पश्चिम बंगाल में इस बार ईद-उल-अजहा (बकरीद) का आयोजन कई मायनों में चर्चा का विषय बन गया। राजधानी कोलकाता में दशकों पुरानी परंपरा टूट गई और पहली बार रेड रोड पर सामूहिक नमाज अदा नहीं की गई। इसके बजाय प्रशासन की अनुमति से नमाज का आयोजन ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में कराया गया। राज्य सरकार के इस फैसले को कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बकरीद के दिन सामने आई तस्वीरों में रेड रोड पूरी तरह यातायात के लिए खुली दिखाई दी। आमतौर पर इस मार्ग पर हजारों लोग एकत्र होकर नमाज अदा करते थे, जिसके चलते कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहता था। इस बार ऐसा कोई दृश्य देखने को नहीं मिला।
सरकार ने पहले ही जारी कर दिए थे स्पष्ट निर्देश
बकरीद से पहले राज्य प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि सार्वजनिक सड़कों पर सामूहिक नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का तर्क था कि सड़कों पर धार्मिक आयोजन होने से आम लोगों को असुविधा होती है और यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।
सरकार ने सभी धार्मिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया था कि नमाज केवल निर्धारित और स्वीकृत स्थानों पर ही आयोजित की जाए। इसके बाद कोलकाता सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की।
1919 से जुड़ा है रेड रोड की नमाज का इतिहास
जानकारों के अनुसार, कोलकाता की रेड रोड पर ईद की सामूहिक नमाज का इतिहास एक सदी से भी अधिक पुराना है। बताया जाता है कि वर्ष 1919 में पहली बार यहां नमाज आयोजित की गई थी। उससे पहले नमाज का आयोजन शहीद मीनार मैदान में होता था, लेकिन जलभराव की समस्या के कारण आयोजन रेड रोड स्थानांतरित कर दिया गया था।
इसके बाद कई दशकों तक रेड रोड पर ही बड़ी संख्या में लोग ईद की नमाज अदा करते रहे। इस वर्ष पहली बार यह परंपरा बदली गई और आयोजन ब्रिगेड परेड ग्राउंड में किया गया।
कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारी
बकरीद के अवसर पर पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी गई। कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद ने सफल आयोजन के बाद पुलिसकर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि उनके अनुशासन, समर्पण और पेशेवर कार्यशैली के कारण त्योहार शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। उन्होंने पुलिस बल को बेहतर समन्वय और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बधाई भी दी।
बदलते बंगाल की नई तस्वीर?
रेड रोड पर नमाज न होने और वैकल्पिक स्थान पर व्यवस्थित आयोजन को लेकर पूरे देश में चर्चा हो रही है। समर्थकों का कहना है कि इससे आम नागरिकों की सुविधा और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश दिखाई देती है।
फिलहाल इतना तय है कि वर्ष 2026 की बकरीद पश्चिम बंगाल के इतिहास में उस अवसर के रूप में दर्ज की जाएगी, जब कोलकाता की प्रतिष्ठित रेड रोड पर दशकों पुरानी परंपरा में बदलाव देखने को मिला और प्रशासन ने सार्वजनिक सड़कों के बजाय निर्धारित स्थानों पर धार्मिक आयोजन कराने की नीति को लागू किया।





