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10 Red Flags: अपने आस-पास छिपे जिहादी को कैसे पहचानें , लाल किले की घटना का सबक

Summary
आतंकवाद के वो 10 रेड फ्लैग्स, जिन्हें अगर समय पर पहचान लिया जाए तो Red Fort Blast जैसी ट्रेजेडी, Al Falah University जैसा ‘डॉक्टर टेरर मॉड्यूल’ और Kashmir–Pahalgam नेटवर्क जैसे ऑपरेशन समय रहते रोके जा सकते हैं।

अगर कभी आपके आस पास से कोई आतंकवादी पकड़ा जाता है तो आपकी जिंदगी भी पूरी तरह से बर्बाद हो सकती है। अगर आप कॉलेज या यूनिवर्सिटी से हैं तो उस आतंकवादी के साथ के स्टूडेंट्स से भी पूछताछ होती ही है। और अगर आप नौकरी पेशा वाले आदमी हैं तो आपकेगली-मोहल्ले भी जांच के दायरे में आ जाते हैं। जैसा कि दिल्ली में लाल क़िले के पास हुए धमाके के बाद हो भी रहा है।

आप हरियाणा में रोहतक की रहने वाली डॉ. प्रियंका शर्मा को भूले तो नहीं होंगे। लाल क़िले के पास जब धमाका हुआ तो डॉक्टर शर्मा को भी जम्मू-कश्मीर में काउंटर इंटेलिजेंस की टीम ने हिरासत में लिया और आतंकी मॉड्यूल में गिरफ्तार डॉ. आदिल अहमद के बारे में पूछताछ की गई। जानते हैं  डॉक्टर शर्मा  की गलती क्या थी? सिर्फ़ इतनी कि उन्होंने वो दस रेड फ्लैग्स नहीं देखे; जो एक आतंकी के इर्द-गिर्द हमेशा होते हैं। वो दस चेतावनियाँ, जो आज मैं आपको बताऊँगा। क्योंकि डॉक्टर प्रियंका की जगह आप भी हो सकते हैं, मैं भी हो सकता हूँ… या हमारा कोई अपना भी।

दिल्ली लाल किले का धमाका: सिर्फ़ एक चेतावनी?

कुछ दिन पहले दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके को सिर्फ एक ट्रेजेडी कहकर नहीं भुलाया जा सकता है, बल्कि ये आने वाले और भी भयानक समय की चेतावनी है। इस घटना में शामिल आरोपी कोई अनपढ़ आतंकी नहीं थे, बल्कि पढ़े लिखे डॉक्टर थे, जिनके पास कॉलेज यूनिवर्सिटी की भारी भरकम डिग्रियाँ थीं। उन्होंने अपनी लैब और केमिकल्स तक पहुँच का इस्तेमाल करके आतंकी हमले की योजना बनाई। यह आतंकवाद का वो चेहरा है जो पढ़ा लिखा है, समाज से जुड़ा हुआ है और बेहद आम सी जगहों पर हमारे और आपके बीच मौजूद है।

आतंकी संगठनों का बढ़ता नेटवर्क  

लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद और इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे संगठन अब और भी आगे बढ़ चुके हैं। वे नई टेक्नोलॉजी, एन्क्रिप्टेड ऐप्स और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके युवाओं को रेडिकलाइज़ कर रहे हैं, खासकर कॉलेज के छात्रों को। केरल से लेकर कश्मीर तक, ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ छात्रों को ऑनलाइन ग्रुप्स से चुना जाता है, मस्जिद और मदरसों से उन्हें रिक्रूट किया जाता है  और जरूरत पड़ती है तो देशी- विदेशी मौलवियों द्वारा ऑनलाइन ट्रेनिंग या वर्कशॉप से उन्हें कट्टर बनाया जाता है।

कॉलेज के छात्रों के लिए रेड फ्लेग्स

अगर आप कॉलेज में पढ़ रहे हैं, तो इन रेड फ्लैग्स को अपने आस पास जरूर ध्यान से तलाशिये और फिर उन्हें इग्नोर करने के बजाय उन पर नजर भी रखिए –

ये रेड फ्लैग्स कुछ इस तरह से हैं, जैसे-

1: कोई लड़का/लड़की अचानक जब दोस्तों से कट जाए, और अलग-थलग रहने लगे। यानी हँसता खेलता घुल मिलकर रहने वाला आपका कोई दोस्त अचानक से इंट्रोवर्ट हो जाए और आप जब उससे कुछ पूछते हैं तो वो जरा सी बात पर चिढ भी सकता है।

2: उसका बिहेवियर एकदम से रहस्यमय हो जाए, उसके हाव भाव में मतलब की बात कम और राज़ ज़्यादा नजर आने लगें। यानी जो दोस्त आपसे अपनी हर बात शेयर करता था, उसके मन की बात अब आप नहीं पढ़ पा रहे हैं और न ही वो किसी से कुछ शेयर कर रहा है।

