उत्तराखंड के हरिद्वार में जो हुआ है ना, उसे सुनकर आप भी बोलेंगे ‘ये क्या चल रहा है बॉस?’ दरअसल उत्तराखंड में मदरसों का ऑफिशियल ‘वेरीफिकेशन ऑपरेशन’ शुरू हुआ, यानी चेकिंग शुरू हुई। और पता चला कि 11,000 बच्चे मदरसे की लिस्ट से गायब हैं! गायब हैं यानी किडनैप नहीं हुए हैं, बल्कि यहाँ ये इंसान के रूप में एग्ज़िस्ट ही नहीं करते, यानी सिर्फ कागज़ों पर घूम रहे थे।
हरिद्वार में 131 मदरसे रजिस्टर्ड हैं। इन सारे मदरसों के रिकॉर्ड के मुताबिक, यहाँ 31,000 बच्चे पढ़ रहे थे। ऑब्वियसली अब जितने ज़्यादा बच्चे, उतनी ज़्यादा सरकारी फंडिंग! माइनॉरिटी कोटे से मिलने वाली तमाम फैसिलिटीज़ और सबसे ज़रूरी मिड-डे मील का खाना और पैसा यहाँ एक्टिव रहा!
इस बीच हरिद्वार के डीएम मयूर दीक्षित के ऑर्डर्स पर एक साथ, ताबड़तोड़ छापे मारे गए। और एक महीने के अंदर जो नंबर्स 31,000 थे, वो घटकर सीधे 19,400 पर आ गए। और 11,000 से ज़्यादा बच्चे हवा में गायब हो गए!
हालत ये है कि कई मदरसा संचालकों ने तो पकड़े जाने के डर से अपने मदरसे की दुकान बंद करने की एप्लीकेशन तक दे दी है!
अब डीएम हरिद्वार ने साफ़ कह दिया है कि जिन भी मदरसों में बच्चों की संख्या फ़र्ज़ी मिली है, और जो लोग बच्चों के नाम पर मिड-डे मील का खाना और पैसा हड़प रहे थे, उनके खिलाफ रिकवरी की कार्रवाई होगी। और पाई-पाई वसूल की जाएगी!
इस पूरे खेल पर अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग धकाते का कहना है कि शिकायतें तो पूरे राज्य से आ रही थीं, लेकिन हरिद्वार में ये सच साबित हो गई। अब बाकी जिलों में भी यही ‘स्कैनर’ चलने वाला है। लेकिन ट्विस्ट अभी बाकी है! सीएम धामी ने एक और बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है।
उत्तराखंड का ‘मदरसा बोर्ड’ 1 जुलाई से ख़त्म हो जाएगा और इसकी जगह अब Uttarakhand Minority Education Authority काम करेगा। जुलाई से सभी मदरसों और माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशंस को Uttarakhand Board से भी परमिशन लेनी ही पड़ेगी।
सीएम धामी का ‘एक देश, एक शिक्षा’ का मैसेज तो सबको समझ आने लगा है। चाहे किसी भी धर्म का बच्चा हो, सबके लिए इक्वल और क्वालिटी एजुकेशन मिले।
तो भाईसाहब, कागज़ों पर बच्चे दिखाकर जो मिड-डे मील डकारने का धंधा चल रहा था, उसपर तो फ़िलहाल उत्तराखंड में ‘फुल स्टॉप’ लग गया है।





