दौलत राम कॉलेज की साराह शर्मा

DU Youth Parliament Controversy: क्या सच में स्लीवलेस कपड़ों पर रोका गया?

Summary
दिल्ली यूनिवर्सिटी की साराह शर्मा के Viral Video में लगाए गए स्लीवलेस कपड़ों वाले आरोपों की पड़ताल। Youth Parliament Event, Stage Entry, Facilitation और Viral Narrative के पीछे का दूसरा पक्ष।

साराह शर्मा का ये वीडियो देखा? इससे एक पुरानी कहावत याद आती है — जब तक सच अपने जूते पहनता है, तब तक झूठ आधी दुनिया का चक्कर काट लेता है।

इन दिनों आपने दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलत राम कॉलेज की साराह शर्मा का वायरल वीडियो तो ज़रूर देखा होगा, जहाँ वो कह रही है कि सिर्फ अपने स्लीवलेस कपड़ों की वजह से उसे Ministry of Youth Affairs के एक All Women’s Youth Parliament Event में स्टेज पर जाने से रोका गया और Guests को Facilitate करने से भी मना कर दिया गया, क्योंकि उसने स्लीवलेस कपड़े पहने थे।

साराह की ख़ुद की वीडियो तो वायरल हुई ही, उसे BRUT, More Of Everything, Lallantop जैसे लिबरल मिस्त्रियों के बनाए गए लोकतंत्र के चौथे खंभे ने बिना कहानी का दूसरा Opinion जाने, एकतरफ़ा रिपोर्टिंग करते हुए एक पक्ष को Victim और सरकार को दोषी ठहरा दिया।

और तो और, अब इस News को हवा देने के लिए BBC भी तैयार खड़ी हो जाएगी, जिसने अभी कुछ ही महीने पहले मुस्लिमों को कमरा न मिलने के नाम पर एक Gafira नाम की Victim खड़ी की थी और हमने उसका भी Fact Check कर दिया था।

ख़ैर, अब आते हैं साराह के Allegations पर।

Allegation नंबर 1

सुनो सोशल मीडिया वालों,

‘मैं अपनी स्लीवलेस सूट की कसम खाकर कहती हूँ कि इन Ministry वालों ने मुझे स्टेज पर जाने से रोक दिया।’

लेकिन… सबूत तो कुछ और ही कहते हैं!

आप इन Photos को देखिए। ये इसी Program की हैं।

इसमें तो आप ही हैं ना, सारा जी! आप 1 नहीं बल्कि 2-2 बार उसी स्लीवलेस कपड़ों में बतौर Union Minister Of Women And Child Development बनकर 2-3 मिनट भाषण तक देने के लिए स्टेज पर गईं। और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर इस Youth Parliament में Resolution पेश करने के लिए फिर से स्टेज पर गईं।

यानी पहला Allegation ही Fail हो गया, क्योंकि अगर किसी को आपके स्लीवलेस कपड़ों से दिक्कत होती, तो भला वो आपको स्टेज पर पहले ही क्यों चढ़ने देते? ख़ैर, आते हैं दूसरे Allegation पर।

देखो दुनिया वालों,

अब इस सरकार को हमारे स्लीवलेस कपड़ों से भी दिक्कत हो रही है।

लेकिन अगर साराह को दिख पाता, तो शायद वो देख लेतीं कि उसी Parliament में स्लीवलेस साड़ी पहने दूसरी लड़कियाँ भी मौजूद थीं, मगर उन्हें न किसी ने रोका, न टोका। यहाँ तक कि हिजाब पहने 4-5 महिला Speakers भी उसी Parliament का हिस्सा थीं।

मगर लेफ्ट मीडिया इस Narrative को कबाड़ के बाज़ार में बेचना चाह रहा है कि सरकार को सबसे दिक्कत है। यानी सरकार Progressive नहीं है!

Allegation नंबर 3

समझो Gen Z वालों,

‘मुझे मेरे कपड़ों की वजह से Guests को Facilitate करने से रोका गया।’

इस दावे की पोल खोलने के लिए कुछ गवाह भी हैं, जो वहाँ मौजूद थे और बताते हैं कि एक दूसरी Participant उसके पास आती है और Guests को Facilitate करने का मौका मांगती है, क्योंकि साराह शर्मा पहले ही दो बार स्टेज पर जा चुकी थीं।

जब साथी Participant ने साराह से Facilitate करने का मौका मांगा, तो साराह ने खुशी-खुशी हामी भर दी और फिर घर आकर वही Victim Card खेल दिया और स्लीवलेस क्रांति ला दी!

और मैंने आपको ये Facts बताए, तो ये देखिए कि Program में मौजूद एक लड़की ने सारा की पोस्ट पर ही पूरी सच्चाई बयान कर दी। उसे आप इस Comment में पढ़ सकते हैं। मैंने आपको जितनी भी Info दी है, वो इस कॉलेज से जुड़े लोगों से इकट्ठा की गई है। In Fact, इनमें से कई लोग तो इस Event से जुड़े थे।

लेकिन सच्चाई कुछ भी हो, सारा का सारा झूठ खूब बिका। और फैलाने वालों में वो Trinamool Congress भी है, जिसके नेता शाहजहाँ शेख पर बंगाल के संदेशखाली में मासूम औरतों का अपनी ही पार्टी ऑफिस में रेप करने का आरोप लगा हो।

वैसे इस पूरे मामले में एक पॉइंट और भी है। मैंने जब थोड़ी बहुत खोजबीन की, तो पता चला कि सिर्फ तृणमूल ही नहीं, बल्कि लेफ्टिस्ट स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन SFI DRC भी इस पूरे मामले को हवा दे रहा है।

और इसके बाद मुझे इस पूरे Incident से याद आया कि कुछ दिनों पहले ही DU की एक लड़की ने अपने एक प्रोफेसर पर Sexual Harassment का आरोप लगाया था।

उसकी भी अपनी आपबीती बताने वाली वीडियो बहुत वायरल हुई थी, लेकिन बाद में पता चला कि मामला कुछ दूसरा था। पुलिस ने सारे आरोप झूठे पाए और यहाँ तक कि उसकी Family ने भी लड़की की ही गलती मानी।

एक और Incident केरल में हुआ, जहाँ एक Influencer ने Reach के लिए एक आदमी पर Bus में छेड़छाड़ का आरोप लगा दिया था।

दोनों Cases में ऐसा लगा कि सब कुछ Publicity के लिए किया गया है। अब सारा वाला मामला भी कुछ ऐसा ही दिखाई पड़ रहा है, जहाँ सब कुछ ठीक-ठाक होने के बाद भी Victim बना जा रहा है और यूनिवर्सिटी के साथ ही सरकार को Defame करने का प्रयास हो रहा है, जबकि यहाँ मौजूद बाकी लोग मामले का दूसरा Angle बता रहे हैं।

यार! Publicity के आजकल तो 1000 रास्ते हैं। कोई दूसरा तरीका अपनाओ, ये Victim Card क्यों खेलना?

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