लेफ्ट लिबरल की तरफ़ से एक चलन खूब चलता है और वो है पत्रकारिता की आड़ में सनातनी आस्था, हिंदुओं और उनके प्रतीकों को गाली देना। लेकिन अब इन लोगों पर कोर्ट की वक्र दृष्टि पड़ चुकी है। ताजा मामला है, राणा अय्यूब के कुछ विवादित पोस्ट का। इन पोस्ट में राणा अय्यूब ने हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। अब इन्हीं पोस्ट को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने राणा अय्यूब पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने साफ़ और सीधे शब्दों में कहा है कि हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर पर कई ट्वीट ‘आपत्तिजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक’ थे। इसके बाद कोर्ट ने राणा अय्यूब को नोटिस भी जारी किया है और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है इसको लेकर उचित कार्रवाई हो, 9 अप्रैल तक राणा अय्यूब को अपना बयान दर्ज करवाना होगा। अब अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।
इस मामले में एडवोकेट सचदेवा ने सबसे पहले साकेत कोर्ट का रूख किया था जहाँ राणा अय्यूब के इन सारे पोस्ट पर आईपीसी की धारा 153A, 295Aऔर 505 के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए गए। बाद में दिल्ली पुलिस ने कहा कि एक्स पर ये सारे पोस्ट अवेलेबल नहीं है। इसके बाद एडवोकेट सचदेवा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में वर्तमान याचिका दायर कर ‘X’ से अय्यूब के पोस्ट हटाने की मांग की है।
#BREAKING: Delhi High Court, while hearing a plea against Journalist Rana Ayyub over alleged anti-India social media posts between 2013 and 2017, observed that certain tweets on Hindu deities and Vinayak Damodar Savarkar were 'offensive, provocative and communal.' The court… pic.twitter.com/1y9zddIMsu
— IANS (@ians_india) April 8, 2026
अब आपको 2002 के गुजरात दंगों से अपना करियर बनाने वाली इस इस्लामी पत्रकार के कुछ पोस्ट बताते हैं –
अय्यूब के साल 2013 के ट्वीट में लिखा था, “रावण ने सीता को छुआ तक नहीं, जबकि वह छू सकता था। राम सीता के लिए खड़े नहीं हुए, जबकि उन्हें होना चाहिए था। रावण 1 राम 0।”

अक्टूबर 2014 में, अय्यूब ने अली सरदार जाफरी का एक शेर कोट किया था, जिसमें लिखा था, “गरीब सीता के घर पे कब तक रहेगी रावण की हुक्मरानी, द्रौपदी का लिबास उसके बदन से कब तक छीना करेगा”।

साल 2015 में वीर सावरकर को लेकर राणा अय्यूब ने लिखा “तो वीर सावरकर ने हिंदुत्व राष्ट्रवाद के एक जरूरी हिस्से के तौर पर रेप की वकालत की।”

और इसकी नीचता यहाँ तक नहीं रुकी इसने साल 2016 में एक लड़के की तस्वीर के साथ भारतीय सेना पर आपत्तिजनक पोस्ट किया।

ये वही लोग हैं जो भारत में रहकर यहाँ की फीडल ऑफ स्पीच का दुरुपयोग करते हैं और बाद में कहते हैं कि भारत में डेमोक्रेसी नहीं है। ये लोग ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर रोते हैं और ऑपरेशन सिंदूर, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर सवाल खड़े करते हैं। तो बॉस, अब वो समय लद चुका है, अब आपको जवाब भी देना होगा और पत्रकारिता के ढोंग से बाहर भी निकलना होगा।





