नोएडा हिंसा का सरगना निकला मजदूर बिगुल दस्ता, यूपी पुलिस ने ऐसे किया खुलासा

Summary
हिंसा भड़काने के पीछे मजदूर बिगुल के साथ ही पाकिस्तानी एकाउंट्स का नाम भी सामने आया है। हिंसा भड़काने के लिए 'प्राउड इंडियन नबी' और 'मीर इलयास आइएनसी' के एक्स अकाउंट से ट्वीट किया था..

प्राचीन काल में जब भी ऋषि मुनि यज्ञ करते थे तो कुछ असुर उनकी तपस्या हमेशा ही भंग करने में लगे रहते थे इसके लिए वे कभी यज्ञ मांस के टुकड़े डालते थे तो कभी साधना पर बैठे साधुओं पर हमला करते थे। कुछ वैसा ही केस बीतें दिनों नोएडा में हुआ।

जब नोएडा पूरी ताकत से अपनी आर्थिक शक्ति बढ़ा रहा था तो ऐसे ही कुछ राक्षस इस यज्ञ में भी बाधा डालने आ गए। नोएडा में हिंसा का बिगुल बजाने वाले इस संगठन का नाम है मजदूर बिगुल दस्ता। इस मजदूर बिगुल का सरगना अब यूपी पुलिस की गिरफ्त में है और अब सामने आ रहा है कि मजदूरों के नाम पर कैसे पूरा राज्य बर्बाद करने की कोशिश हो रही थी।

ये मजदूर बिगुल इस हिंसा में क्या कर रहा था, इसके कितने लोग पकड़े गए हैं, इसका पूरा रोल व्हॉटसएप से लेकर टेलीग्राम तक और ग्राउंड पर क्या था और कैसे इसने दंगा भड़काया, ये मैं आपको एक-एक करके बताऊंगा। मैं ये भी बताऊंगा कि पुलिस ने अब तक इस हिंसा को लेकर क्या खुलासे  किए हैं।

घटना के चार दिन बीत जाने के बाद अब नोएडा पुलिस ने मामले को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वह ये कि 13 अप्रैल को नोएडा में आगजनी, पथराव और बवाल करने वाले ज्यादातर लोग फैक्ट्री के मजदूर नहीं, बल्कि बाहरी थे। अब तक हुई 66 गिरफ्तारियों में से 45 लोग बाहरी पाए गए हैं। मतलब ये ना फैक्ट्री वर्कर थे ना इन्हें सैलरी और ओवरटाइम की कोई चिंता थी, ना इन्हें मजदूरों के दुख दर्द से कोई लेना देना था। इनका अंतिम उद्देश्य बस हिंसा था और ये उससे नोएडा को अस्थिर करना चाहते थे।

ऑपइंडिया ने पहले ही जताया था मजदूर बिगुल दस्ता पर शक

अब बात आती है मजदूर बिगुल की। दरअसल हिंसा वाले दिन ही ऑपइंडिया ने बताया था कि ये हिंसा संयोग से ज्यादा प्रयोग दिखाई पड़ती है, OpIndia ने इस वीडियो में मजदूर बिगुल के भीड़ इकट्ठा करने, उसके पानीपत और सिंगरौली में हुए बवाल के कनेक्शन की तरफ़ इशारा भी किया था।  

अब पुलिस ने बताया है कि मजदूर बिगुल दस्ता नाम के संगठन ने ही योजनाबद्ध तरीके से श्रमिकों को भड़काया था। अमर उजाला की एक रिपोर्ट कहती है कि 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। इसके बाद 31 मार्च से इस ग्रुप की सक्रियता नोएडा में बढ़ गई थी।  

31 मार्च से 11 अप्रैल तक लगातार इस ग्रुप के लोगों ने मजदूरों के साथ बैठकें की और उन्हें आंदोलन को लेकर उकसाया। कई लोगों से अलग-अलग मुलाकात की। मजदूर बिगुल दस्ता प्रमुख रूपेश रॉय, आदित्य आनंद समेत अन्य लोगों ने कई स्थानों पर जाकर लोगों को भड़काने वाली बातें कहीं।

इसके साथ ही इन लोगों ने हिंसा से पहले नोएडा बोटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन पर भी बवाल काटा था। नोएडा फेज 2 जहाँ से हिंसा शुरू हुई, वहाँ भी कई दिनों से मजदूर बिगुल लगातार हिंसा के लिए माहौल बना रहा था और यही नहीं बल्कि मजदूर बिगुल ने तो अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस पर लोगों को अगवा करने के आरोप तक लगा दिए थे ताकि मजदूरों में और भ्रम पैदा हो सके।

मजदूरों से की थी मिर्ची पाउडर लाने की अपील

सिर्फ़ ग्राउंड पर ही नहीं बल्कि मजदूर बिगुल लगातार डिजिटली भी इस हिंसा को इंजीनियर कर रहा था। पुलिस को जांच में पता चला है कि मजदूर बिगुल के लोगों ने 50 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर कर्मचारियों को उकसाने, भीड़ जुटाने एवं औद्योगिक इकाइयों को निशाना बनाने की साजिश रची थी। यहां तक कि मजदूर बिगुल के कम्युनिस्टों ने मजदूरों को मिर्च पाउडर लाने तक को कहा था!

