लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के विदेशी कनेक्शन किसी से छुपे नहीं हैं। कभी उनका नाम जॉर्ज सोरोस के साथ सामने आता है, कभी Cambridge Analytica में, तो कभी विदेशी संस्थानों में भाषण देते हुए दिखा दिया जाता है। और कभी-कभी तो खुलेआम विदेशी ताकतों से भारत में लोकतंत्र के तख्तापलट की मदद मांगते हुए भी उन्हें रंगे हाथ पकड़ा गया है।
याद होगा आपको, कुछ दिन पहले 7 अगस्त को राहुल गांधी एक PPT लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आये थे। उन्होंने बड़ी धाकड़ अंदाज़ में वोट चोरी के आरोप लगाए थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस PPT का कनेक्शन कहाँ से निकला? ये कनेक्शन निकला है म्यांमार से।
एक चतुरबुद्धि X यूजर, ‘खुरपेंच’ ने एक बेबाक थ्रेड पोस्ट की, जिसमें दावा किया गया कि राहुल गांधी द्वारा पेश की गई PPT में म्यांमार का टाइम जोन साफ-साफ दिख रहा है।
खुरपेंच ने विस्तार से बताया कि तीनों भाषाओं – हिंदी, अंग्रेज़ी और कन्नड़ – में अपलोड की गई PDF की ‘Create Date’ में ‘MMT’ यानी म्यांमार टाइम जोन +6:30 दिख रहा है। जबकि भारत का अपना टाइम जोन है IST (+5:30)।
खुरपेंच ने आगे जाकर खुलासा किया कि ये PDF Adobe Illustrator से तैयार की गई थी और इसका Metadata खुद ब खुद उस कंप्यूटर के टाइमजोन को कैप्चर करता है, जिस पर फाइल बनाई गई थी। जांच में पाया गया कि जब ये फाइलें Export की गईं, उस वक़्त टाइमजोन +6:30 MMT था। इसका साफ मतलब ये हुआ कि यह PPT म्यांमार में तैयार की गई थी।
यहां एक बात और गौर करने लायक है – राहुल गांधी ने जो प्रेजेंटेशन प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया था, और जिसके आधार पर वोट चोरी के आरोप लगाए गए थे, वह PPT और सारे सबूत उनकी आधिकारिक वेबसाइट RahulGandhi.in पर हिंदी, अंग्रेज़ी और कन्नड़ में उपलब्ध हैं। यानी ये सब दस्तावेज खुलेआम सार्वजनिक उपलब्ध हैं।
खुरपेंच ने अपनी खोजी थ्रेड में यह भी बताया कि इन PDF को Google Drive लिंक से शेयर किया गया था, जिससे Metadata में कोई बदलाव नहीं हो सका।
अब इस चक्कर में एक अहम बात भी समझ लें कि ये Metadata आखिर होता क्या है?
जब हम अपने कंप्यूटर पर कोई फाइल सेव करते हैं – चाहे वह image हो, document हो, video हो, audio हो, या PDF – उसके साथ उसकी पूरी पहचान दर्ज हो जाती है। फाइल के बारे में तारीख, समय, स्रोत, उसे कैसे बनाया गया, कौन-सा सॉफ्टवेयर उपयोग हुआ, सब कुछ Metadata में दर्ज हो जाता है।
इन्हीं जानकारी को हम फाइल की ‘जन्मपत्री’ भी कह सकते हैं।
ये Metadata सिस्टम को यह समझने में मदद करता है कि फाइल क्या है और उसे कैसे उपयोग करना चाहिए। साथ ही, यह फाइल्स को organize और search करने में भी सहूलियत देता है।
लेकिन Forensics में तो Metadata का महत्व और भी बढ़ जाता है। यही Metadata किसी भी फाइल के Source, Creation Date, Time Zone और Process की डिटेल्स भी रखता है। यही Metadata किसी भी प्राइवेसी खतरे का गुप्त रास्ता भी बन जाता है।
ठीक वैसे ही जैसे खुरपेंच ने राहुल गांधी की PPT का Fuse Conductor निकालकर सबके सामने रख दिया।
