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पहले नेम प्लेट विवाद, अब आयुष मलिक का कन्वर्जन, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा कट्टरपंथी नेटवर्क?

Summary
यशवीर महाराज का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ती कट्टरपंथी सोच के पीछे अवैध रूप से संचालित मदरसों और तब्लीगी जमात की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

वर्ष 2023 में प्रतिबंधित संगठन पीएफआई से जुड़े कथित दस्तावेजों में वर्ष 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की योजना का षड्यंत्र सामने आया था। उस समय बड़ी संख्या में लोगों ने इसे असंभव कल्पना मानकर नजरअंदाज कर दिया था। लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही कट्टरपंथ और धर्मांतरण से जुड़ी घटनाओं ने इस बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।

आमतौर पर जम्मू-कश्मीर, केरल, पश्चिम बंगाल या असम का नाम इन चर्चाओं में लिया जाता है, लेकिन अब सवाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लेकर भी उठ रहे हैं। यह वही इलाका है जहां हिंदू बहुसंख्यक आबादी है और पिछले नौ वर्षों से योगी आदित्यनाथ की सरकार सत्ता में है। इन्हीं चिंताओं को लेकर मुजफ्फरनगर निवासी यशवीर महाराज से विशेष बातचीत की गई।

क्या था नेम प्लेट विवाद?

कांवड़ यात्रा के दौरान सामने आया नेम प्लेट विवाद करोड़ों हिंदुओं के बीच चर्चा का विषय बन गया था। मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इसके बाद सवाल उठने लगे कि आखिर कुछ लोग अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर व्यापार क्यों कर रहे हैं? क्या यह केवल व्यवसायिक कारण है या इसके पीछे कोई संगठित सोच भी काम कर रही है?

इस व्यापार जिहाद के खिलाफ में यशवीर महाराज ने जब आवाज उठाई तो दुकानदारों ने दुकान के सामने मालिक का नाम लिखना शुरू किया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा तो उन्होंने इसकी अनिवार्यता पर रोक लगा दी। इसे लेकर आज भी यशवीर महाराज लोगों को जागरुक कर रहे हैं।

जाट बेल्ट में आयुष मलिक के धर्मांतरण ने सभी को चौंकाया

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जाटों का गढ़ माना जाता है। इतिहास गवाह है कि जाटों ने मुगल आक्रांताओं के खिलाफ संघर्ष किया था। ऐसे क्षेत्र से सामने आया आयुष मलिक धर्मांतरण प्रकरण कई लोगों को झकझोर गया।

परिवार का आरोप है कि आयुष को प्रेमजाल में फंसाकर उसका धर्मांतरण कराया गया। यशवीर महाराज का कहना है कि शुरुआती दौर में यह मामला सामान्य प्रेम प्रसंग जैसा प्रतीत हुआ, लेकिन बाद में सामने आए तथ्यों ने इसे एक बड़े षड्यंत्र की शक्ल दे दी। हालांकि, दूसरे पक्ष का कहना है कि धर्म परिवर्तन व्यक्ति की अपनी इच्छा से हुआ था।

आयुष के बयान पर पिता देवराज मलिक का कहना है कि बेटे का ब्रेनवॉश इस तरह से किया गया है कि वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठा है। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई कि अब उसकी काउंसलिंग कराई जानी चाहिए।

करोंड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए चांदनी कुरैशी ने फंसाया

आयुष के परिवार और यशवीर महाराज का आरोप है कि चांदनी कुरैशी ने प्रेम संबंधों का सहारा लेकर आयुष को अपने प्रभाव में लिया। परिवार का दावा है कि अश्लील वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल किया गया और धर्म परिवर्तन के लिए मानसिक दबाव बनाया गया।

पिता और यशवीर महाराज का यहां तक आरोप है कि चांदनी कुरैशी ने करोंड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए आयुष को अपने प्रेमजाल में फंसाया था और इसके पीछी एक पूरा गिरोह है जो चांदनी का साथ दे रहा है।

अवैध मदरसे और तब्लीगी जमात पर लगे बैन- यशवीर महाराज

यशवीर महाराज का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ती कट्टरपंथी सोच के पीछे अवैध रूप से संचालित मदरसों और तब्लीगी जमात की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि कोई संस्था कानून और संविधान के विरुद्ध कार्य करती पाई जाती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

इसी संदर्भ में वर्ष 2021 में योगी सरकार द्वारा देवबंद में एटीएस सेंटर स्थापित करने का निर्णय भी चर्चा में रहा था। उस समय दारुल उलूम देवबंद और समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं ने इसका विरोध किया था। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया था। अब सवाल यह कि आखिर जिस पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जाटों का गढ़ माना जाता है। वह आज इस्लामिक कट्टरपंथियों के गतिविधियों का केन्द्र क्यों बन रहा है?

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