तो उसमें असुर आकर व्यवधान पैदा करते थे, युग भले ही बदल गया हो लेकिन आज भी वैसी शक्तियाँ मौजूद हैं। कल यानी 28 मार्च 2026 को नोएडा को अपना अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मिल गया। पीएम मोदी और सीएम योगी ने इसका लोकार्पण कर दिया। 

ये यूपी का तीसरा अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है और इससे अब विकास के रास्ते खुलेंगे। लेकिन इस मौके पर भी नोएडा के ख़िलाफ़ रोना-धोना किया जाने लगा। कोई इमैजनरी किराए पर चिल्लाया तो किसी ने इसका क्रेडिट लेने की कोशिश की। कोई इसके एस्थेटिक्स पर बिफर गया। 

इस रोने धोने में सबसे आगे एज यूजुअल सपाई रहे। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने दुखड़ा रोया कि देखो ये दिल्ली से कितना दूर है, इसका कैब का किराया कितना ज्यादा है! अरे भाई मेरे, एयरपोर्ट शहर के बीचोबीच तो बनते नहीं हैं! उन्हें जगह की जरूरत होती है, इसलिए दूर बनते हैं। 

और जहाँ से दूरी नापी जा रही है, वहाँ से तो दिल्ली का IGI एयरपोर्ट मात्र 24 किलोमीटर है, लोग उसे क्यों नहीं यूज करेंगे। नोएडा के एयरपोर्ट का पर्पस दूसरा है, उसके यूजर दूसरे हैं। और वो सब छोड़िए बेंगलूरु का एयरपोर्ट शहर से इतना दूर है कि उसको लेकर जोक्स बनते हैं। 

बेंगलूरु की ही इलेक्ट्रानिक सिटी से ये लगभग 60 किलोमीटर दूर है, इतना दूर है कि यहाँ जाने के लिए विशेष रेलवे लाइन बनाई गई थी। नोएडा एयरपोर्ट अभी बना है, वो यमुना एक्सप्रेसवे से पहले से जुड़ा है, बाक़ी RRTS जैसी सुविधाओं से भी जुड़ जाएगा। सपाई संतोष रख सकते हैं। 

संतोष रखना लेकिन सपाइयों के बस का नहीं है। एक तरफ़ जहाँ वो इस प्रोजेक्ट पर सवाल उठा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ क्रेडिट भी लेना चाह रहे हैं। समाजवादी पार्टी का ये ट्वीट देखिए।  हमने आपको पिछले वीडियो में बताया था कि समाजवादी पार्टी इस एयरपोर्ट को आगरा और फिरोजाबाद ले जा रही थी।

कहानी यहीं नहीं ख़त्म होती है बल्कि कुछ ऐसे हैंडल्स हैं जो नोएडा एयरपोर्ट के बहाने रीट्वीट खाने को रेज बेट कर रहे हैं। पहले से बने एयरपोर्ट को ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट से कंपेयर कर रहे हैं। 

यानी वर्षों तक ज़मीन बंजर पड़ी रहे, वर्षों तक फ़ाइल धूल खाती रहे, वर्षों तक उसे अपने वोटबैंक वाले इलाके में लेने के प्रयास हों, तब कोई कुछ नहीं बोलता। जब योगी सरकार ने इसे समयसीमा में बना दिया तो अब सबके दुख फूट रहे हैं, फूटना जरूरी भी है, जब यूपी आगे बढ़ेगा तो ऐसे बहुत से लोग बिलबिलाएँगे

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