Sonam Wangchuk hunger strike

सोनम वांगचुक के खाना ना खाने को बनाया जा रहा हथियार

Summary
अब ये लोग बोल रहे हैं कि जल्दी आओ, नहीं तो सोनम वांगचुक मर जाएँगे! जब आपको लोगों को ब्लैकमेल करके ही बुलाना है, तो सोनम वांगचुक को भाई हंगर स्ट्राइक में फँसाया क्यों?

सोनम वांगचुक को एजुकेशन मिनिस्टर बना दो, अभिजीत दीपके को एग्रीकल्चर मिनिस्टर और सौरव दास को लॉ मिनिस्टर, विजेता दहिया को ज़ुम्बा मिनिस्टर। ये है इनका सीजेपी प्रोटेस्ट। अब ये लोग बोल रहे हैं कि जल्दी आओ, नहीं तो सोनम वांगचुक मर जाएँगे! जब आपको लोगों को ब्लैकमेल करके ही बुलाना है, तो सोनम वांगचुक को भाई हंगर स्ट्राइक में फँसाया क्यों? आप तो पहले से ही प्रिपेयर्ड थे ना, कि जंग रहेगी, जंग रहेगी, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंग रहेगी।

सीजेपी के प्रोटेस्ट को देखें तो स्टूडेंट्स से ज़्यादा बड़ा मुद्दा खाना हो गया है। किसी का ना खाना मुद्दा है, किसी का खाना मुद्दा है। और खाने की लड़ाई में सोनम जी कह रहे हैं कि भैया अभिजीत, प्लीज़ मुद्दे पर लौट आओ।

खाना, खाना, खाना! आपको रेज़िग्नेशन चाहिए या खाना? क्लियर बता दो। राशन पूरे देश में बंटता है, तुम्हें पाँच किलो की जगह छह किलो मिल जाएगा। दरअसल बात ये है कि इनको आइडिया ही नहीं था कि ये गले की हड्डी ऐसे फँस जाएगी।

दरअसल ये आख़िरी रास्ता है कि इसको सेंसिबल बनाने के लिए आप आगे आइए, सोनम वांगचुक की जान बचाइए। क्योंकि अगर आप आगे नहीं आए तो वो खाना नहीं खाएँगे। सीजेपी प्रोटेस्ट में शायद इसी बहाने भीड़ आ जाए। क्योंकि अभी तो ग्राउंड पर इन दो लोगों के अलावा पार्ट टाइम स्टूडेंट्स और फुल टाइम प्रोटेस्टर्स, एआईएसए, एसएफआई के डफ़लीबाज़ भी हैं, जिन्हें पूरा श्रेय जाता है प्रोटेस्ट को कम्युनिस्ट प्रोटेस्ट दिखाने का।

खैर, ये ऐसी हंगर स्ट्राइक है जिसमें पार्टी का फाउंडर ब्रेकफास्ट निपटा रहा है, तो डांसर विजेता डिनर निपटा रहा है। और कह रहे हैं कि सोनम जी भूख से मर जाएँगे।

सीजेपी ने जेन ज़ी को नेपाल की तरह इकट्ठा किया, भड़काने का प्रयास भी किया लेकिन देश में इंस्टेबिलिटी नहीं आई। कल फिर सूरज निकलेगा, कल भी पंछी गाएँगे, सब हमको सुनाई देंगे, लेकिन सोनम शायद ना नज़र आएँगे। ऐसा मैं नहीं, ऐसा अभिजीत दीपके बोल रहा है।

ये आप भी स्टोरी में पोस्ट कर रहे होंगे कि सोनम वांगचुक को खाना खिलाओ, लेकिन सोनम वांगचुक का इस्तेमाल उस बुआ की तरह ब्लैकमेल करने के लिए हो रहा है, जो अपने फायदे के लिए हर तरह के ड्रामे करती थी। और इस ब्लैकमेलिंग को ये लोग चाहते हैं कि सीरियसली लिया जाए।

प्रोटेस्ट का इन्होंने मज़ाक बना दिया है। सौरव दास जेन ज़ी कपड़े पहनकर रोज़ एक नए फैशन में आ रहा है। अर्पित शर्मा ऑनलाइन प्रोटेस्ट कर रहा है, ध्रुव राठी वीडियो कॉल कर रहा है। असल में तो ख़ुद नहीं जानते थे कि उनको इतने दिन ये करना पड़ेगा।

और आज की हालात ये है कि ये प्रोटेस्ट मर चुका है। और इसीलिए अब आख़िरी हथियार के तौर पर सोनम वांगचुक की मौत का बहाना बनाया जा रहा है। बेसिकली ये कोशिश है सोनम वांगचुक को डिजिटली अधमरा घोषित करके इस मरे हुए प्रोटेस्ट को ज़िंदा करने की।

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