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हरिवंश पुराण की अनोखी कथा: जानिए क्या है 12 आदित्यों की उत्पत्ति और सुदर्शन चक्र का संबंध

Summary

विष्णु भगवान के सुदर्शन चक्र की शक्ति के बारे में तो हम सब जानते हैं कि कैसे सुदर्शन चक्र किसी भी युद्ध में कभी निष्फल नहीं जाता। पर क्या आप यह जानते हैं कि इस सुदर्शन चक्र को बनाने वाले कौन थे? और उन्होंने यह सुदर्शन चक्र कब और कैसे बनाया?

विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र त्वष्टा ऋषि ने बनाया था और ये त्वष्टा ऋषि सूर्यदेव के श्वसुर थे। त्वष्टा ऋषि की पुत्री संज्ञा से सूर्यदेव का विवाह हुआ था।

हरिवंश पुराण के अनुसार, सूर्यदेव को सही से गोलाकार देकर उन्हें सुन्दर बनाने वाले त्वष्टा ऋषि ही थे। उन्होंने सूर्यदेव के शरीर के आवश्यकता से अधिक तेज को खरादा और सूर्यदेव को सुरूप व तिरछे आकार से गोल बनाया। यह कुछ वैसा ही है, जैसे आज के समय में Lathe Machine से टर्निंग प्रोसेस किया जाता है। खरादते समय जो अवशेष यानी कि Residue Parts मिले, उनसे त्वष्टा ऋषि ने विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र बनाया।

सूर्यदेव के मुख के रंग को भी उन्होंने सुन्दर सा रक्तवर्ण का रंग दिया और इसी चेहरे के रंग यानी कि मुखराग से 12 आदित्य उत्पन्न हुए—धाता, अर्यमा, मित्र, वरुण, अंश, भग, इन्द्र, विवस्वान, पूषा, पर्जन्य, त्वष्टा और विष्णु। चूँकि सूर्य स्वयं कश्यप ऋषि और अदिति के गर्भ से जन्मे थे, इसलिए वे स्वयं भी आदित्य कहे जाते हैं।

तो ये त्वष्टा ऋषि अत्यंत कुशल थे। वे देवों और भगवान के आर्टिसन, शिल्पी, वास्तुकार या आर्किटेक्ट और क्राफ्ट्समैन तो थे ही, साथ ही तरह-तरह के शस्त्र बनाने में भी उनकी महारथ थी। यानी कि वे एक गज़ब के आर्मरर और वेपन्स इंजीनियर थे, जिन्होंने एक से एक महान शस्त्र बनाए। विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र, इन्द्र देव का वज्रास्त्र और बृहस्पति की शक्तिशाली कुल्हाड़ी बनाने का श्रेय भी इन्हीं को जाता है।

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