गाजियाबाद: क्या बदल गई है डेमोग्राफी? सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद स्थानीय लोगों ने क्यों जताई चिंता

Summary
गाज़ियाबाद के खोड़ा (मकनपुर) इलाक़े में सूर्य चौहान की हत्या के बाद स्थानीय हिंदुओं ने बड़े पैमाने पर पलायन का दावा किया है। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि पिछले दो दशकों में तेज़ी से हुए डेमोग्राफिक बदलाव, खुले में कुर्बानी और बिना पुलिस सत्यापन के रह रहे बाहरी लोगों के कारण इलाक़े में असुरक्षा का माहौल है।

गाज़ियाबाद का खोड़ा इलाक़ा बकरीद के दिन हुई सूर्या चौहान की हत्या के बाद एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाक़ा पहली बार किसी आपराधिक घटना के कारण चर्चा में नहीं आया है। उनका दावा है कि पिछले डेढ़-दो दशकों में यहाँ की डेमोग्राफी तेज़ी से बदली है, अपराध बढ़े हैं और यही कारण है कि बड़ी संख्या में हिंदू परिवारों ने खोड़ा के मकनपुर इलाक़े से पलायन किया है।

ऑपइंडिया की टीम ने खोड़ा के मकनपुर इलाक़े में पहुँचकर स्थानीय निवासियों, जनप्रतिनिधियों और पुराने रहवासियों से बातचीत की। इस दौरान कई लोगों ने इलाक़े में बढ़ती असुरक्षा, बाहरी लोगों के पुलिस सत्यापन (Verification) की कमी और बदलते सामाजिक माहौल को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।

पहले हिंदू बहुल था इलाक़ा, अब पलायन का दावा

करीब 20 से 30 वर्षों से इस इलाक़े में रह रहे कई लोगों ने दावा किया कि पहले यहाँ हिंदू आबादी बहुसंख्यक थी और लोग देर रात तक बिना किसी डर के आते-जाते थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, समय के साथ माहौल बिगड़ने के कारण कई हिंदू परिवारों ने अपने मकान बेच दिए और दूसरे सुरक्षित इलाक़ों में जाकर बस गए। उनका कहना है कि बढ़ता अपराध और असुरक्षा की भावना ही इसके पीछे प्रमुख कारण रहे हैं।

भाजपा (BJP) कार्यकर्ता अनमोल गुप्ता ने भी दावा किया कि जब उनका परिवार यहाँ आया था, तब मुस्लिम आबादी महज़ 8 से 10 प्रतिशत के आसपास थी, जबकि अब इलाक़े की जनसंख्या संरचना (Demography) में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

बकरीद के दौरान खुले में कुर्बानी का आरोप

ऑपइंडिया से बातचीत में स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बकरीद के दौरान खुले में पशु काटे जाते हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। पिछले 25 वर्षों से इलाक़े में रहने वाले एक निवासी ने बताया, ‘जब मैं यहाँ आया था, तब यहाँ हिंदू बहुसंख्यक थे। लेकिन अब हिंदू यहाँ से अपने मकान बेच-बेचकर जा रहे हैं।’

उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए आगे कहा, ‘अब यहाँ रहने में डर लगता है। ईद के दिन हिंदुओं के घरों के सामने खुले में बकरा और भैंसा काटा जाता है। हम डर के मारे घर से बाहर भी नहीं निकलते। वे हाथों में चाकू लेकर घूमते रहते हैं। अब हम यहाँ नहीं रहना चाहते, पता नहीं कब क्या हो जाए। हमें अपने सीएम योगी आदित्यनाथ पर तो पूरा भरोसा है, लेकिन यहाँ के माहौल पर भरोसा नहीं है।’

बिना सत्यापन रह रहे बाहरी लोगों पर उठे सवाल

इलाक़े के ज़िम्मेदार नागरिकों ने किरायेदारों और बाहरी लोगों के अनिवार्य पुलिस सत्यापन की माँग उठाई है। उनका कहना है कि बिना किसी वेरिफिकेशन के बड़ी संख्या में संदिग्ध लोग यहाँ रह रहे हैं, जिससे अपराधियों को पनाह मिलने की आशंका काफ़ी बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार आरोपी वारदातों को अंजाम देने के बाद किराये का मकान छोड़कर आसानी से फ़रार हो जाते हैं।

बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने पुराने आपराधिक मामलों का ज़िक्र करते हुए दावा किया कि पहले भी कई बड़ी घटनाओं के आरोपितों का कनेक्शन इसी इलाक़े से सामने आया था। यहाँ तक कि ‘एक्स-मुस्लिम’ सलीम पर हमला करने वाले दो सगे भाई भी खोड़ा के इसी इलाक़े में छिपे हुए थे और यहीं रहकर उन्होंने सलीम को जान से मारने की पूरी साज़िश रची थी।

डेमोग्राफी बदलाव और क़ानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल

स्थानीय लोगों का साफ़ कहना है कि पिछले 15 से 20 वर्षों में मकनपुर क्षेत्र का सामाजिक और व्यापारिक स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। उनका दावा है कि इलाक़े में मुस्लिम आबादी और उनके व्यवसायों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है, जिसे वे सीधे तौर पर डेमोग्राफिक चेंज के रूप में देखते हैं।

सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद स्थानीय निवासियों का एक बड़ा वर्ग प्रशासन से निष्पक्ष जाँच, प्रभावी पुलिस सत्यापन और क़ानून-व्यवस्था को सख़्ती से मज़बूत करने की माँग कर रहा है। लोगों का मानना है कि स्थानीय जनता के मन में पैदा हुई इस असुरक्षा और डर की भावना को दूर करना अब पुलिस-प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

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