बीबीसी (BBC) की एक हालिया जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है कि यूनाइटेड किंगडम में रहने के लिए पाकिस्तान के नागरिक फर्जी तरीके से अपनी पहचान ‘एलजीबीटीक्यू’ (LGBTQ) के रूप में पेश कर रहे हैं और इसी आधार पर राजनीतिक शरण यानी ‘असाइलम’ की मांग कर रहे हैं।
आपने अक्सर संस्कृत की एक कहावत सुनी होगी, ‘यथा राजा तथा प्रजा!’ यानी जिस तरह का निजाम होता है, वैसी ही वहां की जनता भी होती है। कुछ ऐसा ही मामला हमारे पड़ोसी मुल्क का है। जिस तरह पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई-नई तरकीबें लगाकर कर्ज जुटाता है, कुछ वैसा ही रुख अब वहां के नागरिकों का भी देखने को मिल रहा है।
इन लोगों का तर्क है कि यदि वे ‘गे’ (Gay) के रूप में अपने मुल्क वापस गए, तो वहां उन पर जुल्म ढाए जाएंगे और उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा। हकीकत यह है कि यूके में पाकिस्तानी मुसलमानों ने इस फर्जीवाड़े के लिए एक पूरी ‘इंडस्ट्री’ खड़ी कर ली है। वकील से लेकर क्लब्स तक, सरकारी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए एक पूरा तंत्र तैयार किया गया है।
दरअसल, बीबीसी की जांच में बताया गया है कि यूके में वीजा नियमों के सख्त होने के बाद, पाकिस्तानियों के पास वहां रुकने का कोई अन्य कानूनी रास्ता नहीं बचा, तो उन्होंने यह नया पैंतरा अपनाया है।
यह पूरा फर्जीवाड़ा कैसे काम करता है, इसे समझिए। जिन पाकिस्तानियों का स्टूडेंट या वर्क वीजा खत्म हो रहा होता है और जो वापस नहीं जाना चाहते, वे ऐसे वकीलों से संपर्क करते हैं जो ‘असाइलम’ की अपील दाखिल करने में माहिर होते हैं। ये वकील इन लोगों को बाकायदा गाइड करते हैं कि कैसे खुद को एक शरणार्थी के रूप में पेश करना है।
इस प्रक्रिया में सबसे पहले अपनी एक नई पहचान गढ़ी जाती है। इसके लिए ये लोग ‘प्राइड परेड’ में शामिल होना शुरू करते हैं। जो पाकिस्तानी अपनी जमीन पर समलैंगिकता को मजहब की तौहीन मानते हैं, वे यूके का वीजा पाने के लिए फर्जी समलैंगिक बनने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाते। केवल परेड में जाने से काम नहीं चलता, इसलिए वे उन क्लब्स में भी जाते हैं जहाँ एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोग आते हैं। वहां उनकी तस्वीरें खींची जाती हैं ताकि यह सबूत के तौर पर दिखाया जा सके कि संबंधित व्यक्ति की ओरिएंटेशन अलग है।
इतना ही नहीं, इसे साबित करने के लिए वे ‘सैम सेक्स रिलेशनशिप’ का सर्टिफिकेट भी पेश करते हैं। इसमें किसी अन्य व्यक्ति से यह लिखवाया जाता है कि उनका संबंधित व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि वहां का सिस्टम इस गड़बड़ी को क्यों नहीं पकड़ पाता? इस धोखाधड़ी में शामिल एक वकील ने अंडरकवर रिपोर्टर को गाइड करते हुए बताया कि ऐसा कोई टेस्ट नहीं है जो किसी के एलजीबीटीक्यू होने की पुष्टि कर सके। अधिकारियों को वही मानना पड़ता है जो वे कहते हैं। बस अपनी बात को सही तरीके से रखना होता है। यदि यूके का होम ऑफिस अपील खारिज भी कर दे, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
बीबीसी के अंडरकवर रिपोर्टर ने पूर्वी लंदन में एलजीबीटीक्यू की एक बैठक में हिस्सा लिया और वह यह देखकर हैरान रह गए कि वहां पूरे इंग्लैंड से लोग आए थे, लेकिन बैठक के बाहर ही एक व्यक्ति ने कहा कि वहां कोई भी वास्तविक एलजीबीटी नहीं है।
यूके में पाकिस्तानियों ने सिस्टम का इस कदर दुरुपयोग किया है कि वर्ष 2025 में आई कुल शरणार्थी आवेदनों में से लगभग 35 प्रतिशत इसी आधार पर थे कि वे एलजीबीटीक्यू हैं और पाकिस्तान में उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा। बीबीसी का ही डेटा बताता है कि 2023 में 578 पाकिस्तानियों ने इसी आधार पर शरण मांगी थी। यह एक पूरी तरह से विकसित इंडस्ट्री बन चुकी है, जो यूके के ‘डायवर्सिटी लॉज’ (Diversity Laws) का शोषण कर रही है।




