जिस ग्रोइंग इंडियन इकॉनमी को डोनाल्ड ट्रम्प कल तक एक डेड इकॉनमी करार दे रहे थे, आज उसी सो-कॉल्ड डेड इकॉनमी में ट्रम्प को अवसर नजर आ रहा है। ट्रम्प के इसी ‘Dead’ राग की धुन पर राहुल गांधी ने भी अपने सरकार विरोधी गाने सजाए थे। बात ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कंपनी “ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप” तेलंगाना में करीब 1 लाख करोड़ का इन्वेस्टमेंट करना चाहती है। साथ ही साथ 41 हज़ार करोड़ का एग्रीमेंट भी कर दिया गया। सिर्फ़ ट्रम्प ही नहीं, साल 2025 के आख़िर तक आते आते और भी कई नामी कंपनियों ने भारत में निवेश का रास्ता चुना है।
जिसमें- गूगल, माइक्रोसॉफ़्ट, अमेज़ोन ने क़रीब 70 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। वहीं, फॉक्सकॉन, विनफास्ट और शेल एनर्जी जैसी कंपनियों के 65 अरब डॉलर के निवेश का भी प्रस्ताव है। मोटा मोटी देखें तो अभी तक क़रीब 135 अरब डॉलर से भी अधिक विदेशी निवेश की घोषणा हो चुकी है।इसके अलावा, हाल ही में स्टारलिंक की VP ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाक़ात की और एलन मस्क ने भी ट्वीट करके यह जानकारी दी कि वो इंडिया में स्टारलिंक को स्टार्ट करने के लिए एक्साइटेड हैं।कुछ ही दिन पहले माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला ने पीएम मोदी का धन्यवाद देते हुए कहा कि माइक्रोसॉफ्ट इंडिया में $17.5 billion डॉलर AI क्षेत्र में इन्वेस्ट करने जा रहा है। Intel के CEO लिप-बू टेन ने पीएम मोदी से मुलाक़ात की और सीधे तौर पर इंडिया के सेमी कंडक्टर प्रोग्राम की तारीफ़ करते हुए इस मिशन में जुड़ने का ऐलान किया।कांग्नीज़ेंट के CEO रवि ने भी पीएम से मुलाक़ात की और भारत के AI मिशन में हर संभव मदद, और अपने इंडियन ऑपरशन को अलग अलग राज्यों में फैलाना का भी ऐलान किया। एमेजॉन ने भी भारत में साल 2030 तक $35 billion इन्वेस्ट करने का ऐलान किया।
ये सिर्फ़ पिछले 6 महीने की कहानी है। वही टाइमलाइन जब ट्रम्प ने इंडिया को डेड इकॉनमी कहा था। और आज उसी इंडिया की डिमांड वैश्विक बाजार में बड़े स्तर पर है। आपने एक meme देखा होगा। – अमेरिका कहता था क्या है बे, अब इंडिया कहते है क्या है तू का वीडियो लगा देंगे। ये भी सच्च है कि आज का भारत वैश्विक बाजार में आँख से आँख मिला के बात करता है। ट्रम्प ने जब भारत के ऊपर 50% टैरिफ का ऐलान किया तो RCEP यानी (Regional Comprehensive Economic Partnership) का दरवाजा भारत के लिए खुलने लगा था। यहाँ तक अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी साश ने ट्रम्प के टैरिफ मॉडल को लताड़ दिया था।बॉस, फिलहाल के लिए ट्रम्प और उसकी चोरी की धुन पर भारत में मोदी विरोध का गाना गानेवाले इतना ही समझ ले, कि ट्रम्प ने जिसे डेड कहा था, वो भारत जल्द ही दुनिया में “डैडी इकॉनमी” बनकर उभरने जा रहा है।




