केरल ड्रग कैपिटल

Kerala Drug Crisis: केरल है देश का नया ड्रग कैपिटल, पंजाब से 3 गुना केस क्यों और कैसे?

Summary
केरल अब ड्रग्स के मामले में भी देश में टॉप पर है। वहाँ पंजाब के मुकाबले लगभग ढाई गुना ड्रग्स के केसेज सामने आ रहे हैं।

18 जनवरी 2025 का दिन था! केरल के कोझिकोड के एक कस्बे थमरस्सेरी में सुबेदा आराम कर रही थी। सुबेदा की कुछ ही समय पहले सर्जरी हुई थी, इसलिए सुबेदा ने अपनी बहन के घर रुकना चुना था। कुछ ही देर में सुबेदा पर एक शख्स ने कुल्हाड़ी से वार किया और बर्बरता से सुबेदा की हत्या कर दी। हत्या करने वाला और कोई नहीं बल्कि उसका ही 25 साल का बेटा था। बेटे का नाम है आशिक! 

सुबेदा का बेटा आशिक सुबेदा से लड़ता था और रुपयों की माँग किया करता था। लड़ने और पैसे मांगने का कारण ये था कि आशिक़ एक ड्रग एडिक्ट था और कई बार नशामुक्ति केन्द्रों में भी भेजा जा चुका था। 

ये सिर्फ घटना नहीं है बल्कि उस भयावह सच्चाई का एक छोटा सा हिस्सा है, जिसे ना देश की मीडिया दिखाना चाहती है और ना उसे दिलचस्पी है। 

दिलचस्पी नहीं है क्योंकि ये भयावह कहानी है god’s own country कहे जाने वाले ‘केरल’ की। 

साक्षरता और ‘we eat beef’ के राग के बीच ड्रग्स ने केरल के समाज को जकड़ लिया है। केरल का युवा इस नशे का सबसे बड़ा शिकार है। हालात इतने बुरे हैं कि केरल ड्रग्स के मामले में नित नए रिकॉर्ड गढ़ता जा रहा है। 

स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा आपको मैं जो आँकड़े बताने जा रही हूँ, उससे ही लग पाएगा। अब तक आपके मन में ड्रग्स का नाम लेते ही पंजाब की तस्वीरें उभरती होंगी। हेरोइन के पैकेट हों या चिट्टे की पुड़िया, इंजेक्शन या फिर कफ़ सिरप की बोतलें, इनकी तस्वीरें याद आती होंगी। 

लेकिन केरल पंजाब को कबका पीछे छोड़ चुका है। अकेले 2024 में ही केरल में 27 हजार NDPS यानी नारकोटिक्स से जुड़े मामले दर्ज किए गए। इसी दौरान पंजाब में लगभग 9000 मामले NDPS में दर्ज हुए। यानी केरल में अब ड्रग मामलों का स्तर पंजाब से भी 3 गुना ज्यादा हो चुका है। 

साक्षरता के मामले में भारत में टॉप पर रहने वाला केरल अब ड्रग्स के मामले में भी देश में टॉप पर है। केरल का कोई भी कोना ड्रग्स के मामले में एक दूसरे से पीछे नहीं है। केरल में 14 जिले हैं और इनमें से सबमें 2024 में 500 से ज्यादा ड्रग्स के मामले दर्ज हुए हैं। 

वामपंथी शासन वाले केरल में जनसंख्या के हिसाब से पंजाब के मुकाबले लगभग ढाई गुना ड्रग्स के केसेज सामने आ रहे हैं। पंजाब में जहाँ 1 लाख जनसंख्या पर 30 केस सामने आते हैं तो वहीं केरल में 1 लाख की जनसंख्या पर 78 मामले सामने आ रहे हैं। 

और केरल में ये समस्या तो पिछले कई सालों से धीमे-धीमे बढ़ रही थी लेकिन पिछले 4 सालों में यह भयानक रूप ले चुकी है। पिछले 4 सालों में केरल में 87,101 ड्रग्स के केसेज सामने आए हैं। यह केसेज पिछले 4 सालों के मुकाबले 130% ज्यादा है। 

केरल के अखबार और न्यूज वेबसाइट ड्रग मामलों में गिरफ्तारी की खबरों से पटे पड़े हैं। और केरल की इस समस्या का सबसे बड़ा शिकार आपको पता है कौन हो रहा है! ये है केरल का भविष्य यानी केरल का युवा! 

