महाराष्ट्र के नासिक में TCS कंपनी में हिंदू युवतियों के शोषण और धर्मांतरण की साजिशों के बीच सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी कंपनियों के वर्क कल्चर को लेकर चर्चा हो रही है। इस बीच चश्मे बनाने वाली कंपनी लेंसकार्ट के ‘हिंदू विरोधी नियमों’ को भी लताड़ लगाई जाने लगी है।
दरअसल हाल ही में लेंस्कार्ट का एक डॉक्यूमेंट वायरल हुआ, डॉक्यूमेंट में लिखा हुआ था कि लेंस्कार्ट में काम करने वाले हिजाब तो पहन सकते हैं लेकिन वो कलावा नहीं बाँध सकते, हिंदू महिलाएँ बिंदी नहीं लगा सकतीं, सिंदूर को लेकर भी टर्म्स एंड कंडीशन रख दी गई।
जैसे ही डॉक्यूमेंट वायरल हुआ, वैसे ही लेंस्कार्ट पर सवाल उठने लगे! क्या लेंस्कार्ट सही में एंटी हिंदू प्रैक्टिसेज फ़ॉलो कर रही है , ये जानने के लिए Opindia लेंसकार्ट के एक स्टोर पर गया और कर्मचारी से बात भी की।
लेंसकार्ट के नियमों पर कर्मचारियों ने लगाई मुहर
यहाँ हमें स्टोर पर काम करने वाले एक वर्कर ने हमें नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि यह डॉक्यूमेंट बिल्कुल सही हैं और हर वर्कर को इसमें दिए हुए नियमों और शर्तों का पालन करना होता है। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो उस पर एक्शन होता है, यहां तक कि स्टोर से वापस जाने को कह दिया जाता है। स्टोर के वर्कर्स ने हमें बताया कि कलावा अगर पहनना भी है तो उसे शर्ट की कफ़ के अंदर छुपा के रखना होगा! ताकि कि किसी को दिखाई न दे सके।
Opindia ने इस मामले में लेंस्कर्ट के HR डिपार्टमेंट से भी ईमेल भेज कर जवाब मांगा जो एज यूजुअल नहीं आया । सोचिए वो लेंस्कार्ट जिसके ज्यादातर ग्राहक हिंदू होते हैं, जिसका फाउंडर ही एक हिंदू है, उसी के यहाँ हिंदुओं की उपेक्षा की जा रही है। यानि दुकान भी हिंदू बहुसंख्यक वाले देश में चलानी है और उनके बीच में रहकर अपमान भी हिंदुओं का ही करना है।
फाउंडर पीयूष बंसल ने दी सफाई
खैर जब लेंस्कार्ट की जबरदस्त तुड़ाई हुई तो कुछ ही देर में उनके होश ठिकाने आ गए औऱ फिर फाउंडर पीयुष बंसल ने एक्स पर सफ़ाई देना शुरू कर दिया। पहले कहा कि ये तो पुराना डॉक्यूमेंट है जो अब पब्लिक हो गया और हम ऐसी नीतियाँ नहीं चलाएँगे। लोगों ने फिर उनसे पूछा कि आख़िर तुम्हारी कंपनी में ऐसी नीतियाँ लाई ही क्यों गईं? क्या यहाँ भी TCS कंपनी की तरह कोई निदा ख़ान बैठी हुई है?
इस पर पीयूष बंसल ने पहले तो डिफेंड करने की कोशिश की, लेकिन जब लेंस्कार्ट को बायकॉट की माँग के बीच अपना धंधा डाउन जाता दिखा तो पीयूष बंसल ने एक और ट्वीट किया और लिखा कि हाँ हमसे गलती हुई है और अब हम सारे ऐसे डॉक्यूमेंट रिव्यू करने जा रहे हैं।
लेकिन सवाल वही है कि आख़िर इस देश के कॉर्पोरेट में कौन ऐसे लोग बैठे हुए हैं जो प्रोफेशनल बनाने के नाम पर तिलक और बिंदी हटवा रहे हैं, कलावा कटवा रहे हैं लेकिन हिजाब को अनुमति दे रहे हैं, उसे प्रोग्रेसिव माना जा रहा है। इस्लामी कट्टरपंथ का ये कॉरपोरेट वर्जन धीमे धीमे अब सामने आ रहा है, हो सकता है आने वाले समय में कहाँ शुक्रवार को आधे दिन छुट्टी होती है और कहाँ प्रेयर रूम के नाम पर नमाज़ की जगहें ऑफिस में निकाली जाती हैं… शायद सामने आए।