3: कट्टरपंथी किस्म के विचारों में अचानक दिलचस्पी बढ़ जाए। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे सोशल मीडिया पर आ रहे नफरती भड़काऊ सन्देश, वीडियो या किसी मौलवी की शेरो शायरी और उदाहरण के लिए डॉक्टर जाकिर नाइक जैसों को देखने सुनने का चस्का उसे लग जाए। आप उस पर कुछ राय रखें, तो आपसे दोस्ती तोड़ने को भी तैयार हो जाए।

4: सोशल मीडिया पर अजीब-अजीब, रेडिकल टाइप का कंटेंट डालना शुरू कर दे। यानी कि अब तक आपका जो दोस्त इस तरह का कंटेंट सिर्फ़ देख रहा था अब वो ऐसा कंटेंट फ़ख़्र के साथ क्रिएट और शेयर भी करने लगा है। कभी बाबरी की शहादत पर मातम जताता है तो कभी कश्मीर की आजादी की चिंता उसे सताने लगे- और आपके जिस दोस्त ने अंग्रेजी कभी भूल से भी ना पढ़ी-सुनी हो, वो आपको अरबी लहजे में ये नारा सुनाते दिखे कि  “From the river to the sea, Palestine will be free.” जिस इंसान को गली-मोहल्लों के कॉमन सिविक इश्यूज से ज्यादा गाजा और फ़िलिस्तीन में मुस्लिमों का दर्द नजर आने लगे, समझिए कि ये भी एक रेड फ्लैग है।

5: कॉलेज की sensitive labs या केमिकल वाले ऐसे रूम में उसकी पहुँच बढ़ने लगे जहाँ आमतौर पर हर कोई नहीं जाता। जिन केमिकल्स, फ़ॉर्मूलाज, इक्विपमेंट से आप एकदम अनजान हैं, उनके इस्तेमाल में ये अचानक से एक्सपर्ट होने लगा है।

6: बिना बताए गायब हो जाना। सिर्फ क्लास बंक नहीं, बल्कि पूरा दिन हवा। यानी आपका दोस्त अचानक से नजर आना बंद हो जाता है या बीच बीच में तीन दिन, सात दिन, पंद्रह दिन, चालीस दिन या फिर 120 दिन तक किसी ऐसे कैम्प के बहाने अपना  रेगुलर शेड्यूल छोड़ दे, जिस कैम्प में सिर्फ वही जा सकता है; आप नहीं।  

7: यहाँ-वहाँ चुपचाप ट्रैवेल करना… दोस्तों को भी भनक नहीं कि बंदा गया कहाँ। यानी कि आपका वो दोस्त, जिसके साथ आप गोवा जाने की योजना बनाते थे, अब वो ख़ुफ़िया ढंग से कई फेमस या अनजान लोकेशंस पर जाने लगा है और इसकी आपको भनक तक न हो। सीरियल बॉम ब्लास्ट से लेकर के 26/11 जैसे आतंकवादी हमलों को आतंकवादी अंजाम दे सके क्योंकि वो उन्हें इन लोकेशंस की किसी ना किसी तरह से रेकी कर चुके थे।   

8: सोशल या राजनीतिक मुद्दों पर एकदम टेढ़ी, एक-साइड की नफ़रत दिखने लगे मतलब उसकी बातों में बैलेंस एकदम ज़ीरो हो जाए। किसी विमर्श के दाएं बाएं से उसे कोई फर्क नहीं, वो बस अपनी एक लाइन पकड़कर उसे ही सही साबित करने  में लगा रहता है। जैसे आपने कई लोगों को पुलवामा के आतंकी हमले पर भी कॉन्सपिरेसी थ्योरी फैलाते हुए देखा ही है।

9: नवां रेड फ्लैग है ऑनलाइन दुष्प्रचार- खासकर फ़ौज या सरकारी संस्थानों पर अनाप-शनाप आरोप लगाकर विदेशी नैरेटिव को हवा देना। अपना या अपनी कम्युनिटी का विक्टिमहुड जगह-जगह प्रचारित करना और हर डिस्कशन के सेंटर में अपने मजलूम होने की कहानी को फिट करना। और इन सभी बुरी बातों के लिए देश, इतिहास, लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं और समाज को कुछ इस तरह से दोषी बताना जिससे आप भी अपराधबोध से ग्रसित हो जाएं। जैसे कि रामनवमी की झांकियों पर पथराव होने या किसी मंदिर के टूटने पर भी उसका दोष हिंदुओं पर ही थोपते रहना।

10: और हाँ, दसवां और आखिरी रेड फ्लैग- अचानक से हथियार, ड्रोन, विस्फोटक या Surveillance-tech में उस दोस्त की “रिसर्च” के नाम पर दिलचस्पी बढ़ जाना।

