भारत और UK के बीच आज जब FTA ऑपरेशनलाइज हुआ है तो मुझे साल 1701 में ब्रिटेन में पास हुआ एक कानून याद आ गया। साल 1701 में ब्रिटेन में कैलिको एक्ट नाम का एक क़ानून पास हुआ। इस कानून का उद्देश्य था कि भारत और फ़ारस जैसे देशों से आने वाले कपड़ों पर बैन लगा दिया जाए ताकि ब्रिटेन में बनने वाले कपड़े ज़्यादा बिकें।
1701 और 1721 में आए क़ानूनों के चलते ब्रिटेन में भारत में बने कपड़े मंगवाना तो दूर बल्कि पहनना भी ग़ैर कानूनी हो गया और इसका असर ये हुआ कि भारत में अच्छे से अच्छा कपड़ा बुनने वाले बुनकर बेरोजगार हो गए, उनकी छपाई करने वाले खेतों में मजदूरी करने लगे, उनका व्यापार करने वाले कारोबारी कंगाल हो गए।
अंग्रेज़ों ने सिर्फ़ यही नहीं किया बल्कि अपनी मिलों में बना कपड़ा भी भारत में डंप किया। उन्होंने बाद में भारत की मिलों में बने कपड़े पर भी ऊँची इंपोर्ट ड्यूटी लगाई और भारतीय प्रोडक्ट्स को अपने मार्केट का एक्सेस पूरी तरह से बंद कर दिया। ये कानून पूरी तरह से एकतरफा थे लेकिन इसलिए चल रहे थे क्योंकि भारत तब ग़ुलाम था।
फिर 1947 में हम आजाद हो गए और आज हम UK के बराबर की इकॉनमी हैं। जो अंग्रेज़ कभी अपने मार्केट में हमारे प्रोडक्ट्स को एंटर नहीं करने देते थे आज उनके बाजार में भारत से गए 100% प्रोडक्ट्स पर कोई कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। चाहे तमिलनाडु में बना कोई कपड़ा हो या खाने पीने के सामान, सब कुछ UK के बाजार में बिना किसी एडिशनल टैक्स के बिकेगा।
जिन अंग्रेज़ों की वजह से कभी हमारे उद्योग धंधे बर्बाद हुए थे आज उनकी ही वजह से तेजी से बढ़ेंगे। आज ना कोई कैलको एक्ट हमें रोक पाएगा और ना ही आज किसी के इतनी हिम्मत है कि हमें कालोनाइज कर पाए। यानी मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक FTA ने लगभग 300 साल बाद पांसा फिर पूरी तरह पलट दिया है।





