री-नीट का एग्जाम तो कल खत्म हो गया लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से एक और एग्जाम चल रहा था, देश को ये यकीन दिलाने का एग्जाम, कि पेपर लीक होना तय है, गड़बड़ी होना तय है और इस सिस्टम का फेल होना तय है।
अब, जब फाइनली नीट का पेपर 21 जून को सक्सेसफुली निपट गया है, 20 लाख से ज्यादा स्टूडेंट ने ये एग्जाम दे दिया है तो अब छात्र, उनके माता-पिता, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, सरकार, सिस्टम यानी जितने भी स्टेकहोल्डर हैं, वो सब चैन की सांस लेंगे।
वरना इन दिनों जो परसेप्शन बनाया जा रहा था कि लीक तो होना ही है। अगर ये परसेप्शन सफल हो जाता तो लाखों बच्चों और उनके परिवारों का भरोसा तो पूरी तरह टूट जाता और मुझे तो पर्सनली इस बात का भी डर था कि देश में अराजकता की स्थिति पैदा हो जाती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और ये इसलिए नहीं हुआ क्योंकि NTA ने इस लीक परसेप्शन से सीधे-सीधे लड़ाई लड़ी।
लेकिन सवाल ये है कि इस परसेप्शन को बनाने के लिए आखिर किया क्या गया? मैं आपको एक-एक करके बताता हूं।
पिछली बार जो पेपर लीक हुए थे, उसमें टेलीग्राम का इस्तेमाल किया गया था तो इस बार सरकार ने री-नीट से पहले टेलीग्राम को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया और वो भी एग्जाम के एक दिन बाद तक… यानी 21 जून को एग्जाम था और ये टेंपरेरी बैन 22 जून तक… लेकिन पूरे देश में ये माहौल बनाया गया कि टेलीग्राम को बैन करने से थोड़े ना लीक रुक जाएगा… ये तो सिस्टम में गड़बड़ी का नतीजा है।
खुद टेलीग्राम तक इस फैसले के बाद इंडिया और इंडियन गर्वनमेंट को मॉक कर रहा था और यहां अपने ही लोग इस बात पर खुश भी हो रहे थे कि वाह टेलीग्राम ने क्या पंच लाइन मारी हैं… और इसका परसेप्शन ग्राउंड पर जाकर कैसा दिख रहा था, आप उसके लिए ये वीडियो देखिए, जिसमें एक कॉकरोचनी कह रही हैं कि टेलीग्राम को क्यों बैन किया, NTA को बैन कर देना चाहिए।
आइरनी ये है कि इस कॉकरोचनी को टेलीग्राम पर बैन का तो पता है लेकिन NTA के बारे में पूछते ही बगल में झांकने लगीं और हड़बड़ाने लगीं। अब इन्हें कौन बताए कि टेलीग्राम कितने देशों में बैन है और क्यों बैन है?
खैर, टेलीग्राम बैन से पेपर लीक रुक सकते हैं या नहीं इस पर फिर किसी और वीडियो में बात होगी लेकिन अभी के लिए टेलीग्राम से फैलने वाली फेक न्यूज को, अफवाहों को कम किया जा सकता है और यही हुआ भी।
आप देखिए, री-नीट से ठीक 2 दिन पहले VPN का यूज करके टेलीग्राम पर ये बातें फैलाई गई कि पेपर फिर से लीक हो गया है। इसके लिए AI से बनाए गए PDF चलाए गए… वहां, पैसों की बात होने लगी कि इतने का पेपर है… और हो सकता है कि कुछ लोग इस जाल में फंसे भी हों… कुछ ने हो सकता है पैसे भी दे दिए हों… इस फेक न्यूज का लेवल इतना बड़ा था कि आपका दिमाग घूम जाएगा… लीक का परसेप्शन बनाने वाले इन लोगों ने कई मीडिया हाउसेस को ईमेल तक भेजे… ऑपइंडिया को भी भेजे और NTA से जुड़े अधिकारियों को भी यही मेल भेजा गया कि 21 जून को होने वाले Re-NEET का पेपर टेलीग्राम में आ चुका है, वो लीक हो गया है।
सोचिए, ये 2 एग्जाम के बस 2 दिन पहले हो रहा है। इसके बाद हालांकि NTA ने तुरंत इसका खंडन भी किया और कहा कि यह सरासर फेक न्यूज है लेकिन आपके लिए यहां ध्यान देने वाली बात सिर्फ अफवाह नहीं थी, बल्कि उस अफवाह के जरिए लीक का परसेप्शन बनाना था। इस परसेप्शन को बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया पर वीडियोज तक बनवाए गए। आपकी जानकारी के लिए मैं बस ये बात बता रहा हूं कि ये आदमी कॉकरोच जनता पार्टी का सपोर्टर है… इसका पूरा वीडियो ऑपइंडिया पर अलग से देख सकते हैं।
इससे जुड़ा एक और मामला बताता हूं। एक खबर आई कि री-एग्जाम से ठीक तीन दिन पहले राजस्थान पुलिस ने एक 19 साल के लड़के को अरेस्ट किया क्योंकि वो टेलीग्राम पर री-नीट का फर्जी लीक पेपर बेच रहा था और पैसे वसूल रहा था। आप सोचिए, उसने कितने लोगों तक संपर्क साधा होगा और उनके मन में क्या परसेप्शन बना होगा कि लो फिर लीक हो गया।