जैसे ही ये पड़ताल सोशल मीडिया पर वायरल हुई, कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत आईं और X पर जवाबी पोस्ट डाल दी। उन्होंने आदतन आरोप लगाया कि बीजेपी IT सेल झूठ फैला रही है। पर सुप्रिया के पास इस दावे को साबित करने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि खुरपेंच का BJP से कोई संबंध है।
सुप्रिया ने सफाई में लिखा कि राहुल गांधी का ये प्रेजेंटेशन भारत में ही बनाया गया था।
सुप्रिया श्रीनेत ने साफ-साफ Myanmar के टाइमजोन को ‘सॉफ्टवेयर बग’ और ‘सिस्टम सेटिंग की गड़बड़ी’ का तमगा दे दिया।
सुप्रिया श्रीनेत को खुरपेंच के जवाब में जो कुछ CHATGPT से मिला उन्होंने उसे ट्विटर पर उढ़ेला और अपनी सफ़ाई में इस पूरे आरोप को bug बता दिया। लेकिन उन्हें शायद ये नहीं मालूम कि जिसे सुप्रिया ‘bug’ बता रही हैं, वह 14 साल पुराना Lightroom का bug था – 2011 में आया था – और आज तक फिक्स हो चुका है।
खुरपेंच ने लिखा है कि
“जरा गूगल करके बताइए कि Adobe में कौन सा bug आया कि वो चुपके से Myanmar का Timezone Metadata में डाल देता है? उसके बाद हम आपको पांच वाला टेढ़ा मेढ़ा खिलाएँगे।”
खुरपेंच के दावे पर जांच पड़ताल अभी हो सकती है, लेकिन उनके इस दावे पर संदेह करना इस कारण भी नहीं बनता है क्योंकि अक्सर विदेशों से कांग्रेस का वास्ता निकलता आया है।
आपको ध्यान होगा कि राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट को रीट्वीट कर के रीच बढ़ाने में जो बॉट्स इस्तेमाल किए जाते थे वो भी बाहरी देशों से ही ऑपरेट हो रहे थे। इन्हें RT करने वालों में कजाकिस्तान, रूस और इंडोनेशिया के लोग शामिल मिले थे।
2019 के लोकसभा चुनाव के समय फेसबुक ने ऐसे करीब 687 पेजों को बैन कर दिया था क्योंकि उनकी गतिविधियां संदिग्ध पायी गई थी ।
तुर्की के इस्तांबुल कॉन्ग्रेस सेंटर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का ऑफिस है, जिसका मुखिया कांग्रेस नेता मोहम्मद यूसुफ़ खान हैं। बावजूद इसके, कांग्रेस ने इस खुलासे को लेकर पत्रकारों पर FIR दर्ज करवाई थी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के बीच 7 अगस्त 2008 को बीजिंग में एक MoU पर हस्ताक्षर हुए थे। और कांग्रेस पार्टी ने इस MoU की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी कभी जरूरी नहीं समझी।
इस सबके अलावा, राहुल गांधी की विदेश यात्राएँ चर्चा में रहती ही हैं, तो ऐसे में अब म्यांमार से भी कांग्रेसी आईटी सेल के सामान तैयार होने के आरोप लग रहे हैं तो जायज़ सी बात है कि सवाल तो उठेंगे ही।
चाहे जो भी हो, लेकिन राहुल गांधी के PPT से लगाए गए vote chori के आरोप का टारगेट तो यही था कि भारत की जनता का यहाँ की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से ही विश्वास उठ जाए।
हम नेपाल, बांग्लादेश जसिए अपने पड़ोसी देशों में हो रहे रेजिम चेंज की घटनाओं को तो देख ही रहे हैं। उससे तो यही शक जाता है कि ये सारी चीजें बाहर से संचालित हो रही हैं और उसमें एक PDF का नाम आना एक छोटी सी कड़ी हो सकती है, और शायद कांग्रेस को यही डर है कि इस छोटी गलती से उनकी कोई बड़ी चोरी ना पकड़ी जाए।





