china poor image revealed

भारत को बदनाम करने वाला नैरेटिव अब चीन पर पड़ा भारी? सोशल मीडिया पर शुरू हुआ पलटवार

Summary
कई भारतीय यूजर्स ने चीन की पोल खोल दी है कि उसका अपना समाज कहीं से भी बराबरी वाला नहीं है। चीन में भी जाति व्यवस्था के समानांतर एक परंपरा है और कम्युनिस्ट चीन में आज भी क्लास के नाम पर असमानताएं हैं।

पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर भारत को लेकर एक खास नैरेटिव लगातार चलाया गया है। कभी भारत की गंदगी का मज़ाक उड़ाया जाता है, कभी जाति व्यवस्था को लेकर तंज कसे जाते हैं, तो कभी भारतीय समाज को पिछड़ा बताने की कोशिश होती है। इनमें सिर्फ पश्चिमी देशों के अकाउंट ही नहीं, बल्कि चीनी सोशल मीडिया से जुड़े कई अकाउंट भी शामिल रहे हैं। किसी स्लम की वीडियो निकाल कर उसे पूरे भारत की स्थिति बता दिया जाता है, किसी फर्जी फ़िल्म का हिस्सा निकाल कर उसे सच्चाई बताया जाता। 

कई रिपोर्टों में तो ये दावा किया गया कि चीन से जुड़े ऑनलाइन नेटवर्क भारत विरोधी कंटेंट को बढ़ावा देते रहे हैं लेकिन अब चीन को उसी की दवा का स्वाद भारतीयों ने देना शुरू कर दिया है। 

सोशल मीडिया पर आज कल एक नया ट्रेंड शुरू हुआ। कई भारतीय यूजर्स ने चीन की पोल खोल दी है उसका अपना समाज कहीं से भी बराबरी वाला नहीं है। चीन में भी जाति व्यवस्था के समानांतर एक परंपरा है और कम्युनिस्ट चीन में आज भी क्लास के नाम पर असमानताएं हैं।

कई ऐसे फुटेज तैर रहे हैं जिनमें चीन की गरीबी दिख रही है, वहां की झोपड़ियों के वीडियो सामने आ रहे हैं और कैसे वहां लोगों के साथ भेदभाव किया जाता है वो भी दिख रहा है। हम इन फुटेज में से किसी की भी पुष्टि नहीं कर रहे हैं लेकिन एक बात तय है कि इंडियन्स ने चीन की उस फायरवॉल को तोड़ जरूर दिया है जिससे वह खुद की इमेज को बचाए रखता था, छुपाए रखता था कि दुनिया को उसका केवल हाईटेक सिटी वाला रूप दिखे, ये गरीबी, असमानता, भेदभाव वाला नहीं।

इसके साथ ही चीन के प्राचीन समाज की चर्चा भी शुरू हो गई है, जिसमें ये बताया जा रहा है कि सदियों तक चीन का समाज चार बड़े वर्गों में बंटा हुआ था और आज भी वो देखने को मिलता है। 

चार वर्ग हैं, Shi, Nong, Gong और Shang… Shi वर्ग में विद्वान, अधिकारी और प्रशासक आते थे। Nong किसान थे। Gong कारीगर और शिल्पकार थे। जबकि Shang व्यापारियों का वर्ग था। दावा किया जा रहा है कि आज भी इसके आधार पर चीन में भेदभाव होता है। 

इनमें से ऊंचे वर्ग के लोगों को अधिक सम्मान और उनका ज्यादा प्रभाव माना जाता है निचले वर्गों का कम।

यही बात सोशल मीडिया यूजर्स उठा रहे हैं। लेकिन बहस सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं है। भारतीय यूजर्स आधुनिक चीन के Hukou System की भी चर्चा कर रहे हैं। Hukou चीन की सरकारी रजिस्ट्रेशन व्यवस्था है, जो तय करती है कि किसी नागरिक का आधिकारिक निवास क्षेत्र कौन सा है और उसे सरकारी सुविधाएं कहां से मिलेंगी।

दशकों तक इस व्यवस्था ने ग्रामीण और शहरी चीन के बीच एक बड़ा अंतर पैदा किया। करोड़ों ग्रामीण मजदूर शहरों में काम तो करते रहे, लेकिन उन्हें शहर के स्थायी निवासियों जैसी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं। लोगों ने इस व्यवस्था को Divided Citizenship कहा है।

ऐसी कई बातों को उठाकर इंडियन सोशल मीडिया यूजर्स चीन के इतिहास और उसके अपने बंटे हुए समाज के फुटेज डालकर बैकफायर कर रहे हैं।

Editorial team:
Production team:

More videos with Jayesh Matiyal as Anchor/Reporter