अब आप सोचिए, कि जो रेड फ्लैग्स मैंने आपको बताए, क्या यही सब आपको उन लोगों में नजर नहीं आए जब आपने सुना कि  बुरहान वानी 15 साल का था जब उसने अपने एग्जाम से दस दिन पहले हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल होने के लिए घर छोड़ दिया था। उससे पहले तो वो डॉक्टर बनना चाहता था। लेकिन बाद में वो सोशल मीडिया पर ऐक्टिव होकर युवाओं को अपने आतंकी गिरोह में भर्ती करने लगा था। क्या आपको जाकीर मूसा में ये दस रेड फ्लैग्स नहीं दिखते जो 17 साल का था जब उसने  कश्मीर के त्राल इलाके से घर छोड़कर हिजबुल मुजाहिदीन जॉइन कर लिया था। जबीउद्दीन अंसारी – महाराष्ट्र के बीड़ का एक इलेक्ट्रिशियन, जो आप और हम जैसों के घरों में आकर के कोई स्विच बोर्ड रिपेयर करता होगा, अचानक दो साल के लिए वो ग़ायब हो गया था।

फिर कुछ दिन के लिए वो घर आया और निकल गया। उसके बाद वो सीधा कराची में दिखा था, जहाँ वो लश्कर के कंट्रोल रूम से मुंबई हमले के आतंकी कसाब को दिशा निर्देश दे रहा था। उसने ही अजमल कसाब समेत 10 पाकिस्तानी आतंकियों को बम्बइया लहजे वाली हिंदी सिखाई थी और मुंबई में लोगों से घुलने मिलने की ट्रेनिंग भी दी थी।

डॉक्टर मुजम्मिल, समेत फरीदाबाद की अल फ़लाह यूनिवर्सिटी के बाक़ी के डॉक्टर के नाम सुनने पर क्या आपको ये रेड फ्लैग्स नहीं दिखते, जो सब के सब पढ़े लिखे डॉक्टर थे, केमिकल्स की जानकारी भी रखते थे, नमाज भी पढ़ते थे और आख़िरकार रेड फोर्ट के पास उन्हीं में से एक डॉक्टर उमर नबी ने फिदायीन हमला भी कर दिया।  

ऑफिस या कैंपस के ये सिग्नल मामूली नहीं होते, कहानी की शुरुआत अक्सर इन्हीं लक्षणों से पता चलती है जिन्हें हम अक्सर नोटिस नहीं करते हैं।  सवाल आता है कि जब कभी ऐसे रेड फ्लैग्स अपने आस पास दिखें तो हमें या आपको क्या करना चाहिए?

अगर आपको ऐसे संकेत दिखें, तो उन्हें नज़रअंदाज़ न करें। अपने आसपास के बड़े बुजुर्ग, भरोसेमंद टीचर या सहकर्मी, कॉलेज या वर्कप्लेस के एडमिन्सिट्रेशन, लोकल पुलिस या NIA हेल्पलाइन को रिपोर्ट करें। अगर ज़रूरत हो तो अपनी पहचान छुपाकर भी रिपोर्ट कर सकते हैं। क्योंकि ऐसी हर रिपोर्ट मायने रखती है। यदि किसी मेनस्ट्रीम रिपोर्टिंग एजेंसी से आपको सहयोग न मिले तो इस देश और समाज की चिंता करने वाले कई सामाजिक संगठन भी हैं जो आपकी राह आसान कर सकते हैं। आपके और हमारे ऐसे लक्षणों को इग्नोर कर देने के कारण ही  आतंकी नेटवर्क फलते-फूलते हैं, लेकिन जागरूकता और फ़ौरन लिए गए एक्शन से उनकी जड़ें काटी जा सकती हैं।

और मैंने जो रेड फ्लेग्स आपको बताए हैं, ये रेड फ्लैग्स ही हैं, इसका ये मतलब नहीं होता कि इन लक्षणों वाला हर दोस्त या को-वर्कर आतंकवादी ही होगा और आप अपने दोस्त की मरम्मत ही कर दें। क्योंकि ये भी संभव है कि किसी निजी कारण से भी उसके व्यवहार में इनमें से कोई लक्षण दिखाई देने लगे। लेकिन जब कभी ऐसा हमें अपने आस पास दिखे- तो हमें चौकन्ना जरूर हो जाना चाहिए।

आज के समय में आतंकवाद   

आज का इस्लामी आतंकवाद पहले की तुलना में और भी शातिर, कनेक्टेड और पकड़े जाने में मुश्किल है। संविधान की धज्जियाँ उड़ाने के लिए संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का ही सहारा लेकर की जा रही कई गतिविधियां इसका हिस्सा हैं। लेकिन जागरूकता, शिक्षा और हिम्मत के साथ हम अपने कैंपस, वर्कप्लेस और समाज को सुरक्षित रख सकते हैं। सतर्क रहें, जानकारी रखें और याद रखें- ये रेड फ्लैग्स सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि एक मौका हैं कि हम बहुत देर हो जाने से पहले ही, समय रहते एक्शन ले लें।

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