यानी पूरी हिंसा में कहीं ना कहीं मजदूर बिगुल सेंट्रल रोल प्ले कर रहा था ताकि मजदूरों के सहारे पूरा दंगा खड़ा किया जा सके और नोएडा में बवाल हो, जिससे योगी सरकार की छवि पर बट्टा लगे। पुलिस ने अब हिंसा के बाद एक्शन लेते हुए मजदूर बिगुल के सरगना रुपेश राय को भी पकड़ लिया है। सामने आया है कि रुपेश और उसका एक साथी आदित्य लगातार अलग अलग जगह जाकर लोगों को गुमराह कर रहे थे।  

इन्होंने नोएडा से पहले मानेसर में भी यही काम किया था। पुलिस ने रुपेश के साथ ही बाक़ी लोगों पर भी एक्शन लिया है और कार्रवाई कर रही है। हिंसा के दौरान एक शोरूम की गाड़ियों में आग लगाई गई थी और शोरूम को क्षतिग्रस्त किया गया था। अब आगजनी के लिए पहचाने गए 11 आरोपितों में से 8 और हिंसा भड़काने वाले 19 में से अधिकांश आरोपी कर्मचारी नहीं निकले हैं। ये लोग खुद को मजदूर बताकर भीड़ में शामिल हुए और माहौल बिगाड़ा।

हिंसा में पाकिस्तानी कनेक्शन आया सामने

पुलिस अभी यहीं तक नहीं रुकी है बल्कि इस मामले में अब तक अलग अलग थानों में 1200 से ज्यादा लोगों के खिलाफ कुल 13 एफआईआर दर्ज की गई हैं। हर एक आदमी को पहचानकर धर-पकड़ की जा रही है। हिंसा भड़काने के पीछे मजदूर बिगुल के साथ ही पाकिस्तानी एकाउंट्स का नाम भी सामने आया है।

पुलिस जांच में पता चला है कि हिंसा के दौरान मजदूरों को और ज़्यादा भड़काने के लिए प्राउड इंडियन नबी और मीर इलयास आइएनसी के एक्स अकाउंट से ट्वीट किया था कि प्रदर्शन में लोगों की मौत हुई है। मजदूरों को भ्रमित करने वाले ये दोनों अकाउंट पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे थे। पुलिस ने इनका भी डेटा खंगाल लिया है। बाहर से आकर यहाँ हिंसा की आग भड़काने वालों की स्पेशल जांच की जा रही है।

चश्मदीदों ने कैमरे पर बताया डरावना मंजर

अब मैं आपको वहां का अपना अनुभव बताया हूं। नोएडा में हुई हिंसा के अगले ही दिन OpIindia की टीम ग्राउंड पर पहुँची थी, यहाँ स्थानीय लोगों के साथ कंपनियों में तैनात कुछ सुरक्षा गार्ड़ों से भी हमने बात की। कई चश्मदीदों ने हमें बताया था कि जहाँ अधिकांश मजदूर सिर्फ़ शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे तो वहीं कुछ बाहरी इस जमावड़े का फ़ायदा उठाकर हिंसा भड़का रहे थे।

मौके पर मौजूद एक कंपनी के सुरक्षा गार्ड हमें आंखों देखा हाल बताते बताए भावुक हो गया। उसने हमें बताया कि भीड़ में ज्यादातर लोग बाहरी लग रहे थे। इनमें से कुछ ने अपने चेहरे को भी ढक रखा था उनका उद्देश्य कंपनियों को नुकसान पहुंचाने के अलावा कुछ और नहीं था। यह बात तब और पुख्ता हो जाती है कि जब पहली ही बातचीत में नोएडा डीएम ने मजदूरों की सभी बातों को मान लिया तो इसके अगले दिन फिर से विरोध प्रदर्शन और हिंसा करने की क्या आवश्यकता थी?

हिंसा भड़काने वालों ने पहन रखा था नक़ाब

अब मजदूर बिगुल, उसके सरगना रुपेश और पाकिस्तान कनेक्शन की सारी बातें सामने निकल कर आ रही हैं। OpIndia मजदूर बिगुल को पहले दिन से ही ट्रैक कर रहा था और मजदूर बिगुल ने हमें उसकी पोल खोलने पर लीगल नोटिस तक भेज दिया और इसकी सार्वजनिक घोषणा भी कर दी, लेकिन हकाकत सामने आने के बाद अब मजदूर बिगुल वाले अपना चेहरा छिपाते घूम रहे हैं। यानी पहले हिंसा भड़काओ और फिर तुम्हारा नेटवर्क कोई एक्सपोज़ करे तो उसको लीगल नोटिस भेजो।

दरअसल ये कम्युनिस्ट सोचते हैं कि ये 1960 का दौर है जहाँ लोग डर जाएँगे! याद रखिए ये नया भारत है नए भारत में नक्सलियों को हमारे सेना के जवान एके-47 की नोंक पर रखकर ठोक रहे हैं। इसी का परिणाम है कि अब देश में नक्सलवाद ख़त्म हो चुका है। तो याद रखिए कि मजदूर बिगुल जैसे लोगों का अर्बन नक्सलिज्म भी अब चलने नहीं दिया जाएगा। OpINDIA लगातार ऐसे तरक्की के दुश्मनों को एक्सपोज़ करता रहेगा।

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