अमेरिका की सड़कों पर अगर आप हजारों मील लंबा सफर तय करें तो हर कुछ घंटों में आपको एक पंजाबी ट्रक ड्राइवर जरूर मिल जाएगा। लेकिन आज वही समुदाय अमेरिका की सबसे बड़ी जांच के घेरे में है। सवाल सिर्फ 30 गिरफ्तारियों का नहीं है, सवाल है डेढ़ लाख सिख ट्रक ड्राइवरों के भविष्य का…
अमेरिका का ये वीडियो तो आपको याद होगा, जब एक इंडियन ट्रक ड्राइवर हरजिंदर सिंह ने एक गलत यू-टर्न लेने की कोशिश की और इस गलती के कारण तीन लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। अमेरिकी मीडिया, ट्रकिंग यूनियनों और रिपब्लिकन नेताओं ने इसे विदेशी ट्रक ड्राइवरों की स्क्रीनिंग और लाइसेंसिंग सिस्टम की विफलता का प्रतीक बना दिया..
इस घटना के बाद से यूएस में विदेशी ट्रक ड्राइवरों को लेकर एक बहस काफी तेज हो गई। रोड़ सेफ्टी, Commercial Driver’s License और इमिग्रेशन रूल्स को लेकर सवाल उठने लगे। विदेशी ट्रक ड्राइवरों के लिए सख्त नियमों की मांग होने लगी और अगस्त 2025 में तो ट्रंप प्रशासन ने फॉरेन कमर्शियल ट्रक ड्राइवर्स के लिए नए वर्क वीजा जारी करने पर रोक भी लगा दी थी।
इस घटना के 9 महीने बाद अब खबर आई है कि अमेरिका में 30 भारतीय ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार हुए हैं और उनके खिलाफ deportation यानी उन्हें वापस भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इन 30 में से 28 ड्राइवर तो अकेले पंजाब से हैं।
मामला ये है कि अमेरिकी एजेंसियों ने वहां Operation Checkmate चलाया है। इसके तहत कुल 52 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 36 लोग वो हैं जो कमर्शियल ट्रक चला रहे थे और इनमें भी सबसे ज्यादा यानी 30 भारतीय हैं। बाकी के 6 लोग मेक्सिको, एल साल्वाडोर और रूस के नागरिक हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये लोग अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे थे और ट्रकिंग सेक्टर में काम कर रहे थे। चिंता की बात ये है कि California में CDL यानी Commercial Driver’s License की जांच के दौरान करीब 17,000 ऐसे ट्रक ड्राइवरों की पहचान हुई है जिनके इमिग्रेशन या दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्टस कहती हैं कि इनमें बड़ी संख्या पंजाबी, खासकर सिख समुदाय से जुड़े लोगों की है।
अब शुरू में मैंने हरजिंदर का जिक्र इसलिए किया क्योंकि उनके पास भी अमेरिका का Commercial Driver’s License था और उन्हें भी ये लाइसेंस California से मिला था वो भी ऐसी स्थिति में जब वो खुद अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे थे।
अब कुछ रिपोर्ट्स दावा करती हैं कि जब हरजिंदर से पूछताछ की गई तो पता चला कि उन्हें अंग्रेजी और रोड साइन समझने में दिक्कत हो रही थी और इसके बाद तो CDL सिस्टम विवादों में आ गया कि आखिर ऐसे व्यक्ति को लाइसेंस मिला कैसे?
बाद में सामने आई रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया कि हरजिंदर सिंह CDL के रिटर्न में 10 बार फेल हुए थे और फिर सवालों के घेरे में अकेला हरजिंदर नहीं बल्कि पूरा का पूरा CDL सिस्टम आ गया।
अमेरिका में लोगों ने पूछना शुरू कर दिया कि अगर कोई व्यक्ति बार-बार टेस्ट में फेल हो रहा है, अंग्रेजी समझने में दिक्कत है और फिर भी उसे कमर्शियल ट्रक चलाने का लाइसेंस कैसे मिल जाता है, तो ये कहीं न कहीं सिस्टम में खामी जरूर है। ऐसे और भी कई मामले आए जिनको आधार बनाकर अमेरिकी राजनीति में भी एक नई बहस शुरू हुई।
ट्रम्प प्रशासन और उसके समर्थकों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति लीगल इमिग्रेशन स्टेटस में नहीं है या जरूरी safety regulations को पूरा नहीं करता, तो उसे बड़े कमर्शियल ट्रक चलाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। उनका दावा है कि कुछ अमेरिकी राज्यों ने इमिग्रेशन स्टेटस की पर्याप्त जांच किए बिना CDL जारी किए।
