ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के साथ मिल कर पाकिस्तान को कड़वी दवा पिलाना चालू कर दिया है। जी, सही पढ़ा आपने। भारत ने पाकिस्तान पर फार्मा के मामले में दोहरी मार मारी है। ये कहानी सामने आई है ट्विटर पर एक अफगानिस्तान के निवासी के ट्वीट से और इसके केंद्र में है पैरासिटामोल की दवा।
12 जनवरी को फ़ज़ल अफगानी ने बताया कि उन्होंने हाल ही में भारत में बनी पैरासिटामोल खरीदी थी और उसने 10 मिनट में उनका सर दर्द ख़त्म कर दिया, ये पैरासिटामोल जहाँ सिर्फ़ 10 अफगानी की थी, वहीं तुर्की की बनी हुई पैरासिटामोल 40 अफगानी की थी. यानी एक चौथाई दाम में बढ़िया रिजल्ट मिला।
Indian paracetamol fixed my headache in 10 minutes. Now the real question: how long will it take for India to fix the bigger headache between India and Afghanistan, permanently? 😂 https://t.co/HXIG1lcurd
— Fazal Afghan (@fhzadran) January 12, 2026
लेकिन इस कहानी में पाकिस्तान कहाँ से आया? बताता हूँ। दरअसल, नवम्बर-दिसंबर 2025 महीने में जब पाकिस्तान ने अफगानियों पर बम बरसाए और लगातार बॉर्डर बंद किए तो तालिबान की सरकार ने पाकिस्तान से आने वाली दवाइयों पर बैन लगा दिया।
इस बैन ने पाकिस्तान की फार्मा इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी, क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान की लगभग 70% दवाईयां पाकिस्तान से ही आती थीं। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, पाकिस्तान ने 2024 में 187 मिलियन डॉलर की दवाईयां अफ़ग़ानिस्तान को भेजी। अब इस पर ताला लग गया।
लेकिन इस बैन के तुरंत बाद भारत ने अफ़ग़ानिस्तान दवाइयां भेजना चालू कर दिया। जाइडस जैसी कंपनियों ने 100 मिलियन डॉलर यानी लगभग 900 करोड़ रुपए का सप्लाई कांट्रैक्ट भी हासिल कर लिया और अब इसका असर फजल की पोस्ट से दिख भी गया है। लेकिन भारत ने दूसरी तरफ़ पाकिस्तान की फार्मा को अप्रैल, 2025 में ही झटका दे दिया था। पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के बीच पूरी तरह से ट्रेड बंद हो गया था। पाकिस्तान में बनने वाली दवाइयों का लगभग 40% रॉ मटेरियल भारत से ही जाता था। इन्हें api कहते हैं, कई दवाईयां भी भारत से ही जाती थीं।
जब ये बंद हुआ तो पाकिस्तान में दवाई की कीमतों के 1000% तक बढ़ने की आशंका जताई गई थी। तो जहाँ उसकी मार्केट भी भारत ने छीन ली तो दूसरी तरफ़ सप्लाई भी बंद कर दी। इस डबल मार से पहले परेशान पाकिस्तान की फार्मा इंडस्ट्री बड़े क्राइसिस में है।




