जरा Google कीजिए – दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश कौन सा है? ईरान? कतर? गलत! जवाब है इंडोनेशिया।
लेकिन मजेदार बात पता है क्या है? इंडोनेशिया में आज भी हिंदू और बौद्ध Civilization की ऐसी शानदार Heritage मौजूद है, जिसे सरकार खुद बचाने में लगी है।
11 फरवरी 2022 को इंडोनेशिया सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया और ऐलान किया कि ‘प्रम्बानन मंदिर’ – जो कि एक हिंदू मंदिर है, और ‘बोरोबुदुर मंदिर’ – जो एक बौद्ध मंदिर है, में फिर से लोग पूजा कर सकेंगे। साथ ही Central Java के पवन और मेंडुत मंदिरों को भी हिंदू और बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए अंतरराष्ट्रीय पूजा स्थलों के रूप में मान्यता दी गई।
असल में, इन मंदिरों का इस्तेमाल लंबे समय से सिर्फ Tourism, Research और Cultural Programs के लिए हो रहा था। अब सरकार चाहती है कि ये सिर्फ Historical Monuments न रहें, बल्कि अपनी असली पहचान यानी धार्मिक आस्था के केंद्र के रूप में भी जीवित रहें।
अगर इतिहास की बात करें, तो बोरोबुदुर मंदिर 9वीं शताब्दी में शैलेंद्र वंश ने बनवाया था और ये दुनिया के सबसे बड़े बौद्ध मंदिरों में गिना जाता है। वहीं, प्रम्बानन मंदिर 10वीं शताब्दी में हिंदू-बौद्ध मातरम साम्राज्य ने बनवाया था। यह भगवान शिव को समर्पित इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। यहाँ माता पार्वती, भगवान गणेश और ऋषि अगस्त्य की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
इस फैसले के लिए इंडोनेशिया के योग्याकार्ता में सरकार और धार्मिक नेताओं के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर भी हुए। सरकार का कहना है कि इससे अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच सम्मान, भाईचारा और सौहार्द और मजबूत होगा।
यहाँ मुस्लिम आबादी Majority में है, फिर भी वहाँ के बहुत से लोग इन प्राचीन हिंदू और बौद्ध मंदिरों को अपनी साझा सांस्कृतिक विरासत मानते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। यही वजह है कि आज भी ये ऐतिहासिक धरोहरें पूरी तरह सुरक्षित हैं।
योग्याकार्ता के गवर्नर ने साफ कहा कि ‘Unity in Diversity ही इंडोनेशिया की सबसे बड़ी ताकत है।’
और पता है ये सब कब हो रहा है? जब PM मोदी 8 जुलाई को प्रम्बानन मंदिर जा रहे हैं, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ! भारत वहाँ Restoration Project में भी मदद कर रहा है।
दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश ये बता रहा है कि पुरानी सभ्यताओं और दूसरे धर्मों की विरासत का सम्मान करना ही सच्ची आधुनिकता और मजबूत समाज की निशानी है।
इंडोनेशिया ने दिखा दिया – इतिहास को मिटाते नहीं, सहेजते हैं।



