उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2017 एक बड़ा मोड़ माना जाता है। भाजपा के सत्ता में आने और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर लगातार बहस होती रही है। लोगों का मानना है कि योगी सरकार ने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर प्रदेश की तस्वीर बदल दी है।
इसका एक उदाहरण मैं स्वयं अपने एक अनुभव से देता हूं। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में अपराध, लूट, डकैती और रंगदारी की घटनाएं अक्सर सुर्खियों में रहती थीं। स्थानीय स्तर पर पत्रकारिता करते समय हर रोज जिले में लूट और चोरी की खबरें सामने आती थीं। ग्रामीण इलाकों में पशु चोरी, जमीन कब्जाने और दबंगई की घटनाएं आम चर्चा का विषय थीं।
सड़कों की बदहाली, बिजली संकट और पुलिस-प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगातार लगते थे। प्रदेश की छवि देशभर में एक ऐसे राज्य की बन चुकी थी जहां कानून व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती थी।
मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश की आपराधिक छवि को बदलने की थी। सरकार ने अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने का दावा किया और पुलिस को अपराध नियंत्रण के लिए खुली छूट दी गई।
सरकार का कहना है कि अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों का असर प्रदेश में साफ दिखाई दिया। इसी दौरान ‘बुलडोजर कार्रवाई’ और पुलिस एनकाउंटर यूपी मॉडल की पहचान बन गए।
एनकाउंटर मॉडल पर क्या कहते हैं आंकड़े?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ 17,043 से अधिक पुलिस कार्रवाइयां हुई हैं। इन अभियानों के दौरान 11,834 अपराधी घायल हुए, 289 कुख्यात अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए और हजारों अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। सरकार का दावा है कि इन कार्रवाइयों ने संगठित अपराध, गैंगवार और माफिया नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाने का काम किया।
अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में मेरठ जोन सबसे आगे रहा, यहां 4,813 एनकाउंट में 97 अपराधी मारे गए, जबकि 3,513 अपराधी घायल हुए। वहीं वाराणसी जोन में 1,292 मुठभेड़ में 29 अपराधी मारे गए, 907 अपराधी घायल हुऔ और 2,426 गिरफ्तार कि गए। आगरा जोन में 2,494 एनकाउंटर हुए, जिसमें 24 अपराधी ढेर हुए, 968 अपराधी घायल और 5,845 अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
अपराधियों को ढेर करने में गाजियाबाद कमिश्नरेट सबसे आगे
अपराधियों को मार गिराने के मामलों में गाजियाबाद कमिश्नरेट सबसे आगे रहा। आंकड़ों पर नजर डालें को गाजियाबाद कमिश्नरेट में 789 मुठभेड़ में 18 अपराधी ढेर हुए जबकि बरेली जोन में 2,222 मुठभेड़, 21 अपराधी ढेर, लखनऊ जोन में 971 मुठभेड़, 20 अपराधी ढेर, कानपुर जोन में 791 मुठभेड़, 12 अपराधी ढेर, लखनऊ कमिश्नरेट में 147 मुठभेड़, 12 अपराधी ढेर, यागराज जोन में 643 मुठभेड़, 11 अपराधी ढेर हुए।
बुलडोजर बना सरकार की पहचान
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल तक आते-आते बुलडोजर उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित प्रतीक बन गया। सरकार का दावा है कि माफियाओं की अवैध संपत्तियों को ध्वस्त कर अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ी गई।इसका असर विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिला है जहां पशु चोरी, रंगदारी और स्थानीय दबंगों की गतिविधियों पर नियंत्रण हुआ है।
पड़ोसी राज्यों में भी दिखने लगा ‘योगी मॉडल’ का असर
उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण के लिए अपनाए गए मॉडल की चर्चा अब दूसरे राज्यों में भी होने लगी है। उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली की राजनीति में समय-समय पर ‘योगी मॉडल’ दिखाई देने लगा है। अब यहां भी अपराधियों के खिलाफ योगी मॉडल की तर्ज पर ही कार्रवाई की जा रही है। वहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी भी योगी मॉडल की तर्ज पर कार्य करते दिखाई दे रहे हैं।
आखिर में एक बात साफ है कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘बुलडोजर’, ‘एनकाउंटर’ और ‘जीरो टॉलरेंस’ जैसे शब्द केवल प्रशासनिक शब्दावली नहीं रहे, बल्कि वे प्रदेश की राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन चुके हैं। आगामी चुनावों में भी कानून व्यवस्था और योगी मॉडल की चर्चा राजनीति के केन्द्र में रहेगी। इसकी प्रबल संभावना है।