अब दूसरा एग्जाम्पल देखो। अब्दुल्ला के अब्बू का तो आपने वीडियो देखा होगा जिसमें वो कह रहे थे कि… उनके बेटे का एग्जाम सेंटर अबू धाबी डाल दिया है और अब वो कैसे वहां जाकर एग्जाम देने जाएगा और वो भी 2 दिन में… अब NTA को ऑलरेडी इतना भला-बुरा कहा जा रहा है और उस पर ये हरकत हो तो कोई भी आदमी सिस्टम पर गुस्सा हो जाएगा कि ये क्या बात हुई, नागपुर का एक छात्र जिसका परीक्षा केंद्र एक शहर से दूसरे शहर नहीं बल्कि दूसरे देश में डाल दिया।
सोशल मीडिया पर इसके बाद खूब माहौल बना… वीजा, पासपोर्ट, पैसा, इन सबको लेकर लंबी कहानी चली और कटघरे में कौन खड़ा हुआ? NTA… लेकिन बाद में पता चला कि अब्दुल्ला ने खुद ही अपनी प्रेफर्ड सिटी अबू धाबी चुनी थी।
NTA ने बताया कि NEET परीक्षा के रिशेड्यूल होने पर कैंडिडेट की सुविधा के लिए करेक्शन विंडो दी थी, जिसमें कैंडिडेट अपनी प्रेफ़र्ड सिटी चुन सकते थे और 3 लाख से ज़्यादा कैंडिडेट ने ऐसा किया भी। इसी दौरान अब्दुल्ला ने प्रेफर्ड सिटी अबू धाबी चूज की थी।
अब चलो अब्दुल्ला से गलती हुई, कैसे हुई, क्या हुआ वो सब एक अलग विषय है लेकिन… NTA ने तुरंत ही नागपुर में अब्दुल्ला को एक एग्जाम सेंटर अलॉट कर दिया।
अब इस मामले में राहुल गांधी भी क्रांति करने उतर आए थे कि हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
अरे भईया, दिलवा ही रहे हो तो उन बच्चों को भी न्याय दिलवाओ जिनका एग्जाम आपकी पार्टी की रैली के कारण छूट गया… आपकी मेगा रैली के कारण जो जाम लगा और फिर बेचारे बच्चे देरी से एग्जाम सेंटर पर पहुंचे और उन्हें एंट्री नहीं मिली, वो आज भी रो रहे होंगे।
ये क्रांति करना एक अलग विषय है, सबसे आसान काम यही है और बच्चों की समस्याओं का समाधान करना एक अलग विषय है। तो मैं परसेप्शन की बात कर रहा था। अब्दुल्ला वाले मामले में भी किसके खिलाफ परसेप्शन बना, NTA के खिलाफ और नीट में गड़बड़ी होनी तय है ये भाव पैदा करने की कोशिश की गई।
ये सब घटनाएं एग्जाम से सिर्फ 1-2 दिन पहले की हैं। उससे पहले की बात करें तो जब ये बात सामने आई थी कि इस बार अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं,,, एयरफोर्स के जरिए पेपर ट्रांसपोर्ट किए जाएंगे ताकि कोई चूक न हो, तब भी उसका मजाक बनाया गया। एग्जाम से पहले हुई मॉकड्रिल का भी मजाक उड़ाया गया। यानी हर कदम पर ये दिखाने की कोशिश हुई कि सिस्टम कुछ भी कर ले, गड़बड़ी होना तय है।
और हां, कॉकरोचों ने तो देश के अलग-अलग शहरों में जाकर क्रांति करने का बीड़ा ही उठा लिया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक, हर जगह एक ही बात को दोहराया जा रहा है कि इस परीक्षा पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अब एक बार जरा उन मां-बाप के बारे में सोचकर देखिए, उन बच्चों के बारे में सोचकर देखिए, जो रात-दिन मेहनत कर रहे हैं और फिर इस तरह का परसेप्शन उन पर क्या असर डालेगा। आप ठहरकर सोचिए।
टेलीग्राम पर फेक लीक की खबरें, मीडिया को भेजे गए मेल, वायरल वीडियोज, सेंटर विवाद, सुरक्षा व्यवस्थाओं का मजाक, विरोध प्रदर्शन और लगातार चलाया गया नैरेटिव हर चीज एक ही दिशा में जा रही थी कि नीट में कुछ न कुछ गड़बड़ होना तय है।
पेपर लीक हो या नहीं! आज इंटरनेट के दौर कुछ खुराफातियों की पूरी कोशिश ये रहती है कि किसी ना किसी गड़बड़ी की खबर फैलाई जाए और इसके लिए कोई भी अनरीलेटेड बात यूज की जाती है।
कोई अभ्यर्थी सेंटर से पाँच मिनट पहले निकला, पेपर लीक! बाद में निकला पेपर लीक। कहीं पेपर शुरू करने में 2 मिनट की देर हुई, पेपर लीक। और इससे होता क्या है?
इससे पैदा होती है शंका! ये शंका पहले एक में फिर 10 में फिर 100 अभ्यर्थियों में जाती है और जहाँ कुछ नहीं होता वहाँ कहानियाँ बननी शुरू हो जाती है। फिर सोशल मीडिया पर कैंपेन चलते हैं, कोई कोर्ट पहुँच जाता है और अच्छी ख़ासी परीक्षा सालों के लिए कोर्ट की फ़ाइलों में चक्कर खाती रहती है।
परीक्षा में लीक ना हो, ये पक्का करना तो भले ही थोड़ा सरल काम है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा कठिन है ये पक्का करना कि लीक की अफ़वाह तक ना फैले, और इस बार NTA ऐसा करने में सफल रही है।
कुलमिलाकर, नीट का एग्जाम खत्म हो गया, लेकिन ये मामला हमें इसलिए भी याद रखना चाहिए कि अफवाह, राजनीति, सोशल मीडिया और वायरल नैरेटिव मिलकर किसी भी परीक्षा के आसपास अविश्वास का माहौल खड़ा कर सकते हैं और हम सभी को बचना चाहिए।