लेकिन यहां एक दूसरी साइड भी है। इमिग्रेशन ग्रुप्स, ट्रकिंग इंडस्ट्री के कुछ लोगों और प्रवासी अधिकारों से जुड़े संगठनों का कहना है कि हजारों विदेशी ड्राइवर सालों से वर्क परमिट और वैध दस्तावेजों के आधार पर काम कर रहे थे। उनके मुताबिक कुछ मामलों को आधार बनाकर पूरी immigrant trucking community को संदेह की नजर से देखा जा रहा है।
अब इस वक्त अमेरिका में जो हो रहा है उसका सीधा असर पंजाब में देखने को मिल रहा है। दरअसल, अमेरिका की ट्रकिंग इंडस्ट्री में खासतौर पर जो ट्रक लंबी दूरी तय करते हैं उनमें पंजाबी और सिख समुदाय की मौजूदगी काफी मजबूत मानी जाती है।
द ट्रिब्यून ने Sikh Coalition के Executive Director हरमन सिंह के हवाले से बताया है कि सिख ट्रक ड्राइवरों ने अमेरिका में ड्राइवरों की कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में करीब 1.5 लाख सिख ट्रक ड्राइवर काम करते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या तो कैलिफोर्निया और पश्चिमी तट के अन्य राज्यों में है और याद रखिए कैलिफोर्निया में ही 17 हजार ट्रक ड्राइवर्स जांच के दायरे में हैं। यहीं से हरजिंदर को आसानी से CDL मिल गया था
अमेरिका में 1.5 लाख सिख ट्रक ड्राइवर कोई छोटा नंबर नहीं है। ऐसे में ये समझिए कि अमेरिका में ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और ट्रकिंग का कारोबार कई पंजाबी परिवारों की रोजी-रोटी है।
यही वजह है कि Operation Checkmate जैसी कार्रवाई का असर केवल गिरफ्तार हुए लोगों तक सीमित नहीं माना जा रहा। कई वैध दस्तावेज रखने वाले ड्राइवर भी चिंतित हैं कि बढ़ती जांच और सख्त नियमों का प्रभाव पूरे समुदाय पर पड़ सकता है। ट्रम्प प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में अवैध प्रवासियों पर एक्शन पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक हो गया है। इसी रणनीति के तहत अमेरिका के Homeland Security Investigations ने Operation Checkmate शुरू किया।
पंजाब के कई परिवारों ने पिछले वर्षों में अपने बच्चों को अमेरिका भेजने के लिए लाखों रुपये खर्च किए। इनमें से बड़ी संख्या में लोग ट्रकिंग इंडस्ट्री में गए हैं। इसलिए अमेरिका से जब भी किसी सिख, पंजाबी या भारतीय ट्रक ड्राइवर से जुड़ी खबर आती है तो उसका असर सीधे पंजाब के गांवों और परिवारों पर पड़ता है।
इसका हालिया उदाहरण आपको याद होगा जब बीते साल अमेरिका ने अपने यहां से अवैध प्रवासियों को निकालना शुरू किया तो उसमें भी सबसे ज्यादा संख्या पंजाब से ही थी जो डंकी रूट के जरिए अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचे थे और वहां नौकरी कर रहे थे। एक दम से उनके रोजगार छिन गए थे और अब एक बार फिर वही डर सताने लगा है।
पंजाब के कई जिलों में अमेरिका जाना इसलिए एक बड़ा सपना है क्योंकि वहाँ पर ये एक सोशल स्टेटस भी माना जाता है। परिवार जमीन बेचकर या कर्ज लेकर युवाओं को विदेश भेजते हैं। इसलिए भी अमेरिका में ट्रकिंग सेक्टर पर संकट का असर केवल ड्राइवरों पर नहीं बल्कि पूरे माइग्रेशन मॉडल पर पड़ सकता है।
कई पंजाबी परिवार जिनकी इनकम का एक बड़ा सोर्स यही है यानी अमेरिका का कमर्शियल ट्रक सेक्टर और उस पर भी अब संकट के बादल छा रहे हैं वो भी ऐसे समय में जब तेल की मारा-मारी और बढ़ते प्राइसेस के बीच वो पहले ही पिस रहे हैं, उस पर अब ये इमिग्रेशन वाली जांच और डिपोर्टेशन का डर अलग।
तो अमेरिका में CDL अब इस बात की गारंटी नहीं देगा कि आप वहां पर कमर्शियल ट्रक चला सकते हैं या नहीं? अब इस पूरे सिस्टम की दोबारा से और बड़ी गहराई से जांच की जा रही है। अमेरिका के ट्रकिंग उद्योग में सिख समुदाय की मौजूदगी इतनी बड़ी है कि कई राज्यों में ट्रकिंग कंपनियां और फ्लीट ऑपरेशन सीधे पंजाबी नेटवर्क के जरिए चलते हैं। यही वजह है कि आज सवाल केवल 30 गिरफ्तार भारतीयों का नहीं है। सवाल उन हजारों पंजाबी परिवारों का है जिनकी कमाई अमेरिकी हाईवे पर दौड़ते ट्रकों से जुड़ी हुई है। अगर जांच का दायरा बढ़ता है तो इसका असर कैलिफोर्निया और अमेरिका के अलग-अलग राज्यों की सड़कों से लेकर पंजाब के गांवों तक महसूस किया जाएगा।