वामपंथी दलों की हिंसक राजनीति जैसे पहले ही केरल के युवाओं को बर्बाद करने लिए कम थी, जो अब बड़ी संख्या में वो इन ड्रग्स का शिकार बन रहे हैं। युवा ही नहीं बल्कि अब तो बच्चे भी केरल में ड्रग्स का शिकार हैं। 

डाटा बताता है कि केरल में 7.5 लाख युवा और 75,000 से ज्यादा बच्चे ड्रग्स का शिकार हैं। केरल की ही एक्ससाइज विभाग की स्टडी बताती है कि नशा करने वाले 80% युवाओं को इसकी आदत उनके दोस्तों ने लगवाई है। 

इसी स्टडी ने बताया कि ये बच्चे या युवा ज्यादातर समय ड्रग्स या नशा दोस्तों के ही साथ लेते हैं। यानी केरल में बच्चे और युवा दूसरे नशों का शिकार होते जा रहे हैं और यहाँ के वामपंथी मुख्यमंत्री फिलिस्तीन के बच्चों के लिए चिंतित हैं और धरने दे रहे हैं। 

AIIMS की एक स्टडी के अनुसार, केरल में 3 लाख 67 हजार लोग गांजे का सेवन करते हैं इसके अलावा 2 लाख 43 हजार लोग अफीम जैसे नशे भी करते हैं। कोकेन लेने वालों की संख्या भी हजारों में है। दूसरे नशे भी केरल में धडल्ले से बिक रहे हैं। 

केरल का ड्रग्स के चक्कर में शारीरिक और मानसिक रूप से ही बर्बाद नहीं हो रहा बल्कि उसका करियर भी तबाह हो रहा है। 2023 से लेकर 2025 तक एक हजार से ज्यादा छात्र केरल में नशे के चक्कर में गिरफ्तार हो चुके हैं। 

लेकिन मामला सिर्फ यही नहीं रुकता। इस नशे ने केरल के समाज को भी दीमक की तरह खोखला करना शुरू कर दिया है। जिन सुवेदा की कहानी मैंने आपको शुरुआत में बताई, वह अकेली ड्रग्स के नशे से उपजे गुस्से की शिकार नहीं हैं। 

एक रिपोर्ट कहती है कि 2025 के पहले 2 महीने में केरल में हुई हत्याओं में आधी हत्याओं में ड्रग्स का कहीं ना कहीं लिंक था। केरल से ऐसी ऐसी घटनाएँ सामने आईं हैं जो आपकी आत्मा तक कंपा देंगी। 

ऐसे ही एक मामले में जनवरी 2024 में 36 वर्षीय मोसेस बिपिन ने अपनी 62 वर्षीय माँ नलिनी को बाँधकर आग लगा दी, जिससे उनकी मौत हो गई। मोसेस से पूछताछ की गई तो उसने गाँव वालों को चाकू दिखाकर धमकाया। पता चला कि घटना के दौरान मोशेस ने शराब पी हुई थी। 

मैं आपको ऐसी ना जाने कितनी घटनाएँ बता सकती हूँ, जिनमें नशे के चलते पूरा एक परिवार बर्बाद हो गया। लेकिन ज्यादा चिंता की बात है कि ये समस्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है और उस पर कोई एक्शन नहीं हो रहा है। 

2025 में अगस्त तक ही 25 हजार से ज्यादा केस केरल में NDPS के दर्ज हो चुके हैं। ऐसे में साल के अंत तक क्या हाल होगा, ये अंदाज लगाया जा सकता है। लेकिन इन सबके बीच केरल की वामपंथी सरकार का ध्यान इस समस्या पर नहीं है। 

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन क्यूबा के कथित क्रान्तिकारी चे ग्वेरा को श्रद्धांजलि देकर अपना टाइम व्यतीत कर रहे हैं। और वो एक्शन लें भी कैसे, जब कम्युनिस्ट नेता ही इस काम में पकड़े गए हैं। 

दिसम्बर 2022 में DYFI का एक गुंडा जिनेश गिरफ्तार हुआ था, उसके फोन में कई बच्चियों को ड्रग्स देने के सबूत मिले थे। तो जहाँ कुँए में ही भांग पड़ी है, वहाँ भला ड्रग्स पर कोई कार्रवाई क्यों करेगा। 

लेकिन ये समस्या दिन प्रतिदिन विकराल रूप लेते जा रही है और इसका कोई अंत नहीं है! शायद केरल की वामपंथी सरकार उस दिन का इन्तजार कर रही है, जब उड़ता पंजाब की तरह उड़ता केरल नाम की कोई मूवी बन जाए!